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Delhi NCR News: अब सीजेपी के प्रदर्शन की एनआईए जांच की मांग, हाईकोर्ट आज करेगा सुनवाई
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अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली।
दिल्ली हाईकोर्ट अखिल भारतीय हिंदू महासभा के पूर्व उपाध्यक्ष सतीश कुमार अग्रवाल द्वारा दायर जनहित याचिका (पीआईएल) की आज सुनवाई करेगा। याचिका में 20 जुलाई को संसद की ओर मार्च के दौरान हुए कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के प्रदर्शन की राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) से जांच कराने की मांग की है। मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस कारिया की खंडपीठ के समक्ष याचिका का उल्लेख किया। याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता वरुण कुमार सिन्हा ने तत्काल सुनवाई की मांग की। अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि यह तथाकथित छात्र आंदोलन पूरे दिल्ली को बंधक बनाकर रखे हैं। सड़कें जाम हैं और आम नागरिकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। अदालत ने याचिका को शुक्रवार को सुनवाई के लिए सहमति दे दी।
याचिका में आरोप लगाया कि 20 जुलाई का प्रदर्शन कोई सच्चा छात्र आंदोलन नहीं था, बल्कि विदेशी तत्वों और एंटी-नेशनल ताकतों द्वारा देश को अस्थिर करने की बड़ी साजिश का हिस्सा था। याचिका में दावा किया गया है कि इस आंदोलन को बाहरी फंडिंग मिली थी और इसमें राजनीतिक दलों का हाथ हो सकता है। इसमें सोनम वांगचुक जैसे कार्यकर्ताओं के विदेशी संगठनों से कथित संबंधों का भी जिक्र किया गया है, जिनकी जांच जरूरी बताई गई है।
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नई दिल्ली।
दिल्ली हाईकोर्ट अखिल भारतीय हिंदू महासभा के पूर्व उपाध्यक्ष सतीश कुमार अग्रवाल द्वारा दायर जनहित याचिका (पीआईएल) की आज सुनवाई करेगा। याचिका में 20 जुलाई को संसद की ओर मार्च के दौरान हुए कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के प्रदर्शन की राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) से जांच कराने की मांग की है। मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस कारिया की खंडपीठ के समक्ष याचिका का उल्लेख किया। याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता वरुण कुमार सिन्हा ने तत्काल सुनवाई की मांग की। अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि यह तथाकथित छात्र आंदोलन पूरे दिल्ली को बंधक बनाकर रखे हैं। सड़कें जाम हैं और आम नागरिकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। अदालत ने याचिका को शुक्रवार को सुनवाई के लिए सहमति दे दी।
याचिका में आरोप लगाया कि 20 जुलाई का प्रदर्शन कोई सच्चा छात्र आंदोलन नहीं था, बल्कि विदेशी तत्वों और एंटी-नेशनल ताकतों द्वारा देश को अस्थिर करने की बड़ी साजिश का हिस्सा था। याचिका में दावा किया गया है कि इस आंदोलन को बाहरी फंडिंग मिली थी और इसमें राजनीतिक दलों का हाथ हो सकता है। इसमें सोनम वांगचुक जैसे कार्यकर्ताओं के विदेशी संगठनों से कथित संबंधों का भी जिक्र किया गया है, जिनकी जांच जरूरी बताई गई है।
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