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दिल्ली दंगा : कपिल मिश्रा की भूमिका की जांच का आदेश रद्द
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- राउज एवेन्यू स्थित स्पेशल जज ने सुनाया फैसला
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। राउज एवेन्यू कोर्ट ने सोमवार को कानून मंत्री कपिल मिश्रा और दिल्ली पुलिस द्वारा दायर पुनरीक्षण याचिकाओं को स्वीकार कर लिया। विशेष न्यायाधीश दिग विनय सिंह ने अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (एसीजेएम) के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें दिल्ली पुलिस को 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों की साजिश में कपिल मिश्रा की भूमिका की जांच करने का निर्देश दिया गया था।
कोर्ट ने निचली अदालत को निर्देश दिया कि वह शिकायत पर कानून के अनुसार सुनवाई करे। दिल्ली पुलिस ने कोर्ट में दलील दी थी कि उसने पहले ही दंगों की साजिश में कपिल मिश्रा की भूमिका की जांच की थी और उनके खिलाफ कोई सबूत नहीं मिला। इससे पहले, अप्रैल 2025 में एक मजिस्ट्रेट कोर्ट ने दिल्ली पुलिस को कपिल मिश्रा और अन्य लोगों की 2020 के दिल्ली दंगों की साजिश में भूमिका की आगे जांच करने का आदेश दिया था। इस आदेश को कपिल मिश्रा और दिल्ली पुलिस ने सत्र न्यायालय में चुनौती दी थी। 25 सितंबर को राउज एवेन्यू कोर्ट ने बीजेपी नेता कपिल मिश्रा और दिल्ली पुलिस की याचिकाओं पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था, जिसमें निचली अदालत के आदेश को चुनौती दी गई थी। यह आदेश मोहम्मद इलियास की शिकायत के आधार पर दिया गया था।
दिल्ली पुलिस की ओर से विशेष लोक अभियोजक ने दावा किया कि मिश्रा की जांच पहले ही की जा चुकी है और उनके खिलाफ कोई आपत्तिजनक सबूत नहीं मिला। उन्होंने आरोप लगाया कि मिश्रा को फंसाने की साजिश रची गई थी, जिसमें व्हाट्सएप ग्रुप चैट और सोशल मीडिया पर अरेस्ट कपिल मिश्रा जैसे अभियानों के जरिए एक नरेटिव बनाया गया। पुलिस ने अपनी लिखित दलीलों में चार्जशीट का हवाला देते हुए कहा कि डीपीएसजी जैसे व्हाट्सएप ग्रुपों में चर्चा से पता चलता है कि कुछ लोग मिश्रा के खिलाफ नरेटिव बनाने में सक्रिय थे। दिल्ली पुलिस ने यह भी कहा कि दंगों से संबंधित 751 एफआईआर में मिश्रा का नाम कहीं नहीं आया।
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अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। राउज एवेन्यू कोर्ट ने सोमवार को कानून मंत्री कपिल मिश्रा और दिल्ली पुलिस द्वारा दायर पुनरीक्षण याचिकाओं को स्वीकार कर लिया। विशेष न्यायाधीश दिग विनय सिंह ने अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (एसीजेएम) के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें दिल्ली पुलिस को 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों की साजिश में कपिल मिश्रा की भूमिका की जांच करने का निर्देश दिया गया था।
कोर्ट ने निचली अदालत को निर्देश दिया कि वह शिकायत पर कानून के अनुसार सुनवाई करे। दिल्ली पुलिस ने कोर्ट में दलील दी थी कि उसने पहले ही दंगों की साजिश में कपिल मिश्रा की भूमिका की जांच की थी और उनके खिलाफ कोई सबूत नहीं मिला। इससे पहले, अप्रैल 2025 में एक मजिस्ट्रेट कोर्ट ने दिल्ली पुलिस को कपिल मिश्रा और अन्य लोगों की 2020 के दिल्ली दंगों की साजिश में भूमिका की आगे जांच करने का आदेश दिया था। इस आदेश को कपिल मिश्रा और दिल्ली पुलिस ने सत्र न्यायालय में चुनौती दी थी। 25 सितंबर को राउज एवेन्यू कोर्ट ने बीजेपी नेता कपिल मिश्रा और दिल्ली पुलिस की याचिकाओं पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था, जिसमें निचली अदालत के आदेश को चुनौती दी गई थी। यह आदेश मोहम्मद इलियास की शिकायत के आधार पर दिया गया था।
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दिल्ली पुलिस की ओर से विशेष लोक अभियोजक ने दावा किया कि मिश्रा की जांच पहले ही की जा चुकी है और उनके खिलाफ कोई आपत्तिजनक सबूत नहीं मिला। उन्होंने आरोप लगाया कि मिश्रा को फंसाने की साजिश रची गई थी, जिसमें व्हाट्सएप ग्रुप चैट और सोशल मीडिया पर अरेस्ट कपिल मिश्रा जैसे अभियानों के जरिए एक नरेटिव बनाया गया। पुलिस ने अपनी लिखित दलीलों में चार्जशीट का हवाला देते हुए कहा कि डीपीएसजी जैसे व्हाट्सएप ग्रुपों में चर्चा से पता चलता है कि कुछ लोग मिश्रा के खिलाफ नरेटिव बनाने में सक्रिय थे। दिल्ली पुलिस ने यह भी कहा कि दंगों से संबंधित 751 एफआईआर में मिश्रा का नाम कहीं नहीं आया।
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