दिल्ली दंगा: सबूत और पूरक आरोप पत्र दाखिल न करने से अदालत नाराज, दिल्ली पुलिस, विशेष लोक अभियोजक को लगाई फटकार
न्यायाधीश ने अपने आदेश की प्रति दिल्ली पुलिस आयुक्त को भी भेजने का निर्देश दिया और अगली सुनवाई से पहले सभी आरोपियों को दो-दो हजार रुपए का हर्जाना देना सुनिश्चित करने को कहा है।
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अदालत ने दिल्ली दंगों के एक मामले में सबूतों की सूची एवं पूरक आरोप पत्र समय पर दाखिल नहीं करने को लेकर दिल्ली पुलिस एवं विशेष लोक अभियोजक को फटकार लगाई है। अदालत ने कहा कि यह असंवेदनशील दृष्टिकोण है। कड़कड़डूमा कोर्ट के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश पुलस्त्य प्रमाचला ने अभियोजन पक्ष को दस्तावेजों को दाखिल करने के लिए अंतिम मौका दिया और सुनवाई 15 जुलाई के लिए स्थगित कर दी। साथ ही सभी आरोपियों को दो-दो हजार रुपए बतौर हर्जाना देने को कहा है।
न्यायाधीश ने अपने आदेश की प्रति दिल्ली पुलिस आयुक्त को भी भेजने का निर्देश दिया और अगली सुनवाई से पहले सभी आरोपियों को दो-दो हजार रुपए का हर्जाना देना सुनिश्चित करने को कहा है। अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष के असंवेदनशील रवैये के कारण सुनवाई में देरी हो रही है। सबूतों की सूची तैयार करना अभियोजन पक्ष या जांच अधिकारी अथवा जांच अधिकारी से मिलकर अभियोजन पक्ष को तैयार करना है। वे एक दूसरे पर जिम्मेदारी डाल रहे हैं।
अदालत ने 20 मार्च को अभियोजन पक्ष को विशिष्ट विवरणों के साथ सबूतों का एक सूची पेश करने का निर्देश दिया था। साथ ही पूरक आरोपपत्र दाखिल करने के लिए भी समय दिया गया था। अभियोजन पक्ष ने न तो पूरक आरोपपत्र दाखिल किया और न ही साक्ष्यों की सूची पेश की गई। यह मामला दयालपुर थाने का है जो आईपसी की धारा 147, 148, 149, 380, 454, 427, 436 और 120बी के तहत दर्ज की गई थी। उस मामले में आरोपी शाह आलम, इरफान, हबीब अहमद, राशिद सैफी, मो. शादान, अजहर और सलीम को जमानत मिल गई है।