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नोट की चोट, मरने के बाद शव को भी लगना पड़ा बैंक की लाइन में

Wed, 23 Nov 2016 02:32 PM IST
भूपेंद्र कुमार/अमर उजाला, जोया(एनएच 24)
भूपेंद्र कुमार/अमर उजाला, जोया(एनएच 24) Updated Wed, 23 Nov 2016 02:32 PM IST
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demonetisation: dead body in bank queue for money
note - फोटो : लाल स‌िंह, अमर उजाला

नोटबंदी से पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कस्बों और गांवों का हाल जानने के लिए एनएच 24 पर दिल्ली से अमरोहा तक का सोमवार को लगभग 150 किलोमीटर तक का सफर कई कस्बों और शहरों के बीच से गुजरते हुए किया।

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डासना टोल प्लाजा से लेकर अमरोहा तक के इस सफर में खुशनुमा कहानी कोई नहीं थी...बस थीं तो पुराने नोट नहीं चलने और नए नोटों की कमी से पैदा परेशानी। आइये जानें कैसे कैश की कमी ने ग्रामीण जनजीवन को हिला कर रख दिया है।  पेश है भूपेंद्र कुमार की रिपोर्ट...
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नहीं साहब हमारे पास बिल्कुल पैसे नहीं है। जो पुराने नोट हैं वो चल नहीं रहे दाह संस्कार के लिए पैसे लिए बिना हम नहीं जाएंगे। जोया में हाईवे के पास सड़क किनारे ट्रैक्टर में बैठकर आए इन ग्रामीणों के चेहरे पर तनाव और दुख साथ साथ देखा जा सकता था।
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ट्रैक्टर के उनके परिजन का पार्थिव शरीर रखा था और वे हाइवे के किनारे एचडीएफसी बैंक से अपने पैसे निकालना चाहते थे। वहां मौजूद पुलिस कर्मचारी उन्हें समझाबुझा रहे थे पर वे मानने को तैयार नहीं थे।

छोटे गांवों और कस्बों में किसान और छोटे दुकानदारों हुए असहाय

demonetisation: dead body in bank queue for money
note - फोटो : अमर उजाला

यह तो महज एक मिसाल है। छोटे गांवों और कस्बों में किसान और छोटे दुकानदारों को बिल्कुल समझ में नहीं आ रहा है वे नए नोटों की कमी के इस संकट से कैसे निकलेंगे। अमरोहा के कोहिनूर फर्नीचर स्टोर के मालिक मुंतजिर के चेहरे पर चिंता की लकीरें गहरा रही हैं, शादी का सीजन है पर बिक्री नहीं है।

हो भी कैसे लोगों के पास पैसे नहीं हैं। ऐसे में कोई फर्नीचर भला क्यों खरीदेगा। धंधे पर 99 फीसदी असर पड़ा है। मुंतजिर तो मझोले व्यापारी हैं पर प्लास्टिक के तारों से बुनी चारपाई बेचने वाला बबलू तो एकदम हताश है।

पहले रोजाना चार पांच चारपाई बिक जाती थीं। अब कई दिनों से एक भी नहीं बिक रही है। खाली बैठे मक्खी मार रहे हैं, दाल रोटी का खर्च भी नहीं निकल रहा। अमरोहा मंडी में गुड़ बेचने आए भूरा कहते हैं, कोल्हू बंद करने के अलावा कोई चारा नहीं।

यही हाल इलाके की सबसे बड़ी अनाज मंडी हापुड़ का है। पल्लेदार से लेकर किसान और आढ़ती तक सब परेशान हैं। आढ़ती सुधीर कुमार कहते हैं हम कहां से किसानों को पैसे दें, नए नोट बैंकों में भी नहीं हैं।

धान का रेट टूटकर 1900 रुपये रह गया है जबकि इसे 2500 तक होना चाहिए था। किसानों को अगली फसल के लिए पैसा चाहिए। मंडी में आए किसान मनोज सिंह कहते हैं हालत बहुत बुरी है। हमारे पास बीज और खाद तक खरीदने को पैसे नहीं हैं। सरकार को हमारे बारे में कुछ सोचना चाहिए।

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