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किसानों के हक में जालंधर से सिंघु बॉर्डर पहुंचे दिव्यांग हरजीत, कहा- जीत के बाद ही लौटेंगे

Thu, 03 Dec 2020 06:52 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली        
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली         Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Thu, 03 Dec 2020 06:52 AM IST
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Divyang Harjeet reached Singhu border from Jalandhar in favour of farmers
हरजीत... - फोटो : अमर उजाला

करीब 300 किलोमीटर का सफर तय कर जलंधर से सिंघु बॉर्डर पहुंचे हरजीत ने कहा कि इरादे अगर नेक हो तो जीत हमेशा होती है। भले ही दिव्यांग हैं, लेकिन किसानों के हक की लड़ाई और उनके जज्बे को सलाम करते हुए कहा कि 25 नवंबर से यहां हैं। जीत मिलने के बाद ही घर लौटेंगे।

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किसानों के साथ युवा, बुजुर्ग, दिव्यांग, कानूनविदों और कारोबारियों सहित सहित सभी वर्ग के लोग धीरे धीरे आगे आने लगे हैं। हरजीत ने कहा कि अपने घर में खेती है, लेकिन आंदोलन के लिए दूसरों के भरोसे छोड़कर आए हैं ताकि आने वाली युवा पीढ़ी को खेती में भीषण परेशानियों से बचाया जा सके। देश की बेहतरी के लिए किसान न्याय की मांग कर रहे हैं, इस मुहिम को कोई और रंग नहीं दिया जाना चाहिए। इरादे सच्चे हैं और कृषि कानूनों को वापस लेने के अलावा कोई दूसरी मांग नहीं है।
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पंजाबी गायक पहुंचे धरना स्थल
पंजाब के गायक भी आंदोलन स्थल पर पहुंचकर किसानों की आवाज बुलंद कर रहे हैं। बुधवार सुबह पंजाबी गायक बब्बू मान और कंवर ग्रेवाल भी आंदोलनकारियों के समर्थन में पहुंचकर उनका हौंसला बढ़ाया। इस दौरान लोगों में भी उनका क्रेज दिखा। पंजाबी गायकों से मुलाकात कर बड़ी संख्या ने युवाओं ने  इनके साथ सेल्फी ली और आगे दुबारा आंदोलन स्थल पर आने का न्योता दिया।
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किताबों के स्टॉल पर खाली वक्त बिता रहे हैं किसान
लियो टॉल्स्टॉय, मैक्सिम गोर्की की पंजाबी में अनुवादित किताबें भी किसान आंदोलन के दौरान लोगों को अपनी ओर आकर्षित कर रही थीं। एक तरफ ट्रैक्टरों का काफिला तो इसी बीच मोगा से आए गुरतेज ने निजी किताबों का स्टॉल लगाया है ताकि खाली वक्त में लोग सड़कों पर बैठकर किताब पढ़ सकें। पढ़ने में दिक्कत न आए, इसलिए पराली की मोढ़े बना दिए ताकि धूप में लोग सार्थक किताबों को पढ़कर कुछ प्रेरणा ले सकें। गुरतेज ने बताया कि पंजाबी यूनिवर्सिटी पटियाला के कुछ छात्र भी पहुंचे हैं जो रोजाना लघु नाटिकाएं भी पेश करते हैं। इस कड़ी में नुक्कड़ नाटक डरना का भी कलाकारों ने मंचन किया।


दिल्लीवासी भी किसानों के हक की लड़ाई साथ
ब्लॉगर गुरलीन कौर ने कहा कि किसानों को देश विरोधी बताया जाना गलत है। अपने हक की लड़ाई लड़ रहे किसानों को आतंकवादी कहा जाना गलत है। गुरलीन ने कहा कि यह आंदोलन सफल होगा, क्योंकि किसान मजबूर होकर अपने घरों को छोड़कर पहुंचे हैं। पूरी दिल्ली आपके साथ है, दिल्ली तक आए और आपको पूरा हक मिलेगा। अभिनेत्री ने जसमीत कौर ने कहा कि किसानों को अलग अलग नाम से बुलाया जाना गलत है। अपने हक की लड़ाई लड़ रहे हैं, उनका समर्थन करने के लिए धीरे धीरे दिल्ली वासी भी आगे बढ़ने लगे हैं। उधर, शाम के वक्त जनकपुरी से भी संस्थाएं जरूरी सामान के साथ प्रदर्शन स्थल पर पहुंचे। 

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