{"_id":"5c16d5f1bdec2253df005c30","slug":"delhi-womens-commission-writes-letter-to-pm","type":"story","status":"publish","title_hn":"दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष ने पीएम को लिखा पत्र, हर राज्य में उच्च स्तरीय समिति बनाने की मांग","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष ने पीएम को लिखा पत्र, हर राज्य में उच्च स्तरीय समिति बनाने की मांग
Mon, 17 Dec 2018 04:17 AM IST
vivek shukla
ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: vivek shukla
Updated Mon, 17 Dec 2018 04:17 AM IST
विज्ञापन
स्वाति मालीवाल
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष स्वाति मालीवाल ने निर्भया कांड की छठी बरसी पर देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर महिलाओं की सुरक्षा को लेकर तुरंत कदम उठाने की मांग की है। उन्होंने मांग की है कि हर राज्य में एक उच्च स्तरीय समिति बनाए। इसमें राज्य के मुख्यमंत्री, हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस, पुलिस आयुक्त और महिला आयोग शामिल हो, ताकि दुष्कर्म के दोषी को फांसी के कानून को क्रियान्वित करने के लिए पुलिस और फास्ट ट्रैक कोर्ट को मजबूत किया जा सके।
विज्ञापन
अध्यक्ष स्वाति मालीवाल ने पत्र में कहा है कि 16 दिसंबर, 2012 की दर्दनाक घटना हमारे देश में इतिहास के पन्नों पर लगी वो कालिख है, जिसे मिटा पाना असंभव है। निर्भया कांड के छह वर्ष बीत जाने के बावजूद महिला सुरक्षा की स्थिति देश में लगभग वैसी ही बनी हुई है। आज तक निर्भया को न्याय नहीं मिला और देश के हजारों लाखों निर्भया आज भी न्याय की आस में तड़प रही हैं।
विज्ञापन
कानून व्यवस्था ने अपराधियों के हौसले बुलंद कर रखे हैं। देश की राजधानी में प्रतिदिन करीब छह से अधिक दुष्कर्म की घटनाएं सामने आ रही हैं। फरवरी, 2018 में एक आठ माह की दुधमुंही बच्ची के साथ हुई दुष्कर्म की घटना ने उन्हें झकझोर दिया है। नन्हीं निर्भया को न्याय दिलाने के लिए वह अनशन पर बैठी। अनशन के दसवें दिन कुछ मांगे मान ली गईं, जबकि कुछ मांगों को पूरा करने का वादा किया गया था। मगर मामले में भी अभी तक कुछ नहीं हुआ।
विज्ञापन
आज कानून बनने के सात महीने बाद एक भी दुष्कर्म के आरोपी को फांसी की सजा दिल्ली में नहीं दी गई है। यहां तक की उस आठ माह की बच्ची को भी इंसाफ नहीं मिला और छह वर्ष पहले हुई निर्भया के दोषियों को अभी तक सजा नहीं मिली। उन्होंने अपने पत्र के माध्यम से प्रधानमंत्री से पूछा है कि दिल्ली में 66000 पुलिसकर्मियों की नई भर्ती को क्यों अनसुना किया जा रहा है।
आजाद भारत में ये शर्म की बात है कि देश के प्रधानमंत्री महिला सुरक्षा को लेकर तब सक्रिय हुए जब महिला आयोग की अध्यक्ष अनशन पर बैठी थी। यहां तक निर्भया की याद में निर्भया फंड तक केंद्र सरकार इस्तेमाल नहीं कर पाई है। उन्होंने प्रधानमंत्री से आग्रह किया है कि महिला सुरक्षा इस देश का एक बड़ा ज्वलंत मुद्दा है। महिला सुरक्षा के प्रति संवेदनशीलता दिखाएं।