देश में सबसे ज्यादा गुस्सैल हैं दिल्ली के 'दारजी'
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सदर बाजार में कपड़ों व बैग की चेन के होल सेलर की छोटी सी दुकान इन दिनों देशी व विदेशी मीडिया के लिए खास बन गई है। बीबीसी के अनुसार यहां पर देश के सबसे ज्यादा गुस्सैल सरदार परमीत सिंह उर्फ पम्मा बैठते हैं।
दरअसल, पम्मा को गुस्सा जनता की अनदेखी व कुछ गलत होता देखकर आता है। वे जनता के लिए कई दशकों से लगातार आंदोलन की राह पर हैं और उनके आंदोलन का तरीका व गुस्सा भी अलग तरह का है।
हाल ही में बीबीसी ने सोशल मीडिया व अन्य माध्यमों से सर्वे कर एक खास वर्ग में पम्मा को देश का सबसे बड़ा उग्र व गुस्सैल घोषित करते हुए डॉक्यूमेंट्री बनाई है।
खबरिया चैनलों व यू ट्यूब पर पम्मा के बारे में पता चलने पर यहां पर मीडिया का जमावड़ा लगा हुआ है। 14 साल की उम्र में उन्होंने स्कूल छोड़ दिया था और पिता के साथ पहली बार 16 साल की उम्र में एक आंदोलन में शरीक हुए।
और पम्मा पर बनने लगी डॉक्यूमेंट्री
पम्मा के अनुसार बीबीसी के इस घोषणा के बाद आधा दर्जन से अधिक चैनल उनपर डॉक्यूमेंट्री तैयार कर चुके हैं। इसके अलावा मीडिया का जमावड़ा इन दिनों उनकी दुकान पर लगा हुआ है।
पम्मा बताते हैं कि जब भी आम आदमी किसी मामले में परेशान होता है तो उन्हें गुस्सा आता है। उन्होंने विभिन्न संगठनों से जुड़कर अभी तक कितने आंदोलन व प्रदर्शन किए हैं उसकी संख्या वह भी नहीं बता सकते।
उनके अनुसार अखबार या टीवी में जब वे कुछ गलत होता देखते हैं तो उनका गुस्सा उबाल खा जाता है और फिर वे अपने साथियों के साथ आंदोलन के लिए जंतर मंतर, पार्लियामेंट या विधानसभा आदि का रुख कर लेते हैं।
इसमें मीडिया ने उनका हमेशा साथ दिया और जनता उनके आंदोलन की खबर पर इकट्ठा हो जाती रही है। वर्ष 2004-05 में जब प्याज के दाम बढ़े तो पम्मा ने मंडी से चालीस रुपये किलो प्याज खरीदकर बीस रुपये किलो दिल्ली में बिकवाए।
'गुस्सा करते हैं लेकिन अच्छे इंसान हैं'
इसका असर यह रहा कि प्याज की कीमतों पर देश भर में भाजपा सरकार के खिलाफ आंदोलन खड़ा हो गया। उन्होंने टीवी पर अश्लीलता के खिलाफ आंदोलन किया तो असली टीवी में ही आंदोलन के दौरान आग लगा दी।
एक बार फौजियों पर हमलों के विरोध में वे फौजी की ड्रेस में जंतर मंतर पर पहुंचे। अमेरिका में सिखों पर हमले के विरोध में उन्होंने नंगी तलवारों के साथ आंदोलन किया।
पम्मा के अनुसार आंदोलनों की संख्या को देखे हुए उन्हें पड़ोस व शुभचिंतक यह तक कहने लगे कि तुम तो अपना घर जंतर मंतर या संसद के बाहर ही बनवा लो। लोगों के लिए गुस्से करने का खामियाजा उन्हें कई बार बीमार होकर उठाना पड़ा है।
पड़ोस के इंद्रजीत कहते हैं कि पम्मा गुस्सा करते हैं लेकिन वे अच्छे इंसान है। टीवी पर उनपर प्रोग्राम चल रहे हैं लेकिन उससे अच्छे नजरिए से देखा जाना चाहिए।