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दिल्ली हिंसा मामले में गिरफ्तार उमर खालिद 22 अक्तूबर तक जेल में ही रहेंगे

Thu, 24 Sep 2020 01:34 PM IST
पूजा त्रिपाठी अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Published by: पूजा त्रिपाठी Updated Thu, 24 Sep 2020 01:34 PM IST
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Delhi violence Delhi Court sends former JNU student Umar Khalid to judicial custody till 22nd October
उमर खालिद

उत्तर पूर्वी दिल्ली हिंसा की साजिश रचने और दंगा भड़काने के आरोप में गिरफ्तार जेएनयू के पूर्व छात्रसंघ नेता उमर खालिद को अदालत ने 22 अक्तूबर तक के लिए न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। दिल्ली हिंसा मामले की जांच कर रही दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने उमर पर कई धाराओं के साथ ही यूएपीए के तहत भी मामला दर्ज किया है। 

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पुलिस हिरासत की अवधि पूरी होने के बाद खालिद को वीडियो कांफ्रेंस के जरिए अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अमिताभ रावत के समक्ष पेश किया गया था। खालिद को 13 सितंबर को गिरफ्तार किया गया था। पुलिस ने उनकी और हिरासत नहीं मांगी।
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पुलिस ने प्राथमिकी में दावा किया है कि सांप्रदायिक हिंसा 'पूर्व-नियोजित साजिश' थी, जिसे कथित रूप से खालिद और दो अन्य लोगों ने अंजाम दिया था। खालिद के खिलाफ राजद्रोह, हत्या, हत्या का प्रयास, धर्म के आधार पर विभिन्न समुदायों के बीच द्वेष पैदा करने और दंगा भड़काने के आरोपों के तहत मामला दर्ज किया गया है।
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प्राथमिकी में आरोप लगाया गया है कि खालिद ने कथित रूप से दो अलग-अलग जगहों पर भड़काऊ भाषण दिये और लोगों से अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की यात्रा के दौरान सड़कों पर उतरने और उन्हें जाम करने की अपील की ताकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर यह दुष्प्रचार किया जा सके कि भारत में अल्पसंख्यकों पर अत्याचार किया जा रहा है।

प्राथमिकी के अनुसार इस षड़यंत्र को अंजाम तक पहुंचाने के लिए कई घरों में हथियार, पेट्रोल बम, तेजाब की बोतलें और पत्थर जमा किए गए। पुलिस का आरोप है कि सह-आरोपी दानिश को कथित रूप से दो अलग-अलग जगहों पर लोगों को जमा करने और दंगा भड़काने की जिम्मेदारी दी गई थी।

प्राथमिकी में कहा गया है कि 23 फरवरी को महिलाओं और बच्चों को जाफराबाद मेट्रो स्टेशन के नीचे सड़क बंद करने के लिए कहा गया, ताकि आसपास रह रहे लोगों के बीच तनाव उत्पन्न किया जा सके।


उत्तर-पूर्वी दिल्ली में 24 फरवरी को नागरिकता कानून के समर्थकों और विरोधियों के बीच हिंसा भड़कने के बाद सांप्रदायिक झड़पें शुरू हो गई थीं। इस दौरान कम से कम 53 लोगों की मौत हो गई थी और लगभग 200 लोग घायल हो गए थे।

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