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Hindi News ›   Delhi ›   Delhi NCR News ›   Delhi News Two lakh rupees fine on daughter-in-law for implicating her in-laws in a false case

Delhi: ससुराल पक्ष को झूठे मामले में फंसाया, बहू पर दो लाख रुपये जुर्माना

Tue, 19 Jul 2022 06:12 AM IST
विजय पुंडीर अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Published by: विजय पुंडीर Updated Tue, 19 Jul 2022 06:12 AM IST
सार

अदालत ने इस मामले में सास, देवर, देवरानी व उसके बेटे की याचिका को स्वीकार करते हुए माना कि महिला द्वारा ससुराल पक्ष पर झूठे आरोपों की वजह से परिवार ऐसे हालातों से गुजरा जोकि वास्तविकता में पीड़ादायक थे।

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Delhi News Two lakh rupees fine on daughter-in-law for implicating her in-laws in a false case
सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

अदालत ने सास, देवर और परिवार के अन्य सदस्यों पर घरेलू हिंसा व छेड़खानी का झूठा आरोप लगाने पर बहू पर दो लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। यह जुर्माना रकम ससुराल वालों को बतौर मुआवजा दी जाएगी।

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द्वारका स्थित अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सचिन जैन ने इस मामले में सास, देवर, देवरानी व उसके बेटे की याचिका को स्वीकार करते हुए माना कि महिला द्वारा ससुराल पक्ष पर झूठे आरोपों की वजह से इस परिवार को लम्बी कानूनी लड़ाई लड़नी पड़ी। इन झूठे आरोपों की वजह से परिवार ऐसे हालातों से गुजरा जोकि वास्तविकता में पीड़ादायक थे। परिवार पर समय अंतराल पर ऐसे आरोप लगाए गए जो बेबुनियाद ही नहीं थे। लेकिन कानूनन उन्हें सुनना जरूरी था।

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मामले में ससुराल पक्ष ने बताया कि उनके घर के बड़े बेटे का विवाह वर्ष 1997 में हुआ था। विवाह के बाद 2001 में बहू अपने पति और बच्चों के साथ मायके में रहने लगी। ऐसे में महिला की सास ने बेटे-बहू को संपति से बेदखल कर दिया। इसके बाद महिला ने सास की संपत्ति पर हक जताते हुए मई 2009 में द्वारका अदालत में मुकदमा दायर कर दिया। इसके अलावा जुलाई 2009 में सास, देवर, देवरानी और उनके बेटे पर घरेलू हिंसा का केस दायर किया। इन दोनों मामलों में अदालत ने आरोपों को बेबुनियाद माना।

इसी प्रकार संपत्ति विवाद का मामला जुलाई 2010 में खारिज कर दिया गया। इसके अलावा अदालत ने 13 साल से अलग रहने के आधार पर घरेलू हिंसा का मुकदमा दिसंबर 2012 को खारिज कर दिया गया। 2015 में महिला के पति की मौत हो गई थी।

इसी दौरान महिला की सास कैंसर की बीमारी से पीड़ित हो गई है, जबकि देवरानी बेमतलब के मुकदमेबाजी की वजह से मानसिक रुप से बीमार रहने लगी। अदालत ने माना कि बगैर कसूर रोज-रोज पुलिस और कचहरी के चक्कर किसी को भी मानसिक रोगी बना सकते हैं। अदालत ने हर्जाना रकम का बंटवारा करते हुए निर्देश दिए कि मुआवजा देने वाली महिला की सास और देवरानी को 70-70 हजार रुपये मुआवजे के तौर पर दिए जाएंगे। देवर और उसके बेटे को 30-30 हजार रुपये बतौर हर्जाना मिलेंगे।

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