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Crisis : दिल्ली के निजी अस्पतालों में कम हो गए आठ हजार बेड, स्वास्थ्य विभाग को ठहराया जिम्मेदार

Fri, 30 May 2025 07:20 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, दिल्ली Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Fri, 30 May 2025 07:20 AM IST
सार

इन अस्पतालों के प्रबंधन ने इसके लिए सरकारी सिस्टम को जिम्मेदार ठहराया है। निजी अस्पताल प्रबंधकों का आरोप है कि स्वास्थ्य विभाग के गलत नियमों के कारण बेडों की संख्या 28 हजार से घटकर 20 हजार रह गई है।

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Delhi's private hospitals have reduced eight thousand beds,
hospital demo - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

दिल्ली के निजी अस्पतालों में बेड की संख्या आठ हजार घट गई है। इन अस्पतालों के प्रबंधन ने इसके लिए सरकारी सिस्टम को जिम्मेदार ठहराया है। निजी अस्पताल प्रबंधकों का आरोप है कि स्वास्थ्य विभाग के गलत नियमों के कारण बेडों की संख्या 28 हजार से घटकर 20 हजार रह गई है। अब इसके लिए सरकारी सिस्टम को दोष दें या निजी अस्पताल प्रबंधन की मनमर्जी को। परेशान तो जनता होगी।

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नेशनल मेडिकल फोरम और दिल्ली अस्पताल फोरम के अध्यक्ष डॉ. प्रेम अग्रवाल ने बताया कि दिल्ली की बढ़ती जनसंख्या के हिसाब से अस्पतालों में करीब एक लाख बिस्तर की जरूरत है। इस कमी को सरकार निजी संस्थाओं के साथ मिलकर दूर कर सकती है।
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उन्होंने कहा कि साल 2007 में मास्टर प्लान 2021 के तैयार करने के दौरान यह समस्या सामने आई कि दिल्ली में स्वास्थ्य ढांचा पर्याप्त नहीं है। उस समय केवल 107 संस्थागत प्लॉट अस्पतालों के लिए निर्धारित किए गए थे जो उस समय दिल्ली की करीब एक करोड़ से अधिक जनसंख्या के लिए पर्याप्त नहीं थे।
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इसे देखते हुए मास्टर प्लान 2021 में अनुमति दी गई कि 15 मीटर से कम ऊंचाई वाले रिहायशी भवनों और प्लॉट्स का उपयोग अस्पताल के लिए किया जा सकता है। इस नीति के तहत दिल्ली में 800 से ज्यादा अस्पताल और नर्सिंग होम विकसित हुए। इनमें 20 हजार से अधिक बिस्तरों की क्षमता बनी।

मौजूदा समय में नर्सिंग होम सेल ने अग्निसुरक्षा प्रमाण पत्र फायर (एनओसी) प्राप्त होने तक नए अस्पतालों के पंजीकरण, पुराने पंजीकरण के नवीनीकरण पर रोक लगा दी गई। उस समय इसे लेकर नियम नहीं बनाए गए थे। ऐसे में 50 हजार लीटर की पानी की टंकी, दो मीटर चौड़ी दो सीढ़ियां और पांच मीटर चौड़े गलियारे का रिहायशी इमारतों में मानक पूरा करना संभव नहीं है। इस कारण कई अस्पताल तीन की जगह एक मंजिल पर सिमट गए हैं, जिसे इन अस्पतालों में बिस्तरों की क्षमता कम हुई है।

तय हो नियम
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की एक आरटीआई में स्पष्ट दिशा निर्देश देने के बावजूद डीजीएचएस के नर्सिंग होम सेल ने 50 बिस्तरों से अधिक क्षमता वाले अस्पतालों में अनिवार्य रूप से व्यक्तिगत एसटीपी प्लांट लगाने की शर्त लगायी है। इस नीतिगत बाध्यता से ऐसे कई अस्पताल जो सौ बिस्तरों के लिए सक्षम है। उन्हें मंजूरी नहीं मिल रही है। मजबूरन उन्होंने अपनी क्षमता घटाकर 50 बिस्तरों तक सीमित कर ली है।

-डॉ. प्रेम अग्रवाल, अध्यक्ष नेशनल मेडिकल फोरम और दिल्ली अस्पताल फोरम

लिखा मंत्री को पत्र
डॉ. अग्रवाल ने कहा कि फोरम की ओर से दिल्ली सरकार के स्वास्थ्य मंत्री को पत्र लिखा गया है। इसमें इन सभी नीतिगत बाधाओं दिक्कतों वह परेशानियों के चलते दिल्ली के स्वास्थ्य ढांचे को विकसित करने में आ रही कठिनाई से अवगत कराते हुए इस मामले को गंभीरता से लेते हुए शीघ्र उचित कार्यवाही का आग्रह किया गया है।

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