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दिल्ली: कोरोना महामारी में नौकरी छूट जाने पर वेदांग आईएएस अकादमी का शिक्षक बेचने लगा फर्जी डिग्री

Fri, 29 Apr 2022 12:10 PM IST
विक्रांत चतुर्वेदी अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली Published by: विक्रांत चतुर्वेदी Updated Fri, 29 Apr 2022 12:10 PM IST
सार

रोहिणी साइबर सेल ने शिक्षक को शकरपुर से किया गिरफ्तार, फेसबुक पर विज्ञापन देकर लोगों को शिकार बनाता था। देश भर में फैले हुए हैं गिरोह के सदस्य, आरोपियों ने अब तक विश्वविद्यालय और स्कूल बोर्ड के एक हजार जाली प्रमाण पत्र और मार्कशीट बनाकर बेच चुके हैं।

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Delhi: Vedang IAS Academy teacher started selling fake degrees after he lost his job due to Corona epidemic
फर्जी डिग्री (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

कोरोना महामारी के दौरान नौकरी चले जाने के बाद वेदांग आईएएस अकादमी में पढ़ाने वाला शिक्षक फर्जी डिग्री बनाकर बेचने लगा। गिरोह के अन्य सदस्यों के साथ मिलकर आरोपी देशभर के कई विश्वविद्यालय और स्कूल बोर्ड के करीब एक हजार जाली प्रमाण पत्र और मार्कशीट बनाकर उसे बेच दिया। इसके लिए गिरोह फर्जी फेसबुक खाता बनाकर उसपर विज्ञापन देता था। रोहिणी साइबर सेल ने एक शिकायत पर जांच करते हुए आरोपी को शकरपुर से गिरफ्तार कर लिया। पुलिस आरोपी के कब्जे से लैपटॉप, सीपीयू, वाईफाई डोंगल, पांच मोबाइल फोन, पांच सिम कार्ड, एटीएम कार्ड और 65 नकली मार्कशीट बरामद किया है।

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जिला पुलिस उपायुक्त प्रणव तायल ने बताया कि गिरफ्तार आरोपी की पहचान शकरपुर निवासी जितेंद्र कुमार साहू के रूप में हुई है। वह मूलत: उड़ीसा का रहने वाला है। आजीविका कमाने के लिए दिल्ली आया और कोचिंग सेंटर में पढ़ाने लगा। 15 अप्रैल को रोहिणी साइबर सेल में दीपक कुमार ने साइबर धोखाधड़ी की शिकायत की। जिसमें उसने बताया कि यमुना आईएएस संस्थान के विभिन्न पाठ्यक्रमों में प्रवेश के संबंध में एक ऑनलाइन विज्ञापन देखा था। वह विज्ञापन में दिए गए पते पर गया जहां उसकी कुछ लोगों से मुलाकात हुई। आरोपी व्यक्ति ने उसे आश्वासन दिया कि वह उसे बेचलर ऑफ होम्योपैथिक मेडिसिन एंड सर्जरी (बीएचएमएस) पाठ्यक्रम में प्रवेश दिलाएगा। आरोपियों ने उससे दाखिले के एवज में साढ़े तीन लाख रुपये मांगे।
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शिकायतकर्ता ने उनके खाते में ढ़ाई लाख रुपये ट्रांसफर कर दिए। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि छह माह बीत जाने के बाद दाखिला नहीं होने पर उसने आरोपी व्यक्ति से संपर्क किया। उनका फोन बंद मिला। कार्यालय जाने पर वहां ताला लगा था। शिकायत पर पुलिस ने मामला दर्ज कर निरीक्षक अजय दलाल के नेतृत्व में जांच शुरू की। जांच के दौरान पुलिस ने आरोपियों के फोन नंबर और खाता संख्या का ब्योरा मांगकर उसका विश्लेषण किया। पुलिस ने आरोपी के कोटक महिंद्रा बैंक के खाते को फ्रीज कर दिया। जिसमें नौ हजार रुपये जमा थे। तकनीकी जांच के बाद पुलिस आरोपियों की पहचान की। इसके बाद संभावित ठिकानों पर रेकी करने के बाद जितेंद्र को शकरपुर से गिरफ्तार कर लिया।
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आरोपी वेदांग आईएएस अकादमी में गणित पढ़ाता था
पूछताछ के दौरान जितेंद्र ने बताया कि वह वेदांग आईएएस अकादमी में गणित और तर्क विषय पढ़ाता था। कोरोना की वजह से उनकी नौकरी चली गई। इसके बाद वह स्कूल और कॉलेजो में छात्रों का नामांकन करवाने लगा। वह अखबारों और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अपनी एजेंसी का विज्ञापन देकर लोगों की तलाश करता था। अधिक पैसा कमाने की चाह में वह ऐसे लोगों के संपर्क में आया जो नकली मार्कशीट बनाने के धंधे से जुड़े थे। इनके जरिए वह अलग-अलग विश्वविद्यालय के लिंक बनाए और फर्जी मार्कशीट तैयार करने लगा। उसने बताया कि धंधे से जुड़े सभी आरोपी व्हाट्सएप के जरिए बातचीत करते थे और एक दूसरे की पहचान या पते का खुलासा नहीं करते थे।

पूरे देश में सक्रिय है गिरोह
जांच में पता चला कि गिरोह पूरे देश में सक्रिय है और स्कूल, कॉलेज और विश्वविद्यालय स्तर पर विभिन्न पाठ्यक्रमों की फर्जी डिग्री और प्रमाण पत्र प्रदान करता है। शुरूआती जांच में यह बात सामने आई है कि गिरोह कई सरकारी और निजी विश्वविद्यालयों और स्कूल बोर्डों की करीब एक हजार फर्जी डिग्री जारी कर चुका है।  गिरोह प्रसिद्ध भारतीय विश्वविद्यालयों के डिग्री प्रमाण पत्र प्रदान करने के बहाने छात्रों से ठगी कर रहे थे। इसके लिए गिरोह के सदस्य छात्रों से मोटी रकम के साथ साथ पहचान पत्र भी जमा करवाता था। गिरोह के निशाने पर ऐसे छात्र होते थे, जो विदेश में पढ़ना चाहते थे। आरोपी छात्रों को लुभाने के लिए हरियाणा ओपन बोर्ड, मेरठ के चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय, हिमाचल का अरनी विश्वविद्यालय, बिहार बोर्ड, राजस्थान का ओपीजेएस-ओम प्रकाश जोगेंद्र सिंह विश्वविद्यालय, और आईईएस- इंडियन एजुकेशन सेंटर और अन्य कई बोर्ड के नामों का इस्तेमाल करते थे। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले की जांच की जा रही है और अन्य आरोपियों की तलाश में दबिश दी जा रही है।


विश्वविद्यालय की वेबसाइटों को हैक कर डेटा में लगाते थे सेंध
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि आरोपी विश्वविद्यालयों व बोर्डों की वेबसाइटों को हैक करके डेटा चार्ट में सेंध लगाते थे। उनके ग्राहकों के नाम और पते अपलोड करने के लिए चार्ट को संपादित करते थे। फिर फर्जी होलोग्राम और स्टांप के जरिए हाईटेक प्रिंटर और स्कैनर का इस्तेमाल कर फर्जी डिग्री और सर्टिफिकेट तैयार करते थे। ग्राहकों को उनके पते पर डाक के माध्यम से डिग्री प्रमाण पत्र प्रदान किए जाते थे। आरोपी विश्वविद्यालय की वेबसाइटों के फर्जी डोमेन बनाकर डिग्री डाउनलोड करने के लिए लिंक भी प्रदान करते थे।

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