दिल्ली में पेट्रोल पंप बंद, डीटीसी बसों के पहिये थमे, केजरीवाल ने मढ़ा भाजपा पर दोष
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तीन दिन की छुट्टी के बाद आज दिल्लीवालों को भारी परेशानी से जूझना पड़ रहा है। ऑटो और टैक्सी यूनियन की हड़ताल के चलते जहां लोगों को मेट्रो के भरोसे हैं, वहीं पेट्रोल पंप बंद होने के कारण अपने वाहनों को इस्तेमाल करने में कुछ परेशानी जरूर उठानी पड़ रही है।
डीटीसी के कर्मचारियों ने भी विविध मांगों को लेकर धरना-प्रदर्शन की घोषणा की है और कइयों ने छुट्टी पर रहने का निर्णय किया है। इससे सड़कों पर कम बसें उतरेंगी। ऐसे में हड़ताल और प्रदर्शन का सीधा असर दिल्ली की जनता पर पड़ रहा है।
हड़ताल की पूर्व घोषणा के बावजूद लोगों की सुविधा के लिए वैकल्पिक तौर पर कोई इंतजाम नहीं किया गया है। पेट्रोल और डीजल पर वैट कम करने की मांग पर दिल्ली सरकार से कोई जवाब नहीं मिलने पर पेट्रोल पंप मालिकों ने 24 घंटे के लिए पंप बंद करने की घोषणा की है।
दिल्ली में चल रही पेट्रोल पंपों की हड़ताल को दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने बीजेपी प्रायोजित बताया है। केजरीवाल ने अपने ट्वीट में लिखा, भाजपा ने पेट्रोल वालों को धमकी दी है कि जो आज हड़ताल नहीं करेगा, उस पर इंकम टैक्स की रेड कराई जाएगी तेल कंपनियों ने भी धमकी दी है कि जो पेट्रोल पम्प हड़ताल नहीं करेगा, उसके खिलाफ सख्त ऐक्शन होगा भाजपा वाले दिल्ली वालों को तंग करना बंद करें। ये दिन दहाड़े गुंडागर्दी बंद करें।
भाजपा ने पेट्रोल वालों को धमकी दी है कि जो आज हड़ताल नहीं करेगा, उस पर इंकम टैक्स की रेड कराई जाएगी
— Arvind Kejriwal (@ArvindKejriwal) October 22, 2018
तेल कंपनियों ने भी धमकी दी है कि जो पेट्रोल पम्प हड़ताल नहीं करेगा, उसके ख़िलाफ़ सख़्त ऐक्शन होगा
भाजपा वाले दिल्ली वालों को तंग करना बंद करें। ये दिन दहाड़े गुंडागर्दी बंद करें
उन्होंने अगले ट्वीट में लिखा, 'पिछले चार सालों में पेट्रोल पर अनाप शनाप टैक्स मोदी जी ने लगाया है, हमने नहीं लगाया। मोदी जी टैक्स कम करें और जनता को राहत दें। हम माँग करते हैं की पेट्रोल डीज़ल को GST के दायरे में लाया जाए। केंद्र सरकार पेट्रोल डीज़ल को GST में क्यों नहीं ला रही?'
उन्होंने एक ट्वीट करते हुए लिखा, 'पेट्रोल पंप मालिकों ने उन्हें निजी तौर पर बताया है कि यह हड़ताल बीजेपी प्रायोजित है, जिसका पेट्रोल कंपनियां पूरी तरह समर्थन कर रही हैं। यहां तक कि पेट्रोल पंप मालिकों पर यह हड़ताल थोपी जा रही है। जनता बीजेपी को उन्हें परेशानी देकर गंदी राजनीति करने के लिए चुनावों में करारा जवाब देगी।'
Petrol pump owners hv told us privately that this is a BJP sponsored strike, actively supported by oil cos. In fact, BJP has thrust it upon petrol pump owners. People will give BJP a befitting reply in elections for continuously inconveniencing people thro their dirty politics. https://t.co/S8pLZNbIOw
— Arvind Kejriwal (@ArvindKejriwal) October 21, 2018
क्या हैं मांगें
वाहन चालकों को सीएनजी तक के लिए भारी परेशानी हो सकती है। दिल्ली मेट्रो के अधिकारियों की मानें तो अभी तक उन्हें इस बारे में कोई सूचना नहीं मिली है। जबकि डीटीसी बसों के न चलने से सीधा भार मेट्रो पर पड़ेगा। हालांकि मेट्रो अधिकारियों का कहना है कि ऐसी कोई स्थिति देखने को मिलती है तो तत्काल ठोस कदम उठाए जाएंगे।
दिल्ली टैक्सी टूरिस्ट ट्रांसपोर्टर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष संजय सम्राट ने कहा कि हड़ताल में काली-पीली टैक्सी, टूरिस्ट टैक्सी और ओला-उबर कंपनियों के चालक भी शामिल होंगेे। प्रदर्शन में ओला-उबर कंपनियों के खिलाफ भी आवाज उठाई जाएगी, जो चालकों को गुलाम बनाकर काम करवा रही हैं।
ऑटो-टैक्सी चालकों की हड़ताल और चक्का जाम बढ़ाएंगे दिल्ली वासियों की मुसीबत
संयुक्त संघर्ष समिति के संयोजक इंद्रजीत सिंह ने बताया कि इस हड़ताल में सीटू, एटक, इंटक, भारतीय तिपहिया चालक संघ, दिल्ली ऑटो टैक्सी ग्रामीण सेवा चालक यूनियन, दिल्ली ऑटो तिपहिया ड्राइवर्स कांग्रेस, सर्वोदय तिपहिया चालक सोसाइटी, मोती नगर ऑटो रिक्शा चालक यूनियन, कार्यशील ऑटो टैक्सी वेलफेयर एसोसिएशन और दिल्ली पब्लिक ट्रांसपोर्ट यूनियन, उत्तर-प्रदेश ट्रैवल ऑपरेटर एसोसिएशन, राजधानी परिवहन पंचायत, ऑल इंडिया टूर एंड ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन, राजधानी टूरिस्ट ड्राइवर यूनियन, भारतीय ड्राइवर एकता यूनियन, जयपुर वाहन चालक सेवा संस्था ज्वाइंट कॉउंसिल ऑफ लग्जरी टैक्सी, एसोसिएशन समेत अन्य यूनियनें शामिल हो रही हैं।
ये हैं मांगें
उन्होंने कहा उनकी मांगे है कि दिल्ली में एक फिटनेस पिट केन्द्र बनाया जाए जहां सभी उचित व्यवस्था हो, पूछो एप को तुरंत सक्रिय रूप से चालू किया जाए। चार सालों से निलंबित ऑटो वेलफेयर बोर्ड का गठन तत्काल स्तर पर किया जाए। उपराज्यपाल के राजपत्र के अनुसार किराया एसी और नॉन एसी टैक्सी चालकों को दिया जाए व सार्वजनिक किया जाए। सरकार द्वारा तय न्यूनतम किराया चालकों को मिले, ओला-उबर एग्रीगेटर एप कंपनियों का एप्लिकेशन सरकार से प्रमाणित हो।
ओला-उबर लीजिंग के नाम पर कंपनी भमासूम चालकों को लूटना बंद करें, लीज की गाडिय़ां चालकों के नाम करें। ड्राइवर की सुरक्षा की जिम्मेदारी और सरकार लें, यात्रियों का केवाईसी करवाएं। स्पीड गर्वनर सरकार या गाड़ियों की कंपिनयां लगवा कर दें। ओला कंपनी द्वारा 200 किमी प्रतिदिन की सीमा हटाई जाए, जुर्माना वापस किया जाए। दिल्ली नम्बर के माल वाहनों पर ग्रीन टैक्स के नाम पर लूट बंद की जाए। एप बेस्ड कंपनियों की कमीशन सरकार द्वारा अधिकतम 5 प्रतिशत तय की जाए। पेट्रोल-डीजल औरसीएनजी की बढ़ती कीमतों को कम किया जाए।
अपनी मांगों को लेकर चालक राजघाट पर एकत्रित होंगे और उसके बाद पीएम निवासी की ओर बढ़ेंगे। इस बीच सड़कों पर चक्का जाम करके अपनी मांगों को सरकार के सामने रखा जाएगा। अगर उनकी मांगे पूरी नहीं हुई तो प्रदर्शनकारी शांतिपूर्ण ढंग से जेल भरेंगे लेकिन विरोध समाप्त नहीं करेंगे।
पंप मालिकों को हो रहा नुकसान
सरकार के रवैये से पर्यावरण को भी नुकसान
सिंघानिया ने कहा कि दिल्ली सरकार का सख्त रवैया पर्यावरण पर भी भारी पड़ रहा है। चूंकि दिल्ली से सटे गुरुग्राम, नोएडा, ग्रेटर नोएडा, फरीदाबाद जैसे शहरों में यूरो 4 गुणवत्ता का पेट्रोल और डीजल बिक रहा है। जबकि दिल्ली में प्रदूषण को देखते हुए यूरो 6 ही बिक्री के लिए मान्य है। ऐसे में दिल्ली में करीब 80 फीसदी वाहनों में इन दिनों यूरो 4 गुणवत्ता वाला तेल इस्तेमाल हो रहा है। इससे हवा में प्रदूषण का स्तर भी बढ़ रहा है।