हारे विधायकों की मठाधीशी नहीं चाहते कांग्रेसी
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कांग्रेस संगठन में हारे सांसद, विधायक व पार्षदों की मठाधीशी कांग्रेस के कार्यकर्ता व पूर्व पदाधिकारी नहीं चाहते। वार्ड, ब्लॉक, जिला व प्रदेश कार्यकारिणी पदाधिकारी व अध्यक्ष के चयन के लिए पर्यवेक्षकों की टीम बनाई गई है।
यह पर्यवेक्षक जहां पूर्व पार्षद, विधायक या सांसदों के बताई गई जगह पर राय जानने के लिए बैठक बुला रहे हैं, वहां लोगों ने आपत्ति दर्ज कराई है। कुछ जगह झगड़े भी सामने आए हैं।
सीमापुरी के पूर्व विधायक वीर सिंह धींगान के क्षेत्र में बैठक के दौरान काफी कहासुनी हुई है।
लवली तक पहुंची नेताओं की शिकायत
मुंडका का एक कार्यकर्ता सोमवार को प्रदेश कार्यालय में शिकायत करते हुए पाया गया है। पर्यवेक्षकों का कहना है कि हम सबको बुला रहे हैं।
वहीं एक पूर्व जिलाध्यक्ष का कहना है कि अगर पूर्व सांसद या विधायक के बताए जगह पर बुलाकर पूछेंगे तो उनके चहेते ही आएंगे। फिर साफ सुथरा चयन कैसे होगा?
पर्यवेक्षकों की तरफ से कांग्रेस के संगठन को नए सिरे से तैयार करने के लिए की जा रही कवायद में झगड़े और गुस्से का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि शिकायतें प्रदेश अध्यक्ष अरविंदर सिंह तक पहुंची हैं।
फिर जमने लगे नेता
यही वजह है कि उन्होंने तमाम पर्यवेक्षकों को अब बैठक लेने की बजाय अपने हिसाब से मिलकर राय जानने के निर्देश दिए हैं। वहीं संगठन में जगह पाने के लिए नेताओं ने प्रदेश में हाजिरी लगानी शुरू कर दी है।
नई दिल्ली के पर्यवेक्षक हरिकिशन जिंदल का कहना है कि पहली बार संगठन में वार्ड स्तर का गठन हो रहा है। अभी तक ब्लॉक, जिला और प्रदेश का अध्यक्ष व कार्यकारिणी होती थी। इस बार वार्ड संगठन भी खड़ा होगा। प्रत्येक ब्लॉक में दो वार्ड होंगे। उसी के हिसाब से बिना दबाव के रिपोर्ट तैयार होगी।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अरविंदर सिंह ने कहा कि उन्होंने पर्यवेक्षकों को फेयर रिपोर्ट लाने के निर्देश दिए हैं। बैठक बुलाने को नहीं कहा। फिर भी अगर कोई पर्यवेक्षक की टीम गलत या पक्षपातपूर्ण रिपोर्ट लाती है तो वहां फिर से पर्यवेक्षक भेजे जाएंगे। शुरुआत में वार्ड व ब्लॉक का गठन होगा। उसके बाद जिला व प्रदेश संगठन में लोगों को शामिल किया जाएगा।