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Panipat : सिंचाई के लिए नहरी पानी की चोरी के चलते नहीं बुझ रही दिल्ली की प्यास, न लग पा रही लगाम
Mon, 17 Jun 2024 03:28 AM IST
दुष्यंत शर्मा
जगमहेंद्र सरोहा, पानीपत
जगमहेंद्र सरोहा, पानीपत
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Mon, 17 Jun 2024 03:28 AM IST
सार
हकीकत यह है कि हरियाणा की ओर से छोड़ा जाने वाला पूरा पानी दिल्ली तक पहुंच ही नहीं पाता है। पानीपत में ही बड़ी संख्या में किसान सिंचाई के लिए इसका इस्तेमाल करते हैं। ऐसे में हरियाणा से मिलने वाले पानी के इंतजार में दिल्ली की प्यास नहीं बुझ पाती।
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नहर से पानी निकालने के लिए डले पाइप
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
हरियाणा और दिल्ली के बीच नहरी पानी आपूर्ति को लेकर रार बरकरार है। हरियाणा की ओर से लगातार दिल्ली के हिस्से का पानी देने का दावा किया जाता रहा है, जबकि दिल्ली सरकार इससे इंकार करती रही है। हकीकत यह है कि हरियाणा की ओर से छोड़ा जाने वाला पूरा पानी दिल्ली तक पहुंच ही नहीं पाता है। पानीपत में ही बड़ी संख्या में किसान सिंचाई के लिए इसका इस्तेमाल करते हैं। ऐसे में हरियाणा से मिलने वाले पानी के इंतजार में दिल्ली की प्यास नहीं बुझ पाती। खासतौर पर धान के सीजन में यह समस्या अधिक गंभीर हो जाती है। शायद यही कारण है कि इन दिनों दिल्ली में पेयजल के लिए त्राहि-त्राहि मची है।
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करनाल के मूनक से सोनीपत की खुबडू झाल तक जाने वाली दोनों नहरों कैरियर लाइन चैनल और पैरलल दिल्ली ब्रांच की पानीपत में लंबाई करीब 43.8 किलोमीटर है। पानीपत के रैलकलां गांव से नहर प्रवेश करती हैं और ढिंडार गांव तक जाती है। कैरियर लाइन चैनल के साथ शहर की तरफ कॉलोनी और फैक्ट्री हैं। सिवाह गांव से आगे निकलते ही खेत शुरू हो जाते हैं और ढिंडार गांव तक दोनों नहरों के साथ खेत लगे हुए हैं। नहर के किनारे पंचायती और मालिकान भूमि के ठेके के सबसे ज्यादा रेट होते हैं। कारण कि नहरी पानी से आसानी से खेतों की सिंचाई की जा सकती है।
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धान के सीजन में नहर में पाइप लगाकर पानी चोरी कोई नई बात नहीं है। अलबत्ता सिंचाई विभाग की सख्ती के बाद अब दिन की जगह रात में पानी की चोरी अधिक होती है। नहर के साथ लगती माइनर और राजवाहों में धड़ल्ले से पाइप लगाकर खेतों की सिंचाई की जाती है। आम दिनों की अपेक्षा धान के सीजन में पानी चोरी की मात्रा कई गुना बढ़ जाती है। नहर में पांच से छह इंच के पाइप (सुंडके) पैरलल दिल्ली नहर के साथ कैरियर लाइन चैनल से लगाकर किसान धड़ल्ले से पानी चोरी करते हैं। सिंचाई विभाग ऐसे किसानों पर जुर्माना भी लगाता है। जुर्माना न भरने वाले किसानों पर कानूनी कार्रवाई भी की जाती है, लेकिन यह नाकाफी है। कारण कि किसान नहरी पानी के आगे जुर्माना छोटा मानते हैं। इसके अलावा फैक्ट्री और मिक्सर प्लांट संचालक भी नहर से पानी चोरी कर प्रयोग कर रहे हैं, जिससे दिल्ली को पूरा पानी नहीं मिल पा रहा है।
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नहर से एक घंटे के भीतर ही लाखों लीटर पानी हो जाता है चोरी
किसान दिल्ली नहर में करीब 70 फीट लंबा पाइप लगाते हैं। किसान चार से छह इंच का पाइप पानी चोरी में प्रयोग करते हैं। ये पाइप बाजार में आसानी से उपलब्ध हो जाते हैं। नहर के पानी में पाइप के एक हिस्से को डुबो दिया जाता है और दूसरे हिस्से को पानी में दबाकर खेत में ले जाकर छोड़ते हैं। विभागीय अधिकारी के अनुसार, पाइप के दोनों हिस्से में ऊंचाई जितनी अधिक होगी, पानी का बहाव उतना ही तेज होगा। एक मोटे अनुमान के अनुसार, छह इंच का पाइप एक घंटे में 200 मीटर क्यूब यानी दो लाख लीटर पानी निकाल देता है। इस तरह के 10 पाइप भी लगा दिए जाएं तो करीब 20 लाख लीटर पानी एक घंटे में निकल जाता है।
सिंचाई विभाग की ओर से किया जाने वाला जुर्माना नाकाफी
सिंचाई विभाग पानी चोरी के मामले में किसानों पर जुर्माना लगाता है। इसके लिए प्रत्येक सीजन में फसल पर अलग-अलग रेट तय होते हैं। धान के सीजन में प्रति एकड़ 100 रुपये आबियाना (शुल्क) लेता है। पानी चोरी मिलने पर इस पर 15 से 30 गुना तक जुर्माना लगा सकते हैं, यानी एक बार की सिंचाई में प्रति एकड़ 1500 से 3000 रुपये तक का जुर्माना लगता है। अधिकतर किसान पकड़े जाने पर इसे आसानी से भर देते हैं। जानकारों की मानें तो नहर का पानी ट्यूबवेल की अपेक्षा ज्यादा ठंडा और फर्टिलाइजर युक्त होता है। इसके प्रयोग से फसल का उत्पादन भी अच्छा होता है। इस कारण किसान ट्यूबवेल की अपेक्षा नहरी पानी के उपयोग पर अधिक जोर देते हैं।
पानी की चोरी से छोटा कोई काम नहीं : भाकियू
भारतीय किसान यूनियन सर छोटूराम के प्रदेश महासचिव हरेंद्र राणा ने बताया कि पुरानी कहावत है कि पानी से पतला कुछ नहीं है। अगर कोई पानी की ही चोरी करता है तो उससे छोटा कोई काम नहीं है। सिंचाई विभाग सीजन में माइनर व राजवाहों के माध्यम से किसानों को पानी देता है। किसानों के खेत के हिसाब से सिंचाई के लिए पूरा पानी दिया जाता है। इसके बावजूद कुछ किसान नहर से पानी की चोरी करते हैं।
नहरों से पानी चोरी रोकने के लिए बेलदार लगातार गश्त करते हैं। इनके अलावा जेई, एसडीओ भी फील्ड में तैनात रहते हैं। पानी की चोरी मिलने पर पाइप जब्त कर लिया जाता है। संबंधित किसान के खेत का सर्वे कर उस पर जुर्माना भी लगाया जाता है। जुर्माना न जमा कराने पर कानूनी कार्रवाई कराई जाती है। किसानों को राजवाहे के माध्यम से सीजन में पानी दिया जाता है। उनको नियमानुसार अपने पानी से फसल की सिंचाई करनी चाहिए।
-सुरेश सैनी, एक्सईएन, सिंचाई विभाग पानीपत