दिल्ली दंगा: अदालत ने सुनाया पहला फैसला, डकैती के आरोपी को किया बरी
सुरेश उर्फ भटूरा पर भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 143 (गैरकानूनी रूप से एकत्रित होने), 147 (दंगे) और 395 (डकैती) का आरोप था। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अमिताभ रावत ने अपने विस्तृत फैसले में कहा कि मामले में गवाहों की गवाही में विरोधाभास है।
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अदालत ने मंगलवार को दिल्ली दंगों से जुड़े एक मामले में आरोपी सुरेश उर्फ भटूरा को बरी कर दिया। अदालत ने गवाहों के बयानों में विरोधाभास पाते हुए कहा कि आरोपी को सभी आरोपों से बरी किया जाता है। यह मामला स्पष्ट रूप से बरी का है। पिछले वर्ष हुए दंगे का यह पहला मामला है, जिसमें फैसला आया है।
सुरेश उर्फ भटूरा पर भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 143 (गैरकानूनी रूप से एकत्रित होने), 147 (दंगे) और 395 (डकैती) का आरोप था। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अमिताभ रावत ने अपने विस्तृत फैसले में कहा कि मामले में गवाहों की गवाही में विरोधाभास है।
अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष द्वारा पेश गवाहों के बयानों से आरोपी का अपराध साबित नहीं होता। इसके अलावा गवाह के रूप में पेश पुलिसकर्मी भी अपने बयानों पर कायम नहीं रहे और उनके बयानों में भी विरोधाभास है और किसी के बयानों में ऐसा कोई साक्ष्य नहीं है कि आरोपी लूटपाट करने वाली भीड़ में शामिल था और उसने लूटपाट की।
यह मामला आसिफ की शिकायत पर दर्ज हुआ था। आसिफ ने कहा था कि 25 फरवरी 2020 को शाम करीब चार बजे मेन बाबरपुर रोड पर उनकी दुकान पर लोहे की रॉड और लाठी लेकर भारी भीड़ आई और उस पर हमला कर दिया। भीड़ ने कथित तौर पर शटर और ताला तोड़कर दुकान में लूटपाट की।
शिकायतकर्ता आसिफ दुकान में किराएदार था और दुकान मालिक भगत सिंह ने कथित तौर पर आरोपी व अन्य को लूटपाट करते हुए देखा था। जांच के दौरान भगत सिंह ने बताया कि दंगाई आक्रामक थे और दुकान को लूटना चाहते थे, क्योंकि यह एक मुस्लिम की दुकान थी। उन्होंने यह भी दावा किया कि उन्होंने उन्हें रोकने की कोशिश की थी। भगत सिंह ने सुरेश की पहचान 7 अप्रैल 2020 को आरोपी में से एक के रूप में की।
भगत सिंह ने अपने बयानों में कहा कि घटना के समय उसके हस्तक्षेप करने पर बुरे परिणाम भुगतने की धमकी दी गई। उन्होंने कहा इसके बाद उसने बीट पर तैनात पुलिसकर्मी को पूरी घटना से अवगत करवाया। अदालत ने 9 मार्च 2021 को सुरेश पर धारा 143, 147, 427 (पचास रुपये से ज्यादा राशि को नुकसान पहुंचाने), 454 (अतिक्रमण), 149 (गैरकानूनी रूप से एकत्रित होने) और आईपीसी की 395 के तहत अभियोग तय किए गए थे।