साल बदला पर नहीं बदले हालात: दिल्ली की फिजा में जहर बरकरार, अगले सात दिनों में और गहराएगा सांसों पर संकट
एनसीआर में दिल्ली के बाद नोएडा की हवा सबसे अधिक प्रदूषित रही। यहां एक्यूआई 367 दर्ज किया गया, यह हवा की बेहद खराब श्रेणी है। वहीं, गाजियाबाद में 356, गुरुग्राम में 312 और ग्रेटर नोएडा में 352 एक्यूआई दर्ज किया गया।
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राजधानी में नए साल के अवसर पर भी लोगों को जहरीली फिजा से राहत नहीं मिली। ऐसे में मौसमी दशा खराब होने के चलते हवा बेहद खराब श्रेणी में बरकरार रही। गुरुवार सुबह की शुरुआत धुंध और कोहरे की मोटी परत से हुई। वहीं, पूरे दिन आसमान में स्मॉग की मोटी चादर भी दिखाई दी। इसके चलते कई इलाकों में दृश्यता भी बेहद कम रही। साथ ही, लोगों को आंख में जलन व सांस के मरीजों को परेशानी महसूस हुई। इस दौरान वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 380 दर्ज किया गया। यह हवा की बेहद खराब श्रेणी है। इसमें बुधवार की तुलना में 7 सूचकांक की वृद्धि दर्ज की गई।
एनसीआर में नोएडा सबसे प्रदूषित
दूसरी ओर, एनसीआर में दिल्ली के बाद नोएडा की हवा सबसे अधिक प्रदूषित रही। यहां एक्यूआई 367 दर्ज किया गया, यह हवा की बेहद खराब श्रेणी है। वहीं, गाजियाबाद में 356, गुरुग्राम में 312 और ग्रेटर नोएडा में 352 एक्यूआई दर्ज किया गया। इसके अलावा, फरीदाबाद की हवा सबसे साफ रही। यहां सूचकांक 234 दर्ज किया गया। यह हवा की खराब श्रेणी है। सीपीसीबी के अनुसार, गुरुवार को हवा उत्तर-पूर्व दिशा से 5 किलोमीटर प्रतिघंटे के गति से चली। वहीं, अनुमानित अधिकतम मिश्रण गहराई 1100 मीटर रही। इसके अलावा, वेंटिलेशन इंडेक्स 3000 मीटर प्रति वर्ग सेकंड रहा। दूसरी ओर, दोपहर तीन बजे हवा में पीएम10 की मात्रा 284.6 और पीएम2.5 की मात्रा 179.5 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर दर्ज की गई। इसके अलावा, कई इलाकों में गंभीर और बेहद खराब श्रेणी में हवा दर्ज की गई।
एक सप्ताह राहत नहीं
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) का पूर्वानुमान है कि रविवार तक हवा बेहद खराब श्रेणी में बरकरार रहेगी। इसके चलते सांस के मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ेगा। साथ ही, लोगों को आंखों में जलन, खांसी, और सिर दर्द जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।
इसलिए बिगड़ रही हवा...
पर्यावरण विशेषज्ञों के अनुसार, लगातार बनी हुई गंभीर वायु गुणवत्ता का मुख्य कारण मौसम का मिजाज है। तापमान में कमी के कारण प्रदूषण के स्तर में भारी वृद्धि हुई है और पश्चिमी विक्षोभ के चलते वायु गुणवत्ता जो नीचे फंसी हुई ठंडी हवा को ऊपर उठने नहीं देती है। इसी ठंडी हवा में गाड़ियों का धुआं और निर्माण की धूल जैसे प्रदूषक जमा हो जाते हैं। प्रदूषकों को ऊपर जाने का रास्ता नहीं मिलता, इसलिए वे जमीन के बहुत करीब फंसे रहते हैं। साथ ही, जब बारिश नहीं होती और हवा भी धीरे चलती है, तो यह फंसा हुआ प्रदूषण बाहर नहीं निकल पाता, जिससे स्थिति कई गुना खराब हो जाती है।