नोटबंदी का असर, रसोई गैस की किल्लत से लोग परेशान
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500 व 1000 के नोट बंद होने से रसोई गैस की किल्लत होने लगी है। बृहस्पतिवार को एजेंसियों के बाहर उपभोक्ताओं की लंबी लाइन लगी रही। सूत्रों की मानें तो गैस एजेंसियों का कैश बैंकों में जमा नहीं हो पा रहा है। जिस वजह से प्लांट से गैस सिलेंडर नहीं आ पा रहे हैं।
बता दें फरीदाबाद में करीब 8 लाख गैस उपभोक्ता हैं। यहां प्रतिदिन 20 से 25 हजार गैस सिलेंडर की खपत होती है, लेकिन शॉर्टेज की वजह से 10 से 12 हजार सिलेंडर ही प्लांट से आ रहे हैं। चूंकि यहां 500 के नोट लिए जा रहे हैं, इससे 10 से 15 प्रतिशत गैस की डिमांड और बढ़ गई है।
एजेंसी संचालकों ने विभिन्न बैंकों से मांग की है कि उनका कैश प्राथमिकता से जमा किया जाए। गैस डिस्ट्रीब्यूटर एसोसिएशन के वरिष्ठ पदाधिकारी ने बताया कि प्रत्येक गैस एजेंसियों का एकाउंट किसी न किसी बैंक में है। मौजूदा समय में बैंकों के बाहर लोगों की लंबी कतारें लगी हुई हैं।
गैस एजेंसी के कर्मचारी को पुलिस कर्मी बैंक के अंदर नहीं जाने देते
ऐसी स्थिति में यदि गैस एजेंसी के कर्मचारी कैश जमा करने जाते हैं तो उन्हें पुलिस कर्मी अंदर नहीं जाने देते। लाखों रुपये कैश लेकर उन्हें भी लाइन में लगना पड़ता है। यदि उनके साथ कोई घटना घट जाए तो इसके लिए कौन जिम्मेदार होगा। उन्होंने बताया कि एजेंसियों का कैश जमा न होने पर प्लांट से भी गैस की सप्लाई नहीं हो रही है। वर्तमान में प्रत्येक गैस एजेंसी में सिलेंडर की शॉर्टेज है।
पुराने नोट बंद होने की सूचना पाकर मैंने भी सिलेंडर लेने की योजना बनाई। सुबह से लाइन में लगने के पांच घंटे बाद नंबर आया है। पांच दिन पहले बुकिंग कराई थी।-नरेश गौतम, निवासी-आदर्श नगर
रसोई गैस को लेकर अब परेशानी होने लगी है। यदि जल्द स्थिति को नहीं संभाला गया तो परिवारों को दिक्कत आ सकती है। गैस की किल्लत के चलते यह समस्या सामने आ रही है।-रविंद्र भाटी, निवासी-प्रह्लादपुर डीग