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दिलवालों की दिल्ली में पेटू के साथ फैटी लिवर भी खूब, ये है बीमारी की वजह

Wed, 31 Jul 2019 05:31 PM IST
पूजा त्रिपाठी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: पूजा त्रिपाठी Updated Wed, 31 Jul 2019 05:31 PM IST
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delhi people suffering from fatty liver this disease is serious
डेमो - फोटो : डेमो

फैटी लिवर को लेकर एम्स के डॉक्टर काफी चिंतित हैं। यूं तो दिल्ली को दिल वालों का शहर कहा जाता है, लेकिन इसी शहर के लोग मोटापे के साथ साथ फैटी लिवर की चपेट में भी हैं। स्थिति यह है कि देश के सबसे बड़े चिकित्सीय संस्थान एम्स में फैटी लिवर के आएदिन काफी केस सामने आ रहे हैं।

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मंगलवार को एम्स के वरिष्ठ डॉ. अनूप सराय ने बताया कि हेपेटाइटिस के अलावा फैटी लिवर काफी बड़े स्तर पर देखने को मिल रहा है। जबकि ये नियंत्रण मेंलाया जा सकता है। शराब का सेवन न करने वालों में ये परेशानी देखने को मिल रही है।
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उन्होंने एम्स के ही एक शोध का हवाला देते हुए बताया कि उनके यहां गंभीर स्थिति में मरीज भर्ती होते हैं। लिवर की क्रोनिक बीमारी से ग्रस्त होने के कारण 70 फीसदी मरीजों की एम्स में मौत हो जा रही है।

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गैस्ट्रो विभागाध्यक्ष डॉ. सराय का कहना है कि सरकार हेपेटाइटिस को लेकर टीकाकरण पर जोर देती है, लेकिन इसी टीकाकरण का निर्माण सरकारी संस्थाओं के जरिए कराना चाहिए। ताकि हरेक सरकारी अस्पताल को ये उपलब्ध हो सके।

उन्होंने वर्ष 2015 के दौरान आई एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए बताया कि देश में करीब 70 फीसदी गर्भवती महिलाओं की प्रसूति अस्पतालों में होती है, लेकिन यहां जन्म लेने वाले शिशुओं में केवल 45 फीसदी को ही टीकाकरण उपलब्ध हो पाता है। जबकि हेपेटाइटिस मां से शिशु में आने कीसंभावना अत्यधिक है।

उन्होंने बताया कि लिवर के मरीजों के लिए शराब पीने के परिणाम हेपेटाइटिस बी और ई वायरस से भी खतरनाक होते हैं। उन्हें शरीर में संक्रमण फेल जाता है और धीरे-धीरे कई अंग काम करना बंद कर देते हैं।

इस दौरान विभाग के ही डॉ. शालीमार बताते हैं कि जेनेरिक दवाओं को लेकर भारत को काफी अच्छा अवसर मिला है। दुनिया भर में सर्वाधिक जेनेरिक दवाएं तैयार करने वाले हमारे देश में उपचार भी सस्ता है। जबकि अमेरिका जैसे देशों में काफी महंगा उपचार पड़ता है। 

इस दौरान एम्स के निदेशक डॉ. रणदीप गुलेरिया ने हेपेटाइटिस के बढ़ते दायरे को लेकर चिंता व्यक्त करते हुए इसे लेकर न सिर्फ जागरुकता बल्कि समय समय पर विभिन्न कार्यक्रम आयोजित करने का पक्ष भी लिया, जिनसे लोगों को बीमारी के प्रति सतर्क किया जा सके।

उन्होंने बताया कि वर्तमान में आधुनिक जीवनशैली हर किसी की दुश्मन बन गई है जिसका परिणाम ही है फैटी लिवर। उन्होंने लोगों से अपील की है कि दिन में कम से कम 45 मिनट का व्यायाम जरूर करना चाहिए। ऐसा करने से काफी हद तक अपनी बिगड़ती जीवनशैली पर नियंत्रण पाया जा सकता है।

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