{"_id":"615d8f618ebc3e0b356916a4","slug":"delhi-riots-2020-police-witnesses-lying-on-oath-says-court-on-contradictory-statements","type":"story","status":"publish","title_hn":"दिल्ली दंगा: विरोधाभासी बयानों को लेकर बोली अदालत- पुलिस के गवाह शपथ लेकर झूठ बोल रहे हैं","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
दिल्ली दंगा: विरोधाभासी बयानों को लेकर बोली अदालत- पुलिस के गवाह शपथ लेकर झूठ बोल रहे हैं
Wed, 06 Oct 2021 08:16 PM IST
पूजा त्रिपाठी
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
Published by: पूजा त्रिपाठी
Updated Wed, 06 Oct 2021 08:16 PM IST
सार
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीष विनोद यादव ने कहा मामले की सुनवाई के दौरान कहा कि, यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। अदालत ने इस मामले में डिप्टी कमिश्नर (उत्तर पूर्वी) से रिपोर्ट मांगी है।
विज्ञापन
delhi violence
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
दिल्ली दंगों के तीन आरोपियों की एक पुलिसकर्मी पहचान करता है तो वहीं दूसरा कहता है कि जांच के दौरान आरोपियों की पहचान नहीं हुई थी। इस विरोधाभासी बयान के बाद अदालत ने कहा कि एक पुलिस वाला झूठ बोल रहा है। उत्तर पूर्वी दिल्ली में फरवरी 2020 में हुए दंगों में 53 लोग मारे गए थे जबकि 700 से ज्यादा जख्मी हुए थे।
विज्ञापन
कड़कड़डूमा अदालत के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश विनोद यादव ने कहा ये बेहद खराब हालात हैं। उन्होंने इस संबंध में उत्तर पूर्वी जिला पुलिस उपायुक्त से रिपोर्ट मांगी है। मामले में एक हेड कांस्टेबल ने अभियोजन के गवाह के तौर पर बयान दिया कि उसने आरोपी विकास कश्यप, गोलू कश्यप और रिंकू सब्जीवाला की पहचान की थी। उसने कहा कि उस इलाके में 2019 से बीट अफसर था। वह तीनों आरोपियों को उनके नाम और हुलिए से जानता था।
विज्ञापन
जज विनोद यादव ने इस बात पर गौर कि पुलिसकर्मी ने अपने बयान में मजबूती से कहा कि उसने तीनों आरोपियों को दंगों के दौरान घटनास्थल पर देखा था। उसने आरोपियों की नाम और उनके काम से पहचान की थी।
विज्ञापन
अभियोजन के दूसरे गवाह ने कही ये बात
वहीं इसके उलट अभियोजन के एक दूसरे गवाह एक सहायक उपनिरीक्षक ने कहा कि तीनों आरोपियों की हेड कांस्टेबल ने नाम से पहचान की है लेकिन जांच के दौरान उनकी पहचान नहीं हुई थी। मैंने तीन अन्य आरोपियों की तलाश की थी लेकिन वे नहीं मिले थे।
इन दोनों से अलग जांच अधिकारी ने कहा कि रिकार्ड पर ऐसा कुछ नहीं है कि तीनों आरोपियों के नाम होने के बावजूद कभी उनसे पूछताछ या छानबीन हुई थी। जज ने इस बात पर गौर किया कि जांच के दौरान इन आरोपियों की पहचान नहीं हो पाई थी। तीनों आरोपियों को पकड़ने के लिए जांच अधिकारी ने कोई कदम नहीं उठाया। पहली नजर में देखने में लगता है कि पुलिस का कोई एक गवाह झूठ बोल रहा है जो कानून दंडनीय अपराध है।
कोर्ट ने इस मामले में अभियोजन के गवाहों के बयान दर्ज कर लिए हैं। अब बचाव पक्ष के बयान दर्ज करने के लिए 30 अक्तूबर की तारीख तय की गई है। मामला भगीरथी विहार में दंगे से जुड़ा है।