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दिल्ली हिंसाः मेडिकल स्टोर का बोर्ड बदलकर लुटने से बचाईं कई दुकानें
Sat, 29 Feb 2020 06:11 AM IST
संजीव कुमार झा
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
Published by: संजीव कुमार झा
Updated Sat, 29 Feb 2020 06:11 AM IST
सार
- अमर मेडिकोज की जगह स्थानीय लोगों ने लगाया एसके खान स्टोर का बोर्ड
- इसी तरह बनवारी लाल के मेडिकल स्टोर की भी पड़ोसियों ने रक्षा की
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दुकान पर बदले नाम वाला बोर्ड
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
बृजपुरी मेन रोड पर मंगलवार को जब हिंसा हुई, तो उस समय उपद्रवियों ने अलग-अलग समुदाय की दुकानों और मकानों की पहचान कर उनको निशाना बनाना शुरू कर दिया, लेकिन इन सबके बीच कुछ लोगों ने सूझबूझ दिखाकर उपद्रवियों से उनकी दुकान लुटने व आगजनी से बचा ली।
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स्थानीय लोगों ने कुछ दुकानों की पहचान कराने वाले बोर्ड को आनन-फानन में बदलकर वहां दूसरे बोर्ड लगा दिए। ऐसे में अपने समुदाय की दुकान समझकर उपद्रवियों ने इनको नुकसान नहीं पहुंचाया। वहीं कुछ इलाकों में रहने वाले दूसरे समुदाय के लोगों की भी स्थानीय निवासियों ने जान पर खेलकर रक्षा की।
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भागीरथी विहार की गली नंबर-8 के कोने पर मौजूद अमर मेडिकोज सतीश नामक शख्स की है। पिछले 15-16 साल से वह यहां अपना मेडिकल स्टोर चला रहे हैं। मंगलवार को हिंसा हुई तो सतीश अपना मेडिकल स्टोर बंद कर चले गए। पड़ोसी मो. परवेज और मो. शाहिद ने देखा कि उपद्रवी सतीश के मेडिकल स्टोर को निशाना बना सकते हैं।
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उन्होंने तुरंत सूझबूझ का परिचय देकर सामने से एक किराना की दुकान का बोर्ड उठाया। उस पर एसके खान स्टोर लिखा हुआ था। उसे सतीश के मेडिकल स्टोर के ऊपर लगा दिया। बोर्ड देखकर उपद्रवियों ने उसे अपने समुदाय की दुकान समझकर छोड़ दिया। इसी तरह बनवारी लाल के मेडिकल स्टोर की भी पड़ोसियों ने रक्षा की।
नूर आलम बताते हैं कि मेन रोड पर कई मकानों के बाहर खड़े होकर उन्होंने उपद्रवियों को खदेड़ा था। इसी तरह भागीरथी विहार में रहने वाले त्रिलोकी नाथ, गीता देवी, हीरा लाल, हीरा देवी, विमला देवी, सावित्री और न जाने कितने परिवारों को इन लोगों ने अपनी जान पर खेलकर बचाया। यह सभी परिवार भी अपने मोहल्ले के रहने वाले भाइयों के शुक्रगुजार हैं।