तिहाड़ का तिलिस्म तोड़ने की तैयारी: ‘हरिराम नाई’ के सहारे टूटेगा गैंगस्टर्स का नेटवर्क, बदमाश देंगे हर खबर
तिहाड़ जेल में हाल ही में गैंगस्टर टिल्लू ताजपुरिया समेत कई लोगों की गैंगवार में हत्या हो चुकी है। गैंगवार आए दिन हो रही है। तिहाड़ प्रशासन को इन हत्याओं की साजिश व गैंगवार के बारे में भनक तक नहीं लगी थी।
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फिल्म शोले की तरह तिहाड़ जेल से बाहर आए बदमाशों को हरीराम नाई बनाकर दिल्ली पुलिस भी कैदियों की करतूतों के बारे में पता लाएगाी। पुलिस इनसे जेल में चल रहे अवैध गतिविधियां की जानकारी लेने के साथ साथ ही गैंगस्टरों के वारदात को अंजाम देने को लेकर रची जाने वाली साजिश का भी पता लगाएगी।
तिहाड़ जेल में हाल ही में गैंगस्टर टिल्लू ताजपुरिया समेत कई लोगों की गैंगवार में हत्या हो चुकी है। गैंगवार आए दिन हो रही है। तिहाड़ प्रशासन को इन हत्याओं की साजिश व गैंगवार के बारे में भनक तक नहीं लगी थी। ऐसे में अब दिल्ली पुलिस ने बदमाशों की ओर से जेल में और जेल से बाहर रची जाने वाले साजिशों को बेनकाब करने रूप रेखा तैयार कर ली है।
खासकर द्वारका जिला पुलिस जेल से निकले गंभीर मामलों में शामिल बदमाशों के जरिये जेल में होने वाले गैरकानूनी गतिविधियों की जानकारी हासिल करने में जुट गई है। जिस जेल से बदमाश निकलता है, उस जेल में बंद गैंगस्टरों की गतिविधि के बारे में पुलिस उससे जानकारी हासिल कर रही है।
जेल से छूटने के बाद बदमाशों से पुलिस लेती है अहम जानकारी
द्वारका जिले में जेल से निकलने वाले बदमाशों पर निगरानी रखने के लिए जेल बेल सेल यूनिट काम कर रही है। अब पुलिस ने यूनिट में तैनात पुलिसकर्मी की मदद से जेल में बंद बदमाशों की जासूसी कर रही है। यूनिट में तैनात पुलिसकर्मी उन तमाम बदमाशों पर निगरानी रखती है, जो जमानत मिलने के बाद जेल से निकलते हैं।
अब पुलिस जेल से निकलने वाले इन बदमाशों से पूछताछ कर जेल से जुड़े कुछ जानकारी हासिल करते हैं। मसलन जेल में कोई बदमाश मोबाइल का इस्तेमाल कर रहा है या नहीं। यदि मोबाइल का इस्तेमाल होता है तो उन्हें यह मोबाइल कौन मुहैया करवा रहा है। कौन-कौन से कैदी इसमें शामिल है। क्या कोई कैदी जेल में हथियार तैयार कर रहा है। हथियार तैयार करने के बाद उसे कहां छिपाकर रखता है। क्या कोई जेल में बंद गैंगस्टर बाहर मौजूद अपने साथियों की मदद से वारदात को अंजाम देने की साजिश कर रहा है। इन जानकारियों को हासिल करने के बाद इसे जेल प्रशासन से साझा किया जाता है। जिसके बाद जेल प्रशासन उन जेलों में तलाशी अभियान चलाकर बदमाशों से हथियार या फिर मोबाइल फोन बरामद करती है।
इसके साथ ही जेल में बंद गैंगस्टर अपने साथियों के साथ बाहर कोई वारदात को अंजाम देना चाहता है तो इसकी जानकारी संबंधित जिला पुलिस को दी जाती है। ताकि समय रहते होने वाले अपराध पर अंकुश लगाया जा सके। पुलिस इन जानकारियों को मुहैया करवाने वाले बदमाशों का नामों का खुलासा नहीं करती है।