डेंगू का कहर: मच्छरों की पैदावार बढ़ाने में दिल्ली वाले अव्वल, राजधानी में सात नए मामले, एक हफ्ते में 2889 केस
दिल्ली नगर निगम के स्वास्थ्य चिकित्सा अधिकारी लल्लन राम वर्मा ने कहा है कि जब तक दिल्ली के लोगों का सहयोग नहीं मिलेगा, निगम क्या कर लेगा। उन्होंने कहा कि गोवा जैसे राज्य में हफ्ते में पांच-छह नोटिस बड़ी मुश्किल से लोगों को मिलते हैं। वहीं दिल्ली में हर हफ्ते हजारों लोगों को नोटिस दिया जा रहा है। यहां की स्थिति चिंताजनक है।
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राजधानी दिल्ली मच्छरों की पैदावार बढ़ाने में अव्वल साबित हुई है। देश का कोई अन्य शहर शायद ही दिल्ली जैसा हो, जहां नागरिकों को मच्छर पैदा करने के लिए इतनी बड़ी संख्या में नोटिस मिल रहे हों। दिल्ली में पिछले एक हफ्ते में 2889 लोगों को फिर से दिल्ली नगर निगम का नोटिस मिला है। ये सभी मच्छर जनित बीमारियों को बढ़ाने के प्रति जिम्मेदार पाए गए हैं। निगम ने स्वास्थ्य विभाग को इन सभी लोगों के खिलाफ डीएमसी एक्ट के तहत कानूनी कार्रवाई करने का निर्देश जारी किया है।
दिल्ली में इस साल अभी से मच्छर जनित बीमारियां रफ्तार पकड़ी हुई हैं। तभी तो पिछले साल मौजूदा समय तक मलेरिया के आठ, डेंगू के 30, जबकि चिकनगुनिया के केवल चार मामले आए थे। लेकिन इस साल अभी तक मलेरिया 19, डेंगू के 118 और चिकनगुनिया के आठ मामले आए हैं। इसमें सबसे ज्यादा गंभीर मसला ये है कि डेंगू के मामले इस साल अभी से तीव्र गति के साथ बढ़ते जा रहे हैं। दिल्ली नगर निगम की ओर से सोमवार को जारी की गई रिपोर्ट के मुताबिक इस हफ्ते फिर से डेंगू के सात नए मामले दर्ज किए गए हैं।
मच्छर जनित बीमारियों ने पिछले साल दिल्ली में कई साल का रिकॉर्ड तोड़ दिया था। पिछले साल शुरुआत में तो डेंगू का दिल्ली में इतना प्रभाव नहीं था, लेकिन साल के आखिरी कुछ महीनों में डेंगू दिल्ली वासियों का काल बन गया। साल के अंत तक डेंगू के रिकॉर्ड 9613 लोग डेंगू की चपेट में आए और 23 लोगों की इसकी वजह से जान चली गई।
घनी आबादी वाली दिल्ली के ज्यादातर नागरिक घर और बाहर दोनों जगह गंदगी फैलाने में संकोच नहीं करते। गमलों, अपने बागीचे की क्यारियों को नियमित रूप से साफ नहीं करते, कॉलोनियों में लोगों के घर के आस-पास पानी जमा रहता है, इससे आम लोग बेफिक्र रहते हैं। इतना ही नहीं बहुत से लोग पूरी गर्मी अपने कूलर तक की सफाई नहीं करते। लोगों के छतों पर कबाड़, खाली बर्तन इत्यादि लापरवाही पूर्वक बिखरा रहता है। ऐसी लापरवाही करने पर पिछले साल इस समय तक दिल्ली नगर निगम ने 8537 लोगों को कानूनी नोटिस भेजा था, इस साल 27001 लोगों को कानूनी नोटिस भेजा जा चुका है।