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कृषि कानूनों के खिलाफ आज जिला मुख्यालयों पर किसानों का प्रदर्शन और अनशन, कल करेंगे हाईवे जाम 

Mon, 14 Dec 2020 04:33 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, दिल्ली Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Mon, 14 Dec 2020 04:33 AM IST
सार

 
  • टिकैत का आरोप- केंद्र सिर्फ कॉरपोरेट के लिए काम कर रहा
  • पंजाब के डीआईजी (कारागार) ने किसानों के सामर्थन में दिया इस्तीफा
  • किसानों के मुद्दों के शांतिपूर्ण व निष्पक्ष समाधान होने की उम्मीद: रो खन्ना
  • गृहमंत्री अमित शाह ने केंद्रीय मंत्री तोमर व सोम प्रकाश के साथ किया मंथन

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Demonstration and fasting of farmers at district headquarters today
आंदोलनरत किसान... - फोटो : amar ujala

विस्तार

कृषि सुधार वाले तीनों नए कानूनों को वापस लेने की जिद पर अड़े किसानों ने आज देशभर के जिला मुख्यालयों पर प्रदर्शन करने का एलान किया है। साथ ही किसान अपनी मांगें पूरी कराने के लिए भूख हड़ताल भी करेंगे। सिंघु बॉर्डर पर आंदोलन में शामिल हर संगठन से एक-एक नेता अनशन पर बैठेगा। किसान भी इसमें शामिल हो सकते हैं। आंदोलन की अगली रणनीति का एलान शाम को किया जाएगा। 

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राष्ट्रीय किसान मजदूर संघ के अध्यक्ष शिवकुमार कक्काजी ने कहा कि एक दिन के अनशन की वजह से किसानों ने दिल्ली जयपुर हाईवे बंद करने का निर्णय एक दिन आगे बढ़ा दिया है। हाईवे अब मंगलवार को बंद होगा। जयपुर-दिल्ली हाईवे जाम करने के लिए राजस्थान, हरियाणा बॉर्डर पर रविवार को बड़ी संख्या में किसान पहुंच गए हैं। इस बीच गृहमंत्री अमित शाह ने रविवार को अपने आवास पर केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर और सोम प्रकाश के साथ किसानों को मनाने पर मंथन किया। इसके अलावा गृहमंत्री ने पंजाब के भाजपा नेताओं के साथ भी एक अलग बैठक की। 
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उधर, सिंघु बॉर्डर पर प्रेस कांफ्रेंस में किसान नेता गुरनाम सिंह चढूनी ने बताया कि सोमवार को सुबह 8 बजे से शाम 5 बजे तक अनशन रहेगा। इसके अलावा सभी जिला मुख्यालयों पर धरना प्रदर्शन होंगे और दिल्ली बॉर्डर पर किसानों का आंदोलन जैसा चल रहा है जारी रहेगा। 
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पंजाब के डीआईजी (कारागार) ने किसानों के समर्थन में दिया इस्तीफा 
चंडीगढ़। पंजाब के उपमहानिरीक्षक (कारागार) लखमिंदर सिंह जाखड़ ने किसानों के समर्थन में इस्तीफा दे दिया है। जाखड़ ने रविवार को कहा, मैं अपने भाइयों के लिए लड़ूंगा। उन्होंने बताया कि शनिवार को राज्य सरकार के पास इस्तीफा भेज दिया है। 

अगले दौर की वार्ता जल्द 
केंद्र के तीन नए कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों के अपना प्रदर्शन तेज करने के बीच केंद्रीय मंत्री कैलाश चौधरी ने रविवार को कहा कि सरकार जल्द ही एक तारीख तय कर किसान संघ के नेताओं को अगले दौर की वार्ता के लिए बुलाएगी। उल्लेखनीय है कि केंद्र सरकार और 40 किसान संघों के प्रतिनिधियों के बीच पहले हुई पांच दौर की वार्ता बेनतीजा रही थीं।

केंद्र सिर्फ कॉरपोरेट के लिए काम कर रही: राकेश टिकैत
भारतीय किसान यूनियन के प्रवक्ता राकेश टिकैत ने कहा, केंद्र सरकार सिर्फ उद्योगपतियों की हितैषी है और कॉरपोरेट क्षेत्र के लिए ही काम कर रही है। जब तक हमारी मांगें नहीं मान ली जातीं, आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने कहा, कानून से पहले गोडाउन निर्माण पूरा होना इस बात का संकेत है कि सरकार की योजना कुछ और ही है।

सरकार की फाइल के सिर्फ पहले पन्ने पर किसानों का नाम है भीतर सिर्फ और सिर्फ व्यापारियों की बातें हैं। ऐसा नहीं चलेगा। टिकैत ने कहा, आंदोलन की कमान किसानों के हाथ में है और सरकार को किसानों से दोबारा बात करनी चाहिए। जरूरी है कि सभी मुद्दों पर बात हो लेकिन अब तक कानूनों को लेकर सरकार ने कोई बात तक नहीं की है। 

केजरीवाल आज अपवाल पर

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने किसानों के समर्थन में एक दिन का उपवास रखने का ऐलान किया है। उन्होंने देश की जनता से भी किसानों की मांगों के समर्थन में उपवास पर रहने की अपील की है। किसानों के बहाने उन्होंने केंद्र की भाजपा सरकार पर भी जमकर निशाना साधा और कहा कि केंद्र की भाजपा सरकार ने अहंकार छोड़ किसान विरोधी नीति को छोड़ने की मांग की। 

मुख्यमंत्री ने किसानों के बहाने केंद्र सरकार पर जमकर निशाना साधा। प्रेस कान्फ्रेंस में कहा कि भाजपा के मंत्री और नेता किसानों को देशद्रोही बता रहे है। आंदोलन को बदनाम कर रहे है। जबकि सच्चाई यह है कि हजारों पूर्व सैनिक भी किसानों के साथ धरने पर है। देश के खिलाड़ी, सेलिब्रिटी, डॉक्टर भी समर्थन में हैं। भाजपा बताएं कि क्या ये सभी लोग देशद्रोही हैं? अन्ना आंदोलन के दौरान भी कांग्रेस पार्टी की सरकार ने आंदोलनकारियों को देश विरोधी बता कर बदनाम किया था, आज वही काम भाजपा सरकार कर रही है।

किसान कानून के विरोध में मुख्यमंत्री ने कहा कि अभी तक देश में अनाज की जमाखोरी अपराध था, लेकिन इस कानून से जमाखोरी अपराध नहीं होगा। कोई कितना भी अनाज की जमाखोरी कर सकता है। जनता अगर इस कानून के खिलाफ है तो केंद्र सरकार को अपना अहंकार छोड़ देना चाहिए। इन्हें वापस लिया जाए और एमएसपी पर फसलें खरीदने की गारंटी देने वाला बिल बनाया जाए।

किसानों के मुद्दों के शांतिपूर्ण व निष्पक्ष समाधान होने की उम्मीद: रो खन्ना 
वाशिंगटन। भारतीय मूल के अमेरिकी सांसद रो खन्ना ने भी किसानों की सुध ली है। उन्होंने कहा, भारत में किसानों के मुद्दों के शांतिपूर्ण और निष्पक्ष समाधान की उम्मीद है। रो खन्ना ने ट्वीट किया अमेरिका और भारत लोकतंत्र की समृद्ध परंपरा साझा करते हैं। किसान दोनों ही देशों की रीढ़ की हड्डी हैं और उनकी बात हर हाल में सुनी जानी चाहिए। मैं उम्मीद करता हूं कि सरकार और किसानों के बीच चल रही बातचीत समाधान तक पहुंचेगी। 

आंदोलन खत्म कर रहे गुटों का हमसे कोई लेना देना नहीं
चढूनी ने कहा, कुछ समूह हैं जिनका कहना है कि वे सरकार के कानूनों का समर्थन करते हैं और आंदोलन खत्म कर रहे हैं। मैं साफ कर देना चाहता हूं कि इन समूहों का हमसे कोई लेना देना नहीं है। ये लोग सरकार के इशारों पर चल रहे थे, दरअसल सरकार के कहने पर आंदोलन में शामिल हुए और यहां रहते हुए फूट डालकर आंदोलन को कमजोर करने की साजिश कर रहे हैं। 

सरकारी एजेंसियां दिल्ली नहीं पहुंचने दे रहीं पर आंदोलन नहीं रुकेगा
किसान नेता शिव कुमार कक्का ने कहा, सरकारी एजेंसियां किसानों को दिल्ली नहीं पहुंचने दे रही हैं। लेकिन इससे हमारी ताकत कतई कमजोर नहीं पड़ेगी। हमारा आंदोलन तब तक जारी रहेगा जब तक सरकार कानून वापस नहीं ले लेती। सभी किसान संगठन एक साथ हैं। 

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