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मौलाना साद अगर मान लेते 19 मार्च को पुलिस की बात, तो कोरोना संक्रमित होने से बच जाते ज्यादातर जमाती

Tue, 14 Apr 2020 01:28 AM IST
Vikas Kumar पुरुषोत्तम वर्मा, अमर उजाला, नई दिल्ली
पुरुषोत्तम वर्मा, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Vikas Kumar Updated Tue, 14 Apr 2020 01:28 AM IST
सार

-तीन बार बुलाने के बावजूद पुलिस से नहीं मिले थे मौलाना साद
-19 मार्च पुलिस ने मौलाना साद को मरकज खाली करने के बारे में बता दिया था
-मोहम्मद साद ने पुलिस की चेतावनी पर ध्यान नहीं दिया

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delhi Police told to Maulana Saad about evacuating Markaz on 19 March
निजामुद्दीन में कोरोना का कहर - फोटो : PTI

विस्तार

निजामुद्दीन स्थित तब्लीगी मरकज के मौलाना मोहम्मद साद चाहते तो देश में भारी संख्या में कोरोना महामारी की चपेट में आए लोगों को बचा सकते थे, मगर ऐसा नहीं किया। पुलिस ने 19 मार्च को ही मरकज को खाली करने व सरकारी आदेशों के बारे में बता दिया था, मगर उन्होंने पुलिस की चेतावनी पर ध्यान नहीं दिया। निजामुद्दीन थाना पुलिस ने मौलाना साद को तीन बार बुलाया था, मगर वह पुलिस अधिकारियों से नहीं मिले। दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा की जांच में इन बातों का खुलासा हुआ है। कई और नए खुलासे सामने आए हैं। दिल्ली पुलिस ने 24 मार्च को नहीं, बल्कि 19 मार्च को ही मरकज के मौलानाओं को बता दिया था।

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अपराध शाखा के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि निजामुद्दीन थाना पुलिस ने तब्लीगी मरकज के दूसरे मौलाना मो. युनूस को 19 मार्च को निजामुद्दीन थाने में बुलाया था। उस समय निजामुद्दीन थाने में थानाध्यक्ष मुकेश वालिया व एसीपी लाजपत नगर (निजामुद्दीन थाना लाजपत नगर सब-डिवीजन में आता है) अतुल कुमार मौजूद थे। पुलिस अधिकारियों ने मौलाना मो. युनूस को सरकारी आदेशों के बारे में बताया था कि कोरोना महामारी के चलते 50 से ज्यादा व्यक्ति एक जगह एकत्रित नहीं हो सकते। इसके बावजूद मरकज से जमातियों को बाहर निकालने के लिए कुछ नहीं किया गया। 
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वहीं दिल्ली सरकार ने कोरोना महामारी को रोकने के लिए 16 मार्च को आदेश जारी किया था कि 50 से ज्यादा लोग एक जगह एकत्रित नहीं हो सकते, जबकि इस समय मरकज में सैकड़ों लोग मौजूद थे। जांच में जुटे एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी का तो यहां तक कहना है कि 16 मार्च के बाद भी मरकज में जमाती आते रहे।

सूचना को छिपाने का आरोप

अपराध शाखा के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि निजामुद्दीन थाना पुलिस ने मरकज के मौलाना मोहम्मद साद को कई बार बुलाया था। बीट अफसर मौलाना मोहम्मद साद को तीन बार बुलाने गया था कि वरिष्ठ पुलिस अधिकारी मिलने बुला रहे हैं। मौलाना साद हर बार कह देते थे कि वह मिलने आ रहे हैं, मगर वह पुलिस अफसरों से नहीं मिले। उनकी जगह मरकज कमेटी के अन्य लोग पुलिस अफसरों से मिलने गए थे। 

आरोप है कि मौलाना मोहम्मद साद ने सूचना को छिपाया। उन्होंने धर्म के नाम पर जमातियों को बहकाया और उनसे कहा था कि कोरोना कोई बीमारी नहीं है बल्कि एक मुस्लिम को दूसरे मुस्लिम से अलग करने की साजिश है। साथ में उन्होंने जमातियों से पैसा ले रखा था, इस कारण मरकज को खाली नहीं कराया गया था।

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