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Delhi : हादसे में पैर गंवा चुके दिव्यांग को अब रेलवे देगा 8 लाख मुआवजा, और 12 फीसदी ब्याज भी देना पड़ेगा
Wed, 07 May 2025 02:56 AM IST
दुष्यंत शर्मा
नितिन राजपूत, नई दिल्ली
नितिन राजपूत, नई दिल्ली
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Wed, 07 May 2025 02:56 AM IST
सार
अदालत ने कहा कि अपीलकर्ता को दुर्घटना की तारीख से लेकर उसके ठीक होने तक 12 फीसदी ब्याज के साथ मुआवजा देना होगा। पीड़ित ने रेलवे दावा न्यायाधिकरण की तरफ से 2017 में दावे को खारिज कर दिए जाने के बाद हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : एएनआई (फाइल)
विस्तार
ट्रेन से गिरने के कारण गंभीर रूप से घायल होने के बाद अपना पैर गंवाने वाले व्यक्ति के पक्ष में हाईकोर्ट ने दस साल बाद फैसला सुनाया है। अदालत ने रेलवे विभाग को दिव्यांग को 8 लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया है।
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अदालत ने कहा कि अपीलकर्ता को दुर्घटना की तारीख से लेकर उसके ठीक होने तक 12 फीसदी ब्याज के साथ मुआवजा देना होगा। पीड़ित ने रेलवे दावा न्यायाधिकरण की तरफ से 2017 में दावे को खारिज कर दिए जाने के बाद हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।
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वर्ष 2015 में चलती ट्रेन से गिरने के कारण वरुन जिंदल गंभीर रूप से घायल हो गए थे। घटना ट्रेन में लगे जोरदार झटके के चलते हुई थी। इसके चलते अपीलकर्ता अपना संतुलन खो बैठा और कथित रूप से भीड़भाड़ वाले जनरल डिब्बे से बाहर गिर गया।
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ऐसे में इलाज के दौरान उनका बायां पैर काटना पड़ा था। सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति धर्मेश शर्मा ने अपने आदेश में कहा कि रिकॉर्ड में ऐसा कोई तथ्य नहीं है, जिससे यह पता चले कि अपीलकर्ता उस एक्सप्रेस ट्रेन में चढ़ने या उतरने की कोशिश कर रहा था। साथ ही, गवाही में यह स्पष्ट है कि वह अपना संतुलन खोने के बाद हंगामे और अचानक झटके के चलते गिर गया और उसे चोटें लगी।
मासिक सीजन टिकट ने जीता अदालत का भरोसा
न्यायाधीश ने कहा कि अपीलकर्ता को चोटें उसकी खुद की लापरवाही के चलते लगी हैं, यह कानून की दृष्टि की भी समझ से परे है। ऐसे में यह स्पष्ट रूप से साबित होता है कि अपीलकर्ता के किसी अप्रिय घटना में घायल होने का मामला था।
हालांकि, हाईकोर्ट ने माना कि इस दावे का समर्थन करने के लिए कोई सबूत नहीं है। यही नहीं, न्यायाधीश ने अपीलकर्ता के मासिक सीजन टिकट पर भी विश्वास जताया। इसमें उसके इस दावे का समर्थन किया कि वह फरीदाबाद से ट्रेन में चढ़ा था, जो दिल्ली में अपने कार्यस्थल पर आने-जाने के लिए उसका रोजाना का रूट था।
रेलवे दावा न्यायाधिकरण के याचिका खारिज करने के कारण को ठहराया गलत
इससे पहले रेलवे दावा न्यायाधिकरण ने अपीलकर्ता के इस दावे को खारिज कर दिया था। तब डिवीजनल रेलवे मैनेजर (डीआरएम) ने कहा था कि अपीलकर्ता को चोटें उसकी अपनी लापरवाही के कारण आईं, क्योंकि वह भोपाल जाने वाली एक सुपर-फास्ट ट्रेन में चढ़ने की कोशिश कर रहा था और इस दौरान उसका संतुलन बिगड़ गया। ऐसे में अदालत ने कहा कि डीआरएम की 10 मई, 2016 की रिपोर्ट में विश्वसनीयता का अभाव है। इसमें घटनाओं के बारे में अलग-अलग संस्करण प्रस्तुत किए गए हैं।