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अभी भी डरा देने वाला है नोटबंदी का हाल, तीन महीने बीत जाने के बाद
ब्यूरो/अमर उजाला, नोएडा
Updated Thu, 09 Feb 2017 02:11 PM IST
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आठ नवंबर को नोटबंदी के तीन माह पूरे होने के बाद अभी तक ग्रेटर नोएडा में बैंकों के एटीएम पर स्थित पूरी तरह सामान्य नहीं हो पाई है। एटीएम में नकदी आते ही उसके बाहर कतार लग जाती है और जबतक नकदी समाप्त नहीं होती कतार खत्म होने का नाम नहीं लेती।
हालांकि, बैंकों में चेकों से भुगतान में जरूर कतार काफी हद तक कम हुई है। फिर भी हालात यहां भी पूरी तरह सामान्य नहीं है। बुधवार को अमर उजाला टीम ने बैंकों और एटीएम के बाहर हालात का जायजा लिया और कतार में लगे लोगों से बातचीत की।
शाम को ही अधिकतर बैंकों के एटीएम में डाली जा रही नकदी
शहर के एचडीएफसी बैंक, एक्सिस बैंक, यस बैंक में बैंक बंद होने और शाम छह बजे के बाद एटीएम में नकदी डाली जाती है। हालांकि, भारतीय स्टेट बैंक, इंडसइंड बैंक के एटीएम में दिन में नकदी सुबह या दोपहर में डाली जाती है। ऐसे में नकदी आते ही लोगों की कतार लगने शुरू हो गईं और जबतक कैश खत्म नहीं हुआ तबतक एटीएम के आगे से कतार नहीं हटी।
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छात्रों और श्रमिक वर्ग के कारण एटीएम पर लगी रहती हैं कतारें
ग्रेटर नोएडा में बड़ा एजुकेशन हब होने के कारण यहां करीब सवा लाख के आसपास छात्र हैं। वहीं, शहर में बड़े औद्योगिक समूहों और छोटी-छोटी कंपनियों में भी करीब डेढ़ लाख से अधिक श्रमिक वर्ग रहता है। इनमें से ज्यादातर का बैंक खाता कहीं और होता है और यहां एटीएम से ही पैसे का लेनदेन करते हैं। ऐसे में एटीएम के बाहर छात्रों और श्रमिकों की ही ज्यादातर कतार लगी रहती हैं।
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हालांकि, बैंकों में चेकों से भुगतान में जरूर कतार काफी हद तक कम हुई है। फिर भी हालात यहां भी पूरी तरह सामान्य नहीं है। बुधवार को अमर उजाला टीम ने बैंकों और एटीएम के बाहर हालात का जायजा लिया और कतार में लगे लोगों से बातचीत की।
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शाम को ही अधिकतर बैंकों के एटीएम में डाली जा रही नकदी
शहर के एचडीएफसी बैंक, एक्सिस बैंक, यस बैंक में बैंक बंद होने और शाम छह बजे के बाद एटीएम में नकदी डाली जाती है। हालांकि, भारतीय स्टेट बैंक, इंडसइंड बैंक के एटीएम में दिन में नकदी सुबह या दोपहर में डाली जाती है। ऐसे में नकदी आते ही लोगों की कतार लगने शुरू हो गईं और जबतक कैश खत्म नहीं हुआ तबतक एटीएम के आगे से कतार नहीं हटी।
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छात्रों और श्रमिक वर्ग के कारण एटीएम पर लगी रहती हैं कतारें
ग्रेटर नोएडा में बड़ा एजुकेशन हब होने के कारण यहां करीब सवा लाख के आसपास छात्र हैं। वहीं, शहर में बड़े औद्योगिक समूहों और छोटी-छोटी कंपनियों में भी करीब डेढ़ लाख से अधिक श्रमिक वर्ग रहता है। इनमें से ज्यादातर का बैंक खाता कहीं और होता है और यहां एटीएम से ही पैसे का लेनदेन करते हैं। ऐसे में एटीएम के बाहर छात्रों और श्रमिकों की ही ज्यादातर कतार लगी रहती हैं।
बैंकों में हालात पूरी तरह सामान्य नहीं
एटीएम में लगी कतारों से बचने के लिए शहरवासी बैंकों से जाकर रुपये निकालना ही एकमात्र रास्ता मानते हैं। ऐसे में बैंकों में प्रत्येक समय दस से 12 लोगों की कतार लगी रहती हैं। हालांकि, यह पहले के हालातों से काफी बेहतर है और पैसे भी सप्ताह में 24 हजार मिल जाते हैं लेकिन हालात पूरी तरह सामान्य नहीं हैं।
दिन में बंद रहते हैं ज्यादातर एटीएम
दिन में ज्यादातर एटीएम बंद ही मिलते हैं। जिन एटीएम में नकदी होती है वहां कतार लगी रहती है और जबतक नकदी का पता चलता है तबतक कतार में लगने पर नकदी ही खत्म हो जाती है।
परितोष, छात्र
एटीएम में खत्म हो जाते हैं रुपये
अक्सर शाम को रुपये निकालने के लिए आने पर कतार में लगना पड़ता है। लगभग आधा घंटा लगने के बाद ही नकदी मिल पाती है।
बासु, छात्र
छोटी कतार से नहीं है कोई दिक्कत
बैंकों से नकदी मिल रही है और एटीएम में भी थोड़ी देर में पैसे मिल जाते हैं। अब पहले जैसी दिक्कत नहीं है। राष्ट्र के हित में हुए कार्य में हल्की-फुल्की लाइन से कोई दिक्कत नहीं है।
रजत, कर्मी
दिन में बंद रहते हैं ज्यादातर एटीएम
दिन में ज्यादातर एटीएम बंद ही मिलते हैं। जिन एटीएम में नकदी होती है वहां कतार लगी रहती है और जबतक नकदी का पता चलता है तबतक कतार में लगने पर नकदी ही खत्म हो जाती है।
परितोष, छात्र
एटीएम में खत्म हो जाते हैं रुपये
अक्सर शाम को रुपये निकालने के लिए आने पर कतार में लगना पड़ता है। लगभग आधा घंटा लगने के बाद ही नकदी मिल पाती है।
बासु, छात्र
छोटी कतार से नहीं है कोई दिक्कत
बैंकों से नकदी मिल रही है और एटीएम में भी थोड़ी देर में पैसे मिल जाते हैं। अब पहले जैसी दिक्कत नहीं है। राष्ट्र के हित में हुए कार्य में हल्की-फुल्की लाइन से कोई दिक्कत नहीं है।
रजत, कर्मी