CJP Protest: जंतर-मंतर पर लगे चेहरा पहचानने वाले कैमरे, पुलिस डेटाबेस से लाइव स्कैन; पुलिस ने बताई क्या है वजह
Face Recognition System at Jantar Mantar: जंतर मंतर पर विरोध स्थल के आसपास 4 चेहरा पहचान प्रणाली (एफआरएस) इकाइयां स्थापित की गई हैं। इनका उद्देश्य प्रदर्शन में शामिल होने वाले वांछित अपराधियों, फरार लोगों और हिस्ट्रीशीटरों की पहचान करना है।
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दिल्ली पुलिस ने जंतर मंतर पर चल रहे विरोध प्रदर्शन स्थल पर फेशियल रिकॉग्निशन सिस्टम (एफआरएस) तैनात किया है। इसका उद्देश्य वांछित अपराधियों, भगोड़ों और हिस्ट्रीशीटरों की पहचान करना है। पुलिस सूत्रों ने शुक्रवार को यह जानकारी दी।
प्रदर्शनकारियों के लिए नहीं है एफआरएस सिस्टम
विरोध स्थल के आसपास चार फेशियल रिकॉग्निशन सिस्टम इकाइयां लगाई गई हैं। यह निगरानी प्रणाली सामान्य प्रदर्शनकारियों के लिए नहीं है। इसका उपयोग आपराधिक पृष्ठभूमि वाले व्यक्तियों की पहचान के लिए किया जाएगा। ऐसे लोग विरोध प्रदर्शन में घुसपैठ करने का प्रयास कर सकते हैं।
सीधे दिल्ली पुलिस के डेटाबेस से जुड़ा
उनका मकसद कानून और व्यवस्था को बाधित करना हो सकता है। एफआरएस इकाइयों को प्रदर्शन स्थल के प्रमुख प्रवेश और निकास बिंदुओं पर स्थापित किया गया है। ये इकाइयां सीधे दिल्ली पुलिस के डेटाबेस से जुड़ी हुई हैं। यह तकनीक संदिग्धों की तुरंत पहचान करने में मदद करेगी।
इस वजह से हो रही निगरानी
पुलिस के अनुसार, इस प्रणाली का प्राथमिक लक्ष्य उन लोगों को पकड़ना है जो अपराधों में शामिल रहे हैं। इसमें वांछित अपराधी और भगोड़े शामिल हैं। हिस्ट्रीशीटरों पर भी विशेष नजर रखी जाएगी। यह सुनिश्चित करना है कि प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहे।
स्थापित की गई चार एफआरएस इकाइयां अत्याधुनिक तकनीक से लैस हैं। ये इकाइयां वास्तविक समय में चेहरों को स्कैन कर सकती हैं। स्कैन की गई जानकारी को तुरंत दिल्ली पुलिस के डेटाबेस से मिलाया जाता है। इससे किसी भी संदिग्ध व्यक्ति की पहचान तेजी से हो सकेगी।
फेस बायोमेट्रिक सत्यापन प्रणाली किसी व्यक्ति की पहचान उसके चेहरे की खास बनावट के आधार पर करती है। इसमें आंखों के बीच की दूरी, नाक का आकार और चेहरे की संरचना जैसे बिंदुओं का विश्लेषण किया जाता है।
इन जानकारियों से एक डिजिटल टेम्पलेट तैयार किया जाता है, जिसे पहले से मौजूद डेटा से मिलाया जाता है। इस प्रक्रिया में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) की मदद ली जाती है। वहीं, रियल-टाइम फोटो कैप्चर सिस्टम ऑनलाइन आवेदन या परीक्षा प्रक्रिया के दौरान उम्मीदवार की तुरंत फोटो लेकर फर्जीवाड़े और पहचान बदलने की कोशिशों को रोकता है।