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नोटबंदी से कंस्ट्रक्शन साइटों पर काम करने वाले मजदूरों का जीवन दुश्वार

Sun, 20 Nov 2016 12:48 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, गुड़गांव
ब्यूरो/अमर उजाला, गुड़गांव Updated Sun, 20 Nov 2016 12:48 AM IST
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demonetization affect construction
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साहब हम कैसे गुजारा कर रहे हैं यह हमारा दिल ही जानता है। कड़ी मेहनत के बाद भरपेट भोजन भी नसीब नहीं हो रहा है। जब से नोटबंदी हुई है तब से ठेकेदार भी पूरे पैसे नहीं दे रहा है। जहां पहले रोजाना पैसे मिल जाते थे अब वह दूसरे या तीसरे दिन मिलते हैं।

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वह भी काफी कम।  दवाई खरीदने के लिए भी पैसे नहीं हैं। अगर सरकार मजदूरों के लिए कोई विशेष व्यवस्था करे तो अच्छा है। यह कहना है शहर की कंस्ट्रक्शन साइटों पर काम करने वाले मजदूरों का। जिन्होंने अमर उजाला की टीम के साथ अपना दर्द साझा किया।
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 मजदूरों का कहना है कि जबसे नोटबंदी हुई है तब से कंस्ट्रक्शन का काम ठप हो गया है। इस कारण छोटे-मोटे कंस्ट्रक्शन साइटों पर ही काम करना पड़ रहा है। ऐसे में बड़ी संख्या में मजदूर खाली हो गए हैं। काम नहीं होने के कारण हजारों मजदूर पलायन कर चुके हैं।
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जो बचे हैं वह परेशान हैं।  मजदूर शिव राम का कहना है कि जब ठेकेदार से पैसे मांगा जाता है तो वह कहता है कि ज्यादा जल्दी है तो 1000 व 500 के पुराने नोट ले लो। नहीं तो जैसा चल रहा है चलने दो। कुछ ठेकेदार ऐसे हैं जो श्रमिकों को राशन भी दिला रहे हैं तो कुछ पल्ला झाड़ रहे हैं।

मजदूरों का दर्द
जब से नोटबंदी हुई है तब से काफी समस्या आ रही है। ठेकेदार के पास देने के लिए पैसे नहीं हैं। किसी प्रकार से वह नोट बदलवा कर दूसरे व तीसरे दिन ही पैसा दे पाता है। अब तो दो वक्त की रोटी के भी लाले पड़ गए हैं।-सोना देवी

साहब हम गरीब आदमी हैं। रोज कमाते हैं तो खाते हैं। जिस दिन हाथ-पांव नहीं चलते तो भूखा रहना पड़ता है। अब तो स्थिति ऐसी हो गई है कि काम करने के बाद भी पैसे पाने के लिए दो से तीन दिन तक इंतजार करना पड़ता है।-केदारनाथ

अब तो लगता है कि अपने गांव लौटना पड़ेगा। काम ज्यादा बचा नहीं और जो मिला है उससे अब गुजारा नहीं हो रहा है। यहां तो रोजाना कमाना और खाना है।-बत्रा प्रसाद


यह नोटबंदी क्या है मुझे नहीं पता। मगर लोग बताते हैं कि सरकार ने 500 व 1000 का नोट बंद कर दिया है। हम ठहरे मजदूर आदमी ऐसा क्यों हुआ है इससे कुछ लेना देना नहीं हमें तो बस अपने परिवार के लिए रोटी का जुगाड़ चाहिए। बुखार होने पर दवाई लेने का भी पैसा नहीं है।-शामबाबू

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