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दिल्ली हिंसाः दुनिया में लोग अनेक, लेकिन सबकी दुनिया एक, जले घर में मिली बच्ची की नोटबुक
Tue, 03 Mar 2020 12:45 AM IST
Vikas Kumar
अभिषेक पाण्डेय, अमर उजाला, नई दिल्ली
अभिषेक पाण्डेय, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Vikas Kumar
Updated Tue, 03 Mar 2020 12:45 AM IST
सार
-शिव विहार में जले एक घर से मिली बच्ची की नोटबुक
-पूरा परिवार घर से जान बचाकर भाग गया
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कागज पर लिखी मिली मासूम की कविता
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
धरती है हम सबकी एक, आसमान हम सबका एक, सूरज है हम सबका एक, चंदा है हम सबका एक, पानी है हम सबका एक, पवन है हम सबकी एक, दुनिया में लोग अनेक, लेकिन सबकी दुनिया एक। यह छोटी सी एक कविता हर उस शख्स को झकझोर देगी, जिसने दंगे का दंश झेला।
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शिव विहार की गली नंबर-दो में छह साल की बच्ची आलिया ने हिंसा में अपने अब्बू की दुकान जलती देख कविता के रूप में दर्द को कागजों पर पिरो दिया। आलिया के इस संदेश को दंगों की आग भी नहीं झुलसा सकी। आलिया के परिवार का दंगे में सब कुछ जल गया, लेकिन नोटबुक पर लिखी उसकी यह कविता एकता का संदेश दे गई।
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शिव विहार को दंगाइयों ने सबसे ज्यादा निशाना बनाया। अकरम की छह साल की बेटी आलिया भी खिड़की से पूरे नजारे को देख रही थी। उसने इस हिंसा को देखने के बाद घरवालों से पूछा कि यह लोग क्यों लड़ रहे हैं, घरवालों ने जवाब दिया बेटा खिड़की बंद कर लो हमें यहां से भागना है।
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आलिया ने यह सुनते ही झट से अपनी स्कूल की नोटबुक निकाल ली और उस पर इंसानों को आपस में लड़ते हुए की घटना को एक कविता में कह दिया। अपने परिवार के साथ जान बचाकर जाते वक्त आलिया ने नोटबुक को अलमारी में छिपा दिया। घर छोड़ने के कुछ देर बाद ही दंगाइयों ने आलिया का घर आग के हवाले कर दिया।
शिव विहार का पूरा इलाका आग के हवाले होने के पांच दिन बाद रविवार को सफाई के दौरान यह नोटबुक बरामद हुई, जिसमें आलिया का दर्द भरा कागज मिल गया। आलिया का परिवार अपने मूल निवास मुजफ्फरनगर चला गया है, लेकिन बच्ची ने पूरे समाज को धर्म से ऊपर सोचने का संदेश दे दिया।