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Delhi: यमुना बायोडायवर्सिटी पार्क में मनाया विश्व आर्द्रभूमि दिवस, बड़ी संख्या में पहुंचे प्रकृति प्रेमी

Sat, 03 Feb 2024 06:48 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Sat, 03 Feb 2024 06:48 AM IST
सार

इस वर्ष की थीम आर्द्रभूमि और मानव कल्याण थी। इसमें आर्द्रभूमि संरक्षण को प्राथमिकता देने की आवश्यकता पर जोर दिया गया। 

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Delhi: World Wetlands Day celebrated in Yamuna Biodiversity Park
yamuna biodiversity park - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) के यमुना बायोडायवर्सिटी पार्क में विश्व आर्द्रभूमि दिवस मनाया गया। इस वर्ष की थीम आर्द्रभूमि और मानव कल्याण थी। इसमें आर्द्रभूमि संरक्षण को प्राथमिकता देने की आवश्यकता पर जोर दिया गया। 

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डीडीए के वित्त सदस्य विजय कुमार सिंह कार्यक्रम में मुख्य अतिथि रहे। कार्यक्रम में शोधार्थियों, शिक्षाविदों, प्रकृति प्रेमियों के साथ दिल्ली विश्वविद्यालय के विभिन्न कॉलेजों और अन्य शैक्षणिक संस्थानों के 500 से अधिक छात्रों ने भाग लिया। कार्यक्रम के दौरान विश्व भर के विभिन्न क्षेत्रों से उत्तरी शॉवेलर, उत्तरी पिनटेल्स, ग्रेट कॉर्मोरेंट्स, गडवाल, टील्स जैसे कई प्रवासी पक्षियों की उपस्थिति के कारण पार्क की आर्द्रभूमि मुख्य आकर्षण का केंद्र रही। 
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दिल्ली बायोडायवर्सिटी प्रोग्राम के इंचार्ज साइंटिस्ट डॉ. फैयाज ए खुदसर ने रामसर कन्वेंशन के उपलक्ष्य में विश्व आर्द्रभूमि दिवस और यमुना जैव विविधता पार्क में बहाल आर्द्रभूमि के महत्व को बताया। उन्होंने भू-जल पुनर्भरण, कार्बन डाइऑक्साइड को सोखने और पर्यावरणीय गुणवत्ता में सुधार लाने में यमुना जैव विविधता पार्क की भूमिका के बारे में समझाया। उन्होंने आर्द्रभूमि द्वारा प्रदान की जाने वाली सेवाओं के बारे में बताया और भारतीय अर्थव्यवस्था की तुलना की, जिसे 2024-25 तक पांच ट्रिलियन डॉलर का लक्ष्य दिया गया है, जबकि अकेले आर्द्रभूमि का आर्थिक मूल्य लगभग 47 ट्रिलियन डॉलर प्रति वर्ष है।
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इस दौरान प्रो. सीआर बाबू ने आर्द्रभूमि की संभावनाओं को पहचानने और उनके संरक्षण के लिए प्रभावी नीतियां बनाने में न्यायपालिका और नीति निर्माताओं की भूमिका के बारे में बताया। उन्होंने छात्रों से आर्द्रभूमि के संरक्षण और कायाकल्प में सक्रिय रूप से भाग लेने की भी अपील की।


इस अवसर पर डीयू के पर्यावरण अध्ययन विभाग के प्रो. आरएस शर्मा, भूविज्ञान विभाग के प्रो. शशांक शेखर, डीयू के पूर्व कुलपति और इंद्र प्रियदर्शनी वृक्ष मित्र पुरस्कार के प्राप्तकर्ता प्रो. पीसी जोशी के साथ यमुना संसद के संयोजक रविशंकर तिवारी शामिल हुए।

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