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चमत्कार है ये!: 15 मिनट तक साबुन के पानी से भरे वॉशिंग मशीन में गिरकर पड़ा रहा मासूम, डॉक्टरों ने ऐसे बचाया

Wed, 15 Feb 2023 01:35 PM IST
पूजा त्रिपाठी अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Published by: पूजा त्रिपाठी Updated Wed, 15 Feb 2023 01:35 PM IST
सार

ये खबर है एक डेढ़ साल के बच्चे की जो साबुन के पानी से भरे वॉशिंग मशीन में गिर गया और लगभग 15 मिनट तक वहां पड़ा रहा। इसके बाद वह सात दिन कोमा और वेंटिलेटर में रहा, फिर 12 दिन वार्ड में रहने के बाद अब वह घर जा चुका है।

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Delhi one and half year baby falls in soap water filled washing maching rescued after 15 minutes save by docs
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

देश की राजधानी दिल्ली से एक ऐसी खबर सामने आई है जो एक बार फिर इस बात पर भरोसा दिलाता है कि जिसकी रक्षा खुद भगवान करें उसे कुछ नहीं हो सकता। ऐसा ही एक मामला है डेढ़ साल के बच्चे का, जिसका इलाज वसंत कुंज के फोर्टिस अस्पताल में हुआ और उसकी जान बचना किसी चमत्कार से कम था।
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ये खबर है एक डेढ़ साल के बच्चे की जो साबुन के पानी से भरे वॉशिंग मशीन में गिर गया और लगभग 15 मिनट तक वहां पड़ा रहा। इसके बाद वह सात दिन कोमा और वेंटिलेटर में रहा, फिर 12 दिन वार्ड में रहने के बाद अब वह घर जा चुका है। अब बच्चा सही तरह से व्यवहार कर रहा है और ठीक से चल भी पा रहा है।
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अस्पताल पहुंचने तक नीला पड़ चुका था बच्चा

बच्चे का इलाज करने वाले डॉक्टरों ने बताया कि जब उसे लाया गया तो वह बेहोश था, ठंडा पड़ चुका था और सांस लेने में भी तकलीफ थी। यही नहीं उसका शरीर नीला पड़ गया था, दिल की धड़कने धीमी थीं और कोई बीपी या पल्स नहीं थी।
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कुर्सी लगाकर मशीन पर चढ़ा था बच्चा

मां के अनुसार बच्चा टॉप लोडिंग वॉशिंग मशीन में साबुन वाले पानी में लगभग 15 मिनट तक रहा और तब तक मशीन का ढक्कन खुला था। बच्चे के गिरने से कुछ मिनट पहले ही मां कमरे से बाहर गई थी और जब वह लौटी तो बच्चा कहीं नहीं मिला। बच्चा कुर्सी लगाकर मशीन पर चढ़ा था और शायद फिर उसमें गिर गया। बच्चे का इलाज करने वाले डॉक्टर बताते हैं कि बच्चा शायद 15 मिनट से कम समय तक मशीन में रहा होगा वरना वो जिंदा नहीं बच पाता।

कई अंगों ने काम करना बंद कर दिया था

बाल रोग विशेषज्ञ डॉक्टर हिमांशी जोशी ने बताया कि जब बच्चे को अस्पताल लाया गया तो वह बहुत बुरी हालत में था। साबुन के पानी की वजह से उसके कई अंग काम करना बंद कर चुके थे और कई बुरी तरह से काम कर रहे थे। उसे केमिकल निमोनिया भी हो गया था जिसमें फेफड़ों में जलन होती है या सांस लेने में तकलीफ होती है। इससे उसे बैक्टीरियल नीमोनिया भी हो गया। इसके बाद उसे गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल इंफेक्शन भी हो गया था।

बच्चे के इलाज के लिए जरूरी एंटीबायोटिक और फ्लूड सपोर्ट दिया गया जिससे उसकी हालत में धीरे-धीरे सुधार होने लगा। धीरे-धीरे वह अपनी मां को पहचानने लगा फिर उसका वेंटिलेटर हटा दिया गया। वह बच्चों के आईसीयू में सात दिन तक रहा फिर उसे वार्ड में शिफ्ट किया गया जहां वह 12 दिन रहा। बच्चे के दिमाग सीटी स्कैन भी कराया गया जिसमें फिलहाल कोई क्षति नहीं मिली है। बच्चे का इलाज अभी चल रहा है।
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