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हाईकोर्ट के फैसले से तीनों पार्टियों ने ली राहत की सांस, जानिए सभी क्यों बच रहे थे उपचुनाव से
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दिल्ली
Updated Sat, 24 Mar 2018 10:02 AM IST
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कोर्ट के फैसले के बाद खुशी मनाते आप कार्यकर्ता
- फोटो : अमर उजाला
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दिल्ली विधानसभा के अयोग्य ठहराए गए 20 विधायकों के मामले में हाईकोर्ट के फैसले के बाद आम आदमी पार्टी अपनी बड़ी जीत मान रही है, इसका मुख्य कारण सरकार पर मंडरा रहा संकट टल गया है। तीनों ही पार्टियों ने इस फैसले से राहत की सांस ली है।
तीनों ही पार्टियां उपचुनाव में जाने से बच रही थीं, भले ही वे ऊपरी तौर पर चुनाव की मांग करती रही हैं। दरअसल आगामी चुनावों के ध्यानार्थ वे अपनी-अपनी मुठ्ठी बंद ही रखना चाहती थीं। भाजपा हो या कांग्रेस दोनों ही पार्टियां दिल्ली विधानसभा चुनावों में हुई करारी हार के बाद आप को किसी न किसी मुद्दे पर घेरे रखना चाहती थी।
यही कारण है कि लाभ के पद को लेकर पर्दे के पीछे से इन्हीं में से एक पार्टी ने चुनाव आयोग से लेकर राष्ट्रपति तक मुद्दा उठाया। 20 विधायकों के अयोग्य ठहराए जाने के बाद कांग्रेस व भाजपा की निगाह उपचुनाव की अपेक्षा आप के 17 अन्य विधायकों को अयोग्य ठहराने पर ज्यादा निगाह थी।
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दरअसल अस्पतालों की रोगी कल्याण समिति के अध्यक्ष बनाए गए 27 विधायकों (इनमें पहले से अयोग्य ठहराए गए करीब 10 विधायक शामिल हैं) के खिलाफ भी लाभ का पद का मामला
चुनाव आयोग के पास विचाराधीन है।
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तीनों ही पार्टियां उपचुनाव में जाने से बच रही थीं, भले ही वे ऊपरी तौर पर चुनाव की मांग करती रही हैं। दरअसल आगामी चुनावों के ध्यानार्थ वे अपनी-अपनी मुठ्ठी बंद ही रखना चाहती थीं। भाजपा हो या कांग्रेस दोनों ही पार्टियां दिल्ली विधानसभा चुनावों में हुई करारी हार के बाद आप को किसी न किसी मुद्दे पर घेरे रखना चाहती थी।
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यही कारण है कि लाभ के पद को लेकर पर्दे के पीछे से इन्हीं में से एक पार्टी ने चुनाव आयोग से लेकर राष्ट्रपति तक मुद्दा उठाया। 20 विधायकों के अयोग्य ठहराए जाने के बाद कांग्रेस व भाजपा की निगाह उपचुनाव की अपेक्षा आप के 17 अन्य विधायकों को अयोग्य ठहराने पर ज्यादा निगाह थी।
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दरअसल अस्पतालों की रोगी कल्याण समिति के अध्यक्ष बनाए गए 27 विधायकों (इनमें पहले से अयोग्य ठहराए गए करीब 10 विधायक शामिल हैं) के खिलाफ भी लाभ का पद का मामला
चुनाव आयोग के पास विचाराधीन है।
इन पार्टियों की नीति थी कि यदि चुनाव आयोग इन 17 विधायकों को भी अयोग्य ठहरा देता है, तो सरकार स्वयं ही अल्पमत में आ जाएगी। सूत्रों के अनुसार, उपचुनाव से तीनों ही पार्टियां बचना चाहती थीं। इसका एक मुख्य कारण है कि इन तीनों में से जिस भी पार्टी को उपचुनाव में कम सीटें मिलतीं, उसका उसे आम चुनावों में नुकसान भी उठाना पड़ता।
कांग्रेस के पास वर्तमान में हालांकि खोने के लिए कुछ भी नहीं है, लेकिन उपचुनाव में यदि उसे ज्यादा कुछ न मिलता, तो आम चुनावों में उसकी डगर मुश्किल जरूर हो जाती। वहीं भाजपा राजौरी गार्डन सीट उपचुनाव में जीत के बाद उत्साहित जरूर थी, लेकिन बवाना उपचुनाव में जिस पर उसे करारी हार मिली, उससे उसका भी हौसला काफी डगमगा गया है।
राजौरी गार्डन सीट भी मनजिंदर सिंह सिरसा ने अपने दम पर निकाली थी। उधर, बवाना उपचुनाव के बाद आप का हौसला बढ़ा, लेकिन उसे भी पता था कि उपचुनाव में सभी 20 सीटों पर विजय हासिल करना असंभव है। ऐसे में जितनी भी सीटें कम होती उसका नुकसान कहीं न कहीं उसे उठाना पड़ सकता था।
कांग्रेस के पास वर्तमान में हालांकि खोने के लिए कुछ भी नहीं है, लेकिन उपचुनाव में यदि उसे ज्यादा कुछ न मिलता, तो आम चुनावों में उसकी डगर मुश्किल जरूर हो जाती। वहीं भाजपा राजौरी गार्डन सीट उपचुनाव में जीत के बाद उत्साहित जरूर थी, लेकिन बवाना उपचुनाव में जिस पर उसे करारी हार मिली, उससे उसका भी हौसला काफी डगमगा गया है।
राजौरी गार्डन सीट भी मनजिंदर सिंह सिरसा ने अपने दम पर निकाली थी। उधर, बवाना उपचुनाव के बाद आप का हौसला बढ़ा, लेकिन उसे भी पता था कि उपचुनाव में सभी 20 सीटों पर विजय हासिल करना असंभव है। ऐसे में जितनी भी सीटें कम होती उसका नुकसान कहीं न कहीं उसे उठाना पड़ सकता था।
aap mla
- फोटो : vivek nigam
ऐसे में ऊपरी तौर पर तीनों ही पार्टियां भले ही चुनाव का दम भर रही थीं, लेकिन अप्रत्यक्ष रूप से वे अपनी मुठ्ठी आम चुनावों तक बंद ही रखना चाहती थी। कांग्रेस व भाजपा के नेता भी दबी जुबान में यह मान रहे थे कि फिलहाल दिल्ली में उनका सत्ता में आना काफी मुश्किल है, तो आप के नेताओं का भी मानना रहा है कि दूसरी बार सत्ता में तो आ जाएंगे, लेकिन अब इस प्रकार का बहुमत संभव नहीं है।
गहलोत मंत्री पद पर बने रहेंगे
चुनाव आयोग के इस फैसले के बाद दिल्ली सरकार को बड़ी राहत मिली है। सरकार में मंत्री कैलाश गहलोत को घेरने के लिए भाजपा नेताओं ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर उन्हें पद से हटाने की मांग की थी।
अदालत ने इस याचिका पर गहलोत को नोटिस जारी कर जवाब मांगा हुआ है। अब इस फैसले के बाद भाजपा विधायकों की याचिका स्वयं ही आधारहीन हो गई और गहलोत मंत्री पद पर बने रहेंगे।
गहलोत मंत्री पद पर बने रहेंगे
चुनाव आयोग के इस फैसले के बाद दिल्ली सरकार को बड़ी राहत मिली है। सरकार में मंत्री कैलाश गहलोत को घेरने के लिए भाजपा नेताओं ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर उन्हें पद से हटाने की मांग की थी।
अदालत ने इस याचिका पर गहलोत को नोटिस जारी कर जवाब मांगा हुआ है। अब इस फैसले के बाद भाजपा विधायकों की याचिका स्वयं ही आधारहीन हो गई और गहलोत मंत्री पद पर बने रहेंगे।