नोटबंदी की वजह से बेटे के इलाज के लिए दर-दर भटकी एक मां
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गढ़ी चौखंडी में रहने वाली ममता के बेटे के हाथ में फ्रेक्चर आ गया था। पक्का प्लास्टर कराने के लिए शुक्रवार को बेटे को लेकर जिला अस्पताल आईं, लेकिन यहां सरकार के नियम के अनुसार, 15 दिसंबर की आधी रात से 500 के पुराने नोट लेने बंद कर दिए गए।
ममता ने बताया कि नए नोट भी नहीं थे, जिससे प्लास्टर करा सकें। बड़ी मुश्किल से 100-100 के नोट उधार लेकर्र आइं, तब जाकर प्लास्टर हो पाया। सिर्फ ममता ही नहीं अस्पताल में आए कई मरीजों को नए नियम से इलाज कराने में परेशानी आई। हालांकि ऐसे मरीजों को कोई दिक्कत न हो, इसका अस्पताल प्रशासन ध्यान रख रहा था।
‘दिक्कत और बढ़ गई’
सलारपुर के रहने वाले योगेंद्र सिंह ने बताया कि उनकी बेटी का दिल्ली के सरकारी अस्पताल में इलाज चल रहा है। उसके लिवर में पानी भरा हुआ है। वहां पर दवाई लेते थे, तो पूरे 500 रुपये की दवाई खरीदनी पड़ती। काफी परेशानी हो रही थी।
इस वजह से बेटी को लेकर जिला अस्पताल में इलाज कराने आया हूं, लेकिन यहां आकर पता चला कि पुराने 500 रुपये केनोट बंद हो गए हैं। ऐसे में दिक्कत और बढ़ गई है।
खास परेशानी नहीं : सीएमएस
अस्पताल के सीएमएस डॉ. एन एम माथुर ने बताया कि नियम के मुताबिक, 15 दिसंबर के बाद से 500 रुपये के पुराने नोट लेने बंद कर दिए गए हैं। अस्पताल में नोट बंद होने से खास परेशानी नहीं हुई है।
कोई मरीज इलाज से वंचित नहीं रहा है। चाइल्ड पीजीआई में स्वाइप मशीन मंगाने की बात चल रही है। दरअसल, यहां 250 रुपये का रजिस्ट्रेशन होता है। अगर स्वाइप मशीन आ जाएगी तो अस्पताल प्रशासन को आसानी होगी।
मोबाइल वॉलेट से पेमेंट
मेडिकल स्टोर पर भी 500 के पुराने नोट बंद हो गए हैं। इससे लोगों को काफी दिक्कत हुई। हालांकि मेडिकल स्टोर संचालक मोबाइल वॉलेट से पेमेंट ले रहे हैं। केमिस्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष अनूप खन्ना ने बताया कि बैंकों के बाहर काफी भीड़ है, इसलिए स्वाइप मशीन मिलना मुश्किल हो रहा है।
फिलहाल मोबाइल वॉलेट से पेमेंट लेने को कहा गया है। दवाइयों की सप्लाई करने वालों को भी कहा गया है कि वे दुकानदारों को कैशलेस लेनदेन की तरफ बढ़ाएं।