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खास खबर : देश में सबसे ज्यादा दिल्ली के बच्चे कर रहे आत्महत्या, देश के 53 शहरों में राजधानी टॉप 3

Mon, 25 Jun 2018 10:25 AM IST
परीक्षित निर्भय, अमर उजाला, नई दिल्ली
परीक्षित निर्भय, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Mon, 25 Jun 2018 10:25 AM IST
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delhi youth number highest in committing suicide in country
दिल्ली के बच्चे कर रहे सबसे ज्यादा सुसाइड - फोटो : अमर उजाला

देश की भावी पीढ़ी को लेकर चौंकाने वाला खुलासा सामने आया है। देश में सबसे ज्यादा दिल्ली के बच्चे और किशोर आत्महत्या कर रहे हैं। भले ही इन घटनाओं के पीछे कारण अलग-अलग हों, लेकिन बच्चों की इन बेवजह मौतों ने सरकारी सिस्टम को भी हिला कर रख दिया है।

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यूं तो आत्महत्या के मामले में चेन्नई और बंगलूरू क्रमश: पहले और दूसरे स्थान पर हैं। लेकिन अगर 18 वर्ष से कम आयु के बच्चों की बात करें तो दिल्ली शीर्ष पर है। हाल ही में सामने आई नेशनल फैमिली प्रोफाइल 2018 की रिपोर्ट में यह स्थिति सामने आई है। इसके अनुसार, दिल्ली में 14 वर्ष से कम और 14 से 18 वर्ष के बीच आयु के बच्चे और किशोर-किशोरियां मानसिक तौर पर कमजोर हैं।
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रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में सालाना करीब सवा लाख से ज्यादा लोग विभिन्न कारणों के चलते आत्महत्या कर रहे हैं। वर्ष 2015 में भारत में 1.33 लाख लोगों ने आत्महत्या की है।
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रिपोर्ट में 53 शहरों की सूची भी जारी हुई है, जिसमें सर्वाधिक आत्महत्या चेन्नई में 2274 दर्ज की हैं। जबकि इसके बाद दूसरे नंबर पर बंगलूरू है, जहां 1855 लोगों ने मौत को गले लगाया। इसके बाद तीसरे नंबर पर राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली है। यहां 1553 आत्महत्याएं दर्ज हुईं।

ये है दिल्ली की स्थिति

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suicide

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की इस रिपोर्ट में बताया है कि दिल्ली में 14 वर्ष तक की आयु की 15 बेटियां और 21 बेटों ने अपनी जीवनलीला समाप्त करने का निर्णय लिया, जबकि 14 से 18 वर्ष के बीच 65 लड़के और 54 लड़कियों ने आत्महत्या की।

ये आंकड़े पूरे देश के सभी मेट्रो व महानगर में सर्वाधिक हैं। जबकि वयस्कों की बात करें तो 18 से 30 वर्ष के बीच आत्महत्या करने वाली महिलाएं 281 और पुरुष 425 हैं।

राज्यवार आत्महत्या की स्थिति
आत्महत्या को लेकर राज्यवार स्थिति देखें तो 16 राज्यों को केंद्र ने चिन्ह्ति किया है। इनमें महाराष्ट्र में सर्वाधिक 16970 लोगों ने आत्महत्या की। इनके अलावा तमिलनाडु (15777), पश्चिम बंगाल (14602), कर्नाटक (10786), मध्यप्रदेश (10293) और तेलंगाना (10140) शीर्ष राज्यों में शामिल हैं। जबकि केरल (7692), गुजरात (7246), छत्तीसगढ़ (7118), आंध्र प्रदेश (6226), यूपी (3902), हरियाणा (3545),  राजस्थान (3457), असम (3231), ओडिशा (4087) और पंजाब में 1049 लोगों ने आत्महत्या की।  

चौंकाने वाली है स्थिति, सतर्कता की जरूरत
क्लीनिकल रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया के संयोजक डॉ. विकास ढिकव बताते हैं कि अभी तक बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य को लेकर सटीक आंकड़ा मौजूद नहीं था, लेकिन केंद्र सरकार की यह रिपोर्ट चौंकाने वाली है। स्कूल और कॉलेज जाने वाली उम्र के बच्चे आत्महत्या के लिए कदम उठा रहे हैं। इसके पीछे पढ़ाई का अतिरिक्त बोझ तो मुख्य वजह है ही। साथ ही अन्य कई कारण ऐसी स्थिति में काम करते हैं। अगर परिवार चाहे तो सतर्कता रख अपने बच्चों को बचा सकते हैं। उन्हें फिजूल के तनाव से दूर रख सकता है। 

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