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Delhi: मुन्ना भाई शिक्षकों पर कसा शिकंजा, शिक्षा निदेशालय ने एफआईआर दर्ज करने के दिए निर्देश
Tue, 09 Aug 2022 10:46 AM IST
विजय पुंडीर
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
Published by: विजय पुंडीर
Updated Tue, 09 Aug 2022 10:46 AM IST
सार
शिक्षा निदेशक की ओर से नॉर्थ वेस्ट(ए) व साउथ वेस्ट(ए) में पढ़ा रहे इन फर्जी शिक्षकों पर प्राथमिकी दर्ज कराने के लिए कहा गया है। बताया जा रहा है कि जल्द ही अन्य जिलों के अधिकारियों को भी प्राथमिकी दर्ज कराने के लिए निर्देश भेजे जाएंगे।
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : पेक्सेल्स
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विस्तार
सरकारी स्कूलों में बायोमेट्रिक जांच में पकड़े गए 72 मुन्ना भाई शिक्षकों पर दिल्ली सरकार ने अपना शिकंजा कसा है। दिल्ली सरकार के शिक्षा निदेशालय ने इन शिक्षकों पर एफएआईआर दर्ज कराने के निर्देश दिए हैं। इसके लिए जिलावार संबंधित शिक्षा अधिकारियों को जानकारी भेजी जा रही है। कोविड महामारी के कारण इनकी बॉयोमेट्रिक सत्यापन नहीं हो सका था, इस कारण से बीते तीन साल से यह स्कूलों में पढ़ा रहे थे।
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शिक्षा निदेशक की ओर से नॉर्थ वेस्ट(ए) व साउथ वेस्ट(ए) में पढ़ा रहे इन फर्जी शिक्षकों पर प्राथमिकी दर्ज कराने के लिए कहा गया है। बताया जा रहा है कि जल्द ही अन्य जिलों के अधिकारियों को भी प्राथमिकी दर्ज कराने के लिए निर्देश भेजे जाएंगे। दरअसल यह 72 फर्जी शिक्षक अलग-अलग जिले से हैं। निर्देशों में निदेशक ने इन कर्मचारियों के विरुद्ध संबंधित थाने में सीपीआरसी की धाराओं के अनुसार प्राथमिकी दर्ज कराने का निर्देश दिया है।
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शिक्षा निदेशालय ने बायोमेट्रिक जांच में 72 मुन्ना भाई शिक्षकों को पकड़ा था। बायोमेट्रिक और फोटोग्राफ का मिलान ना होने के कारण निदेशालय ने बीते सप्ताह इन्हें नौकरी से निकालने का नोटिस दिया था। जांच में पता चला था कि डीएसएसएसबी में पेपर किसी और ने दिया जबकि तीन साल से नौकरी कोई और कर रहा था। बॉयोमेट्रिक मिलान ना होने के कारण यह मामला सामने आया है।
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दिल्ली अधीनस्थ सेवा चयन बोर्ड(डीएसएसएसबी) ने स्कूलों में शिक्षकों के रिक्त पदों को भरने के लिए वर्ष 2018 में परीक्षा ली थी। चयनित शिक्षकों को 2019 में नियुक्ति देकर स्कूल आवंटित कर दिए गए थे। कोविड महामारी के कारण उस समय इनकी बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन नहीं हो सकी। यह बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन और फोटोग्राफ वेरिफिकेशन 22 फरवरी से 06 अप्रैल 2021 तक किया गया। इसकेबाद ही रिपोर्ट डीएसएसएसबी ने निदेशालय को भेजी। कोविड से पहले बोयोमेट्रिक वेरिफिकेशन दस्तावेजों के वेरिफिकेशन के समय ही होता था।