आंधी में क्यों गिरते हैं दिल्ली के पेड़, इस रिपोर्ट में हुआ बड़ा खुलासा
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एनडीएमसी एरिया की हरियाली खतरे में है। इस एरिया में लगे बहुत से पेड़ बीमार हैं या वे कमजोर हो चुके हैं। इससे हल्की हवा चलने पर भी पेड़ को गिरने का खतरा बना हुआ है। देहरादून फॉरेस्ट रिसर्च इंस्टिट्यूट ने पुष्टि की है कि इस एरिया के 887 पेड़ों को खतरा है।
एनडीएमसी इन पेड़ों को बचाने के लिए खास कदम नहीं उठा रहा है। रविवार को आई आधी के कारण यहां के 138 पेड़ जड़ से उखड़ गए या उनकी टहनियां पूरी तरह से टूट गईं।
देहरादून फॉरेस्ट रिसर्च इंस्टिट्यूट ने एनडीएमसी एरिया 6288 पेड़ों की जांच की थी। रिपोर्ट में बताया गया कि इन पेड़ों में 5507 पेड़ ठीक हैं। जबकि 887 पेड़ ऐसे हैं जिनका स्वास्थ्य अलग-अलग कारणों से बेहद खराब है और वे कभी भी गिर सकते हैं।
इन पेड़ों में से 435 पेड़ों की जड़ों में दीमक लग चुके थे इसलिए वे जड़ से सूख गए हैं। इसके अलावा 86 पेड़ खोखले हो चुके हैं और उनकी हालत ठीक नहीं है। ये पेड़ हल्के हवा से भी गिर सकते हैं। जबकि 221 पेड़ अलग-अलग कारणों से बीमार हैं। 145 पेड़ फिजिकल इंजरी के कारण बीमार हैं।
बताया जा रहा है कि कुछ सालों से एनडीएमसी एरिया में जो पेड़ गिरे हैं, उनके स्थान पर नए पेड़ कम ही लगाए गए हैं। एनडीएमसी अफसरों के मुताबिक, मानसून के दौरान उन पेड़ों की जगह 5-10 सेंटीमीटर लंबे पेड़ तो अधिक से अधिक लगाए गए हैं। लेकिन पुराने टूटे पेड़ को बहुत कम ट्रांसप्लांट किया गया है।
हॉर्टिकल्चर विभाग के एक अफसर ने कहा कि बहुत से पेड़ को खाद-पानी देकर बचाने की पूरी कोशिश की जा रही है। पीपल और बरगद के पेड़ का ट्रांसप्लांट हो सकता है इसलिए इनका कई जगह पर ट्रांसप्लांट भी किया गया है।
एनडीएमसी अफसरों ने इन पौधों के बीमार होने पर कहा कि एरिया में पेड़ों को पानी नहीं मिलता है। मानसून के दौरान में होने वाली बारिश का पानी सीधे नाले में जाता है। इससे पौधों की जड़ों में पर्याप्त मात्रा में पानी नहीं जाता, जिससे पेड़ों की जड़ों में दीमक लग जाते हैं और जड़े कमजोर हो जाती है।