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साइलेंट बीमारी डायबिटीज: 25 से 30 साल की उम्र में तेजी से बढ़ रहा शूगर, शुरुआती चरण में नहीं दिखते ये आम लक्षण

Mon, 19 Jan 2026 09:01 PM IST
विकास कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: विकास कुमार Updated Mon, 19 Jan 2026 09:01 PM IST
सार

विशेषज्ञों का कहना है कि डायबिटीज के शुरुआती चरण में कई बार कोई लक्षण नहीं दिखते। न ज्यादा प्यास, न बार-बार पेशाब और न ही कमजोरी ऐसे में मरीज को बीमारी का पता तब चलता है जब शुगर का स्तर काफी बढ़ चुका होता है।

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Diabetes rising rapidly between ages of 25 and 30 these common symptoms not visible in early stages
युवाओं में तेजी से बढ़ रही डायबिटीज - फोटो : adobe stock

विस्तार

डायबिटीज अब सिर्फ उम्रदराज लोगों की बीमारी नहीं रह गई है। बिना किसी स्पष्ट लक्षण के यह बीमारी चुपचाप शरीर में बढ़ती जा रही है, जिससे समय पर पहचान नहीं हो पा रही। विशेषज्ञों के अनुसार रूटीन हेल्थ चेकअप न कराना, गलत खानपान और खराब लाइफस्टाइल डायबिटीज के मामलों को तेजी से बढ़ा रहे हैं।

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25 से 30 साल की उम्र में भी डायबिटीज के बढ़ते मामले
पहले जहां डायबिटीज 40 वर्ष की उम्र के बाद सामने आती थी, वहीं अब 25 से 30 वर्ष की आयु के युवाओं में भी इसके मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। फास्ट फूड, मीठे पेय, देर रात तक जागना, शारीरिक गतिविधि की कमी और तनाव इसकी प्रमुख वजह मानी जा रही है।

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बिना लक्षण के बढ़ने से बढ़ रही मुश्किलें
विशेषज्ञों का कहना है कि डायबिटीज के शुरुआती चरण में कई बार कोई लक्षण नहीं दिखते। न ज्यादा प्यास, न बार-बार पेशाब और न ही कमजोरी ऐसे में मरीज को बीमारी का पता तब चलता है जब शुगर का स्तर काफी बढ़ चुका होता है। इससे किडनी, आंखों, दिल और नसों से जुड़ी जटिलताओं का खतरा बढ़ जाता है।

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युवाओं में टाइप-2 डायबिटीज की अधिकता
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार युवाओं में टाइप-2 डायबिटीज के मामले तेजी से सामने आ रहे हैं, जो पहले अधिकतर बुजुर्गों में पाई जाती थी। इसकी सबसे बड़ी वजह असंतुलित आहार, मोटापा और शारीरिक श्रम की कमी है।
 

अब ये साइलेंट बीमारी बन चुकी है
ईस्ट दिल्ली स्थित गुरु तेग बहादुर अस्पताल के डॉ. प्रवीण कुमार ने कहा कि डायबिटीज अब साइलेंट बीमारी बन चुकी है। बिना लक्षण के यह धीरे-धीरे शरीर को नुकसान पहुंचाती है। युवा वर्ग यह सोचकर जांच नहीं कराता कि उन्हें कोई परेशानी नहीं है, जबकि यही सबसे बड़ी गलती है। साल में कम से कम एक बार ब्लड शुगर की जांच जरूर करानी चाहिए। संतुलित आहार, नियमित व्यायाम और तनाव से दूरी ही डायबिटीज से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका है।

इनको खतरा अधिक
विशेषज्ञों के अनुसार जिन लोगों के परिवार में डायबिटीज का इतिहास रहा हो, वजन अधिक हो या लाइफस्टाइल असंतुलित हो, तो युवाओं को भी नियमित जांच को गंभीरता से लेना चाहिए। समय रहते पहचान से न सिर्फ बीमारी को नियंत्रित किया जा सकता है, बल्कि गंभीर जटिलताओं से भी बचा जा सकता है।

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