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मास्टर प्लान-2031 से मिलेगी हर संपत्ति की विस्तृत जानकारी, घर बैठे एक क्लिक में होगा सबकुछ सामने
Sat, 01 Jun 2019 09:48 AM IST
शाहरुख खान
प्रद्युमन उपाध्याय, अमर उजाला, गाजियाबाद
प्रद्युमन उपाध्याय, अमर उजाला, गाजियाबाद
Published by: शाहरुख खान
Updated Sat, 01 Jun 2019 09:48 AM IST
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महानगर सहित प्रदेश के सभी शहरों की हर संपत्ति की विस्तृत जानकारी लोगों को जल्द एक क्लिक पर मिलेगी। शहरों का जियोग्राफिक इंफॉर्मेशन सिस्टम (जीआईएस) बेस्ड सेंट्रलाइज्ड मास्टर प्लान 2031 तैयार कराने के लिए जीडीए की ओर से माटर प्लान-2021 का विस्तृत ब्यौरा शासन को उपलब्ध कर दिया गया है।
मास्टर प्लान के लिए प्रदेश स्तर पर सलाहकार एजेंसी के चुनाव की प्रक्रिया शुरू हो गई है। निविदा प्रक्रिया पूरी होते ही मास्टर प्लान-2031 पर काम शुरू हो जाएगा।
मास्टर प्लान 2021 की मियाद पूरी होने के चलते 10 वर्ष के लिए मास्टर प्लान 2031 बनाया जाना है। इस बार मास्टर प्लान जीआईएस बेस्ड होगा। लोग घर बैठे ऑनलाइन जमीन का लैंडयूज जांच सकेंगे।
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लैंडयूज की जानकारी के लिए उन्हें जीडीए के साथ अधिकारियों के यहां चक्कर नहीं काटने होंगे। नया मास्टर प्लान सेटेलाइट इमेजिंग सर्वे के आधार होगा। इसके लिए केंद्र की ओर से इसरो की सहायक नेशनल रिमोट सेंसिंग एजेंसी (एनआरएसए) से आंकड़ा लिया जाएगा।
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मास्टर प्लान के लिए प्रदेश स्तर पर सलाहकार एजेंसी के चुनाव की प्रक्रिया शुरू हो गई है। निविदा प्रक्रिया पूरी होते ही मास्टर प्लान-2031 पर काम शुरू हो जाएगा।
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मास्टर प्लान 2021 की मियाद पूरी होने के चलते 10 वर्ष के लिए मास्टर प्लान 2031 बनाया जाना है। इस बार मास्टर प्लान जीआईएस बेस्ड होगा। लोग घर बैठे ऑनलाइन जमीन का लैंडयूज जांच सकेंगे।
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लैंडयूज की जानकारी के लिए उन्हें जीडीए के साथ अधिकारियों के यहां चक्कर नहीं काटने होंगे। नया मास्टर प्लान सेटेलाइट इमेजिंग सर्वे के आधार होगा। इसके लिए केंद्र की ओर से इसरो की सहायक नेशनल रिमोट सेंसिंग एजेंसी (एनआरएसए) से आंकड़ा लिया जाएगा।
केंद्र सरकार की ओर से सेंट्रलाइज्ड मास्टर प्लान के लिए सर्वे का काम लगभग पूरा हो चुका है। प्रदेश के चीफ टाउन प्लानर इसके नोडल अधिकारी हैं। इसके लिए जीडीए से वर्तमान 2021 के मास्टर प्लान का भी पूरा ब्यौरा मांगा गया था।
मास्टर प्लान पर तैयार करने में करीब दो करोड़ के खर्च का अनुमान है। पूरा खर्चा केंद्र सरकार उठाएगी। इसका पैसा अमृत योजना में प्रदेश सरकार को मिलने वाली ग्रांड से केंद्र समायोजित करेगा।
जीडीए अधिकारियों के मुताबिक पहले भी इसके लिए निविदा प्रक्रिया आयोजित की गई थी, लेकिन केवल एक एजेंसी के सामने आने से प्रक्रिया को रद्द करना पड़ा।
अब नए सिरे से निविदा प्रक्रिया शुरू की जा रही है। सीएटीपी इश्तियाक अहमद ने बताया कि मास्टर प्लान शासन स्तर से सलाहकार एजेंसी के चुनाव की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। एजेंसी फाइनल होने के बाद नया मास्टर प्लान एक साल में तैयार होने की संभावना है।
मास्टर प्लान पर तैयार करने में करीब दो करोड़ के खर्च का अनुमान है। पूरा खर्चा केंद्र सरकार उठाएगी। इसका पैसा अमृत योजना में प्रदेश सरकार को मिलने वाली ग्रांड से केंद्र समायोजित करेगा।
जीडीए अधिकारियों के मुताबिक पहले भी इसके लिए निविदा प्रक्रिया आयोजित की गई थी, लेकिन केवल एक एजेंसी के सामने आने से प्रक्रिया को रद्द करना पड़ा।
अब नए सिरे से निविदा प्रक्रिया शुरू की जा रही है। सीएटीपी इश्तियाक अहमद ने बताया कि मास्टर प्लान शासन स्तर से सलाहकार एजेंसी के चुनाव की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। एजेंसी फाइनल होने के बाद नया मास्टर प्लान एक साल में तैयार होने की संभावना है।
बढ़ेगा जीडीए का दायरा
जीडीए अधिकारियों ने बताया कि नए मास्टर प्लान में जमीन का दायरा भी बढ़ेगा। 2021 के मास्टर प्लान में 2200 एकड़ जमीन ली गई थी। अब नया मास्टर प्लान करीब 3500 एकड़ जमीन पर तैयार किए जाने की संभावना है।
मास्टर प्लान में आवासीय, इंडस्ट्रियल एरिया, ग्रीन बेल्ट के साथ अन्य सभी क्षेत्रों को चिह्नित किया जाएगा। मास्टर प्लान तैयार होने के बाद जीडीए की ओर से जोनल प्लान तैयार करने की कवायद शुरू की जाएगी।
मास्टर प्लान में आवासीय, इंडस्ट्रियल एरिया, ग्रीन बेल्ट के साथ अन्य सभी क्षेत्रों को चिह्नित किया जाएगा। मास्टर प्लान तैयार होने के बाद जीडीए की ओर से जोनल प्लान तैयार करने की कवायद शुरू की जाएगी।
मनमानी पर लगेगी लगाम, लोगों को राहत
अब तक लागू मास्टर प्लान को तैयार कराने की जिम्मेदारी जीडीए सहित अन्य प्राधिकरणों की होती थी। पूर्व में मास्टर प्लान बनाते वक्त कई खामियां भी सामने आई थीं। इसमें अधिकारियों की ओर किसी क्षेत्र का व्यावसायिक लैंड यूज को ग्रीन मार्क कर उसकी वेल्यू कम करने के कई मामले सामने आए थे। साथ ही अन्य तकनीकी दिक्कतों और जानकारी लेने के लिए भी लोगों को जीडीए में अधिकारियों के पास बार-बार चक्कर काटने होते थे। तमाम दिक्कतों को देखते हुए लोगों को राहत देने के लिए सेंट्रलाइज्ड जीआईएस बेस्ड मास्टर प्लान तैयार कराया जा रहा है।