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दिल्ली: स्वयं सत्यापित दस्तावेजों से होगा काम
Fri, 27 Aug 2021 04:05 PM IST
विक्रांत चतुर्वेदी
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
Published by: विक्रांत चतुर्वेदी
Updated Fri, 27 Aug 2021 04:05 PM IST
सार
- पेड़ हटाने के लिए नहीं देना होगा कानूनी दस्तावेज
- अभी तक नोटरी से पड़ता था बनवाना, अब खुद के सत्यापित दस्तावेजों से चल जाएगा काम
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पेड़ (प्रतीकात्मक तस्वीर)
- फोटो : pinterest
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विस्तार
राजधानी में पेड़ हटाने व प्रत्यारोपित के लिए अब नोटरी से कानूनी दस्तावेज बनवाने की जरूरत नहीं होगी। इसकी जगह खुद से सत्यापित दस्तावेज से काम चल जाएगा। वहीं, आवेदक को सीमित संख्या में ही दस्तावेजों को सलंग्न करना होगा। इसके लिए दिल्ली सरकार का वन विभाग छूट देने जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि आवेदन देने के बाद विभाग की ओर से सभी शर्तें पूरी करने पर अनुमति दी जाएगी।
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वर्तमान में किसी भी स्थान से परियोजना के तहत पेड़ हटाने के लिए आवेदक को एक कानूनी दस्तावेज भी लगाना होता है। इसे अनिवार्यता के रूप में लिया जाता था, लेकिन अब विभाग इसकी अनिवार्यता को खत्म करने जा रहा है। इसके बदले में अब आवेदक को स्वयं सत्यापित दस्तावेजों को ही देना होगा।
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वन विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि विभाग पेड़ हटाने की नीति में प्रयोग होने वाले दस्तावेजों में बदलाव कर रहा है। अब पेड़ को हटाने या प्रत्यारोपित करने के लिए कानूनी दस्तावेज की आवश्यकता नहीं होगी। यह प्रक्रिया अभी चरण में है। जल्द ही इससे जुड़े सभी पहलुओं पर काम होने के बाद इसे लागू कर दिया जाएगा। इससे लोगों को नोटरी के कानूनी दस्तावेज लगाने की आवश्यकता नहीं है।
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पेड़ हटाने या प्रत्यारिपत करने के यह हैं नियम
गत वर्ष दिसंबर में वन विभाग ने पेड़ हटाने व प्रत्यारोपण के लिए अधिसूजना जारी की थी। इसके तहत एजेंसी को पेड़ हटाने के लिए कम से कम 80 फीसदी पौधारोपण करने के लिए कहा गया था। नीति के मुताबिक, प्रत्येक पेड़ के बदले में 10 पौधे लगाने का प्रावधान है। साथ ही वन विभाग भी इसका रिकॉर्ड अपने वेबसाइट पर रखेगा। प्रत्यारोपण के बाद एक वर्ष में पेड़ों के जीवित रहने की दर 80 फीसदी है। इसे लेकर विभाग जीवित दर को संबंधित एजेंसी से लिंक भी करेगा। यदि पेड़ों की जीवित दर इससे कम होगी तो एजेंसी पर जुर्माना लगाने का भी प्रावधान है।