दिल्ली को लाहौर से सीखना चाहिए डेंगू को नियंत्रित करने का तरीका
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डेंगू की महामारी से निपटने के लिए पाकिस्तान के सबसे बड़े प्रांत पंजाब की राजधानी लाहौर शहर ने एक नया तरीक़ा ईजाद किया है।
चार साल पहले लाहौर में डेंगू से क़रीब 350 लोगों को मौत हो गई थी और हज़ारों प्रभावित हुए थे।
इस महामारी से भारत भी परेशान है और इस साल दस अक्टूबर तक राजधानी दिल्ली में डेंगू के मरीज़ों की संख्या 10,000 पार कर चुकी है और मरने वालों की संख्या 30 तक पहुंच गई है।
दिल्ली में डेंगू एक मौसमी महामारी बन चुका है और प्रशासन को हर साल इस समस्या से जूझना पड़ता है। लेकिन, पाकिस्तान में डेंगू के ख़िलाफ़ लड़ाई मोबाइल फ़ोन्स के ज़रिये लड़ी जा रही है और पिछले चार सालों के आंकड़े बताते हैं कि टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल से इसमें एक बड़ी क़ामयाबी हासिल हुई है।
मोबाइल ऐप रखेगा नजर
इसकी वजह मोबाइल फ़ोन का वो एप्लिकेशन है, जिसके जरिए डेंगू प्रोग्राम की निगरानी की जाती है। इस एप्लिकेशन के ज़रिए इकट्ठे किए गए आंकड़ों का विश्लेषण करके अर्ली वॉर्निंग सिस्टम को भी लागू किया जा रहा है।
डेंगू ट्रैकिंग नामक इस मोबाइल एप्लिकेशन को बनाने वाले पंजाब इन्फ़ार्मेशन टेक्नोलॉजी के चेयरमैन डॉ उमर सैफ कहते हैं कि डेंगू के बारे में चेतावनी ही इस एप्लीकेशन का अहम फ़ीचर है।
उनके मुताबिक़, “आंकड़ों का विश्लेषण कर हम बता सकते हैं कि ये बीमारी अब महामारी का रूप लेने वाली है। इस तरह के डाटा से इस तरह का अनुमान लगाना एक अहम बात है।”
पिछले तीन साल से हो रहा प्रयास
पंजाब टेक्नोलॉजी बोर्ड की मदीहा ख़ान ने बताया, “डेंगू प्रोग्राम में शामिल चार हज़ार कर्मचारियों को इस एप्लिकेशन के साथ काम करने वाले मोबाइल फ़ोन दिए गए हैं।
ये लोग डेंगू पर नियंत्रण के लिए जो भी काम करते हैं वो उसकी जानकारी और तस्वीरें इस पर डाल देते हैं। इस तरह से एक रीयल टाइम डेटा केंद्रीय ऑफ़िस और उससे जुड़े सारे अफ़सरों तक पहुंच जाती है।”
मदीहा ख़ान का कहना है कि इस एप्लिकेशन का मुख्य मक़सद डेंगू प्रोग्राम में काम करने वाले लोगों पर नज़र रखना है लेकिन इससे मिलने वाली जानकारियों के विश्लेषण से रणनीति बनाने में काफी मदद मिलती है।
डॉ सैफ़ के मुताबिक़, पिछले तीन सालों के दौरान डेंगू के ख़ात्मे के लिए जो भी काम किया गया है उसकी बुनियाद इन आंकड़ों पर भी निर्भर रही है।
जल्द ही तेजी से कम होगी बीमारी
वो बताते हैं, “प्रशासनिक मामलों की जब हर सुबह बैठक होती है तो इन्हीं आंकड़ों पर लक्ष्य निर्धारित किए जाते हैं और इन्हीं के आधार पर ये तय किया जाता है कि निगरानी के जो काम हो रहे हैं वो नाकाफ़ी तो नहीं हैं। इसी से यह पता लगता है कि कौन सा डिपार्टमेंट कितना सक्रिय है।”
इस वक़्त इस बीमारी से निबटने के लिए निगरानी का काम रावलपिंडी शहर में केंद्रित है। यहां अस्पतालों में डेंगू के मरीज़ों की संख्या 2000 है और रोज़ ही इनकी तादाद बढ़ रही है।
हालांकि डेंगू प्रोग्राम से जुड़े अधिकारियों का दावा है कि इस मोबाइल एप्लिकेशन में आने वाले आंकड़ों के विश्लेषण से वो कह सकते हैं कि आने वाले दिनों में यहां बीमारी तेज़ी से कम होगी।