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Delhi : राजधानी में हिंदू शरणर्थियों की त्रासदी...पहले पाकिस्तान से उजड़े, अब दिल्ली में भी छिनेगा आशियाना

Thu, 07 Mar 2024 05:51 AM IST
दुष्यंत शर्मा आशीष सिंह, नई दिल्ली
आशीष सिंह, नई दिल्ली Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Thu, 07 Mar 2024 05:51 AM IST
सार

मजनू का टीला स्थित हिंदू शरणार्थी कैंप को हटाने को लेकर इलाके में हो रहे शोर से दूर हटते हुए वे आपबीती बताते हुए रोने लगीं। 

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Delhi: The tragedy of Hindu refugees in the capital
फिर विस्थापन की दहलीज पर... - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हम यहां बहुत खुश हैं, किसी तरह की परेशानी नहीं है। तुम कब भारत आ रहे हो। हिंदू शरणार्थी लक्ष्मी पाकिस्तान में रह रही नंद से वीडियो कॉल पर ये कहते हुए मायूस हो गईं।’ मजनू का टीला स्थित हिंदू शरणार्थी कैंप को हटाने को लेकर इलाके में हो रहे शोर से दूर हटते हुए वे आपबीती बताते हुए रोने लगीं। 

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सिंध प्रांत में रह रही नंद ने कहा कि भारत में सब कुछ ठीक तो है न। इस पर लक्ष्मी ने कहा कि मंगलवार शाम को कुछ सरकारी अधिकारी आए थे। उन्होंने यहां से हटने के लिए कहा है। यहां सुख से रहने के लिए आए थे। पहले पाकिस्तान से उजड़े अब दिल्ली में आशियाना छिन रहा है। 
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लक्ष्मी ने बताया कि परिवार वर्ष 2020 में भारत आया था। कई रिश्तेदार अब भी पाकिस्तान में हैं, जो भारत आना चाहते हैं। परिवार के साथ यहां से कहीं नहीं जाऊंगी। अच्छी जिंदगी के लिए यहां आए हैं। ऐसे में दोबारा वहां जाना किसी नरक से कम नहीं है। यहां मजदूरी करते हैं, तब घर में एक वक्त का चूल्हा जलता है। सरकार से अपील है कि उन्हें यहां से कहीं न भेजें। भारत सरकार पर भरोसा है।
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विस्थापित हो या परीक्षा दें, भविष्य का खतरा
कई छात्रों की 10वीं-12वीं की परीक्षाएं चल रही हैं। परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है। यही आखिरी ठिकाना था। अब यहां से हटाया जा रहा है। ऐसे में परीक्षा की तैयारी करें या विस्थापित हों।

-पवन कुमार, 12वीं, छात्र 

घर टूट जाएगा, तो सपने बिखर जाएंगे। अचानक से नोटिस आया है, अब समझ नहीं आ रहा है कि कहां जाएं।
- मुकेश कुमार, छात्र 9वीं

यहां से हटाए जाते हैं, तो पढ़ाई में बाधा आएगी। नोटिस के आने के बाद भविष्य अंधकारमय दिख रहा है। सीयूईटी की तैयारी कर रहा हूं। 
-चंद्र सोलंकी, छात्र

दोपहर तक बुलडोजर के डर से दुकानें रहीं बंद
डीडीए की कार्रवाई के डर से लोगों ने दोपहर तक दुकानें व रेहड़ी बंद रखीं। इसके बाद कुछ दुकानें शाम को खोल दी गईं। इनमें लोग रोजमर्रा का सामान खरीदते दिखे। दुकान पर सामान खरीदने पहुंची पूजा ने बताया कि कब यहां से हटना पड़़े, किसी को नहीं पता। ऐसे में खाने का सामान रहेगा तो रात कट जाएगी। यह दिन देखना पड़ेगा, कभी सपने में भी नहीं सोचा था।

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