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दिल्ली दंगा: तीन आरोपियों को लेकर न्यायालय ने कहा- मुकदमा चलाने का आधार नहीं, होगी न्यायिक समय की बर्बादी

Mon, 04 Apr 2022 10:21 PM IST
प्रशांत कुमार अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली Published by: प्रशांत कुमार Updated Mon, 04 Apr 2022 10:21 PM IST
सार

दिल्ली दंगों से जुड़े एक मामले में अदालत ने तीन आरोपियों को आरोपमुक्त कर दिया। अदालत ने कहा कि पुलिस द्वारा पेश साक्ष्यों व दस्तावेजों में उनके खिलाफ मुकदमा चलाने का आधार नहीं है।

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Delhi riots case court said No ground for prosecution waste of judicial time
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

अदालत ने दिल्ली दंगों से जुड़े एक मामले में गैरइरातन हत्या का प्रयास, दंगा इत्यादि आरोप से तीन आरोपियों को आरोपमुक्त कर दिया। अदालत ने फैसले में कहा कि पुलिस द्वारा पेश साक्ष्यों व दस्तावेजों में उनके खिलाफ मुकदमा चलाने का आधार नहीं है। ऐसे में आरोपियों के खिलाफ आरोप तय किए जाने पर यह न्यायिक समय की बर्बादी होगी। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश वीरेंद्र भट्ट ने आरोपी सुरेंद्र सोनी, शिवा और नितिन को आरोपमुक्त कर दिया। 

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अदालत ने कहा इन आरोपियों के खिलाफ आरोप पत्र के साथ संलग्न सामग्री को ध्यान में रखते हुए आरोप तय नहीं किया जा सकता है। जिसके आधार पर अंतिम चरण में उनकी सजा की कोई संभावना नहीं है। यह न्यायिक समय की बर्बादी होगी। पुलिस ने तीनों के खिलाफ गैर इरादतन हत्या करने का प्रयास, दंगा, घातक हथियार का प्रयोग व गैरकानूनी रूप से एत्रित होने के तहत आरोप पत्र दायर किया था। 
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पुलिस ने यह मामला एक दंगा पीड़ित की शिकायत पर दर्ज किया था। उसने सीसीटीवी फुटेज देख कर आरोपियों की पहचान की थी। अदालत ने कहा ऐसा कोई साक्ष्य नहीं है कि आरोपियों ने किसी अपराध में हिस्सा लिया था। आरोपी सोनी की पहचान के बारे में संदेह जताते हुए अदालत ने कहा रिकॉर्ड पर कुछ भी नहीं है कि सीसीटीवी फुटेज में दिख रहा व्यक्ति सोनी है। उनके खिलाफ कोई भी चश्मदीद गवाह नहीं है। 
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शिकायतकर्ता अजीम अंसारी ने भी अपने छह मार्च 2020 के बयान में कहीं भी नहीं कहा कि जिसके आधार पर प्राथमिकी दर्ज की गई थी। जहां तक अन्य दो आरोपियों की पहचान का सवाल है, अदालत ने कहा कि सोनी के बयान के आधार पर उन्हें आरोपी बनाया गया है लेकिन उनकी पहचान की पुष्टी नहीं हो पाई। रिकॉर्ड पर पहचान की पुष्टी के लिए मात्र एक गवाह के ही बयान है। अदालत ने कहा कि सभी तथ्यों के आधर पर यदि उनके खिलाफ मुकदमा चलाया जाता है तो यह मात्र न्यायिक समय की बर्बादी ही होगी।

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