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Delhi NCR News: मां सरस्वती की इको फ्रेंडली मूर्ति की बढ़ी मांग, जेन-जी को लुभा रहा मां का दिव्य स्वरूप
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-नंगली डेयरी, सरोजिनी नगर, सागरपुर, मॉडल टाउन, इंद्रपुरी, आरके पुरम सहित कई इलाकों में मां सरस्वती की इको फ्रेंडली मूर्तियां तैयार की जा रही
संवाद न्यूज एजेंसी
नई दिल्ली।
ज्ञान, विद्या और कला की देवी मां सरस्वती की पूजा आज वसंत पंचमी पर पूरे श्रद्धा भाव से होगी। पूजा को लेकर बाजारों में खासा उत्साह है। इस बार बाजारों में सरस्वती पूजा में भी इको फ्रेंडली मूर्तियों का चलन तेजी से बढ़ा है और जेन-जी को मां का दिव्य स्वरूप लुभा रहा है। मूर्ति कारीगरों के मुताबिक, इस बार मां सरस्वती की पर्यावरण अनुकूल मूर्तियों की मांग पहले के मुकाबले करीब 50 फीसदी तक बढ़ गई है। नंगली डेयरी, सरोजिनी नगर, सागरपुर, मॉडल टाउन, इंद्रपुरी, आरके पुरम सहित कई इलाकों में मां सरस्वती की इको फ्रेंडली मूर्तियां तैयार की जा रही हैं।
दस मिनट में पानी में घुल जाएगी मूर्ति
इन मूर्तियों को इस तरह तैयार किया है कि विसर्जन के मात्र दस मिनट के भीतर ही ये पानी में पूरी तरह घुल जाती हैं। इससे न तो पानी प्रदूषित होता है और न ही जल में रहने वाले जीव-जंतुओं को कोई नुकसान पहुंचता है। कारीगरों के अनुसार, अब लोग पर्यावरण को लेकर पहले से ज्यादा जागरूक हो गए हैं। तुगलकाबाद में इको फ्रेंडली मूर्तियां बना रहीं मीना बताती हैं किवसंत पंचमी पर मां सरस्वती की पूजा खास तौर पर घरों, स्कूलों और शिक्षण संस्थानों में की जाती है। इसलिए छोटी मूर्तियों की मांग ज्यादा है।
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संवाद न्यूज एजेंसी
नई दिल्ली।
ज्ञान, विद्या और कला की देवी मां सरस्वती की पूजा आज वसंत पंचमी पर पूरे श्रद्धा भाव से होगी। पूजा को लेकर बाजारों में खासा उत्साह है। इस बार बाजारों में सरस्वती पूजा में भी इको फ्रेंडली मूर्तियों का चलन तेजी से बढ़ा है और जेन-जी को मां का दिव्य स्वरूप लुभा रहा है। मूर्ति कारीगरों के मुताबिक, इस बार मां सरस्वती की पर्यावरण अनुकूल मूर्तियों की मांग पहले के मुकाबले करीब 50 फीसदी तक बढ़ गई है। नंगली डेयरी, सरोजिनी नगर, सागरपुर, मॉडल टाउन, इंद्रपुरी, आरके पुरम सहित कई इलाकों में मां सरस्वती की इको फ्रेंडली मूर्तियां तैयार की जा रही हैं।
दस मिनट में पानी में घुल जाएगी मूर्ति
इन मूर्तियों को इस तरह तैयार किया है कि विसर्जन के मात्र दस मिनट के भीतर ही ये पानी में पूरी तरह घुल जाती हैं। इससे न तो पानी प्रदूषित होता है और न ही जल में रहने वाले जीव-जंतुओं को कोई नुकसान पहुंचता है। कारीगरों के अनुसार, अब लोग पर्यावरण को लेकर पहले से ज्यादा जागरूक हो गए हैं। तुगलकाबाद में इको फ्रेंडली मूर्तियां बना रहीं मीना बताती हैं किवसंत पंचमी पर मां सरस्वती की पूजा खास तौर पर घरों, स्कूलों और शिक्षण संस्थानों में की जाती है। इसलिए छोटी मूर्तियों की मांग ज्यादा है।
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