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रीजनल रैपिड ट्रांजिट दिल्ली की जरूरत, सुप्रीम कोर्ट ने दी राजनीति रवैया न अपनाने की सलाह
Sat, 19 Jan 2019 05:31 AM IST
Vikas Kumar
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Vikas Kumar
Updated Sat, 19 Jan 2019 05:31 AM IST
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supreme court
- फोटो : PTI
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सुप्रीम कोर्ट ने रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम (आरआटीएस) को दिल्ली की जरूरत बताते हुए कहा कि दिल्ली सरकार को इस मामले में राजनीतिक रवैया नहीं अपनाने की सलाह दी है। शीर्ष अदालत ने कहा कि दिल्ली को ऐसे हाल पर नहीं छोड़ा जा सकता। मालूम हो कि दिल्ली में ट्रैफिक की समस्या से निजात पाने के लिए दिल्ली-मेरठ, दिल्ली-पानीपत और दिल्ली-अलवर कॉरिडोर केलिए आरआरटीएस की योजना है। फिलहाल दिल्ली-मेरठ कॉरिडोर को शुरू करने पर विचार चल रहा है।
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न्यायमूर्ति अरूण मिश्रा और न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता की पीठ ने कहा कि आरआरटीएस योजना दिल्ली केलिए जरूरी है, जिससे कि दिल्ली में ट्रैफिक की समस्या कुछ हद तक सुलझाई जा सके। साथ ही यह दिल्ली में बढ़ते प्रदूषण केलिए भी यह जरूरी है।
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पीठ को जानकारी दी गई कि दिल्ली-मेरठ कॉरिडर की अनुमानित लागत 31, 902 करोड़ रुपये है और दिल्ली सरकार के लिए 1130 करोड़ रुपये देना है। केंद्र सरकार अपना शेयर देने केलिए तैयार है लेकिन दिल्ली सरकार फंड देने केलिए तैयार नहीं है। पीठ को बताया गया कि दिल्ली सरकार फंड का रोना रो रही है और वह चाहती है कि केंद्र सरकार इसकेलिए फंड दे।
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अमाइकस क्यूरी वकील अपराजिता सिंह ने पीठ को बताया कि यह योजना रुकी पड़ी है क्योंकि दिल्ली सरकार चाहती है कि उसका हिस्सा भी केंद्र सरकार ही दे। ट्रैफिक की समस्या से जूझ रही दिल्ली केलिए आरआरटीएस जरूरी है लेकिन दिल्ली सरकार इस समस्या को सुलझाने केलिए कोई प्रयास करती दिखाई नहीं दे रही है।
दिल्ली सरकार की ओर से पेश वकील ने पीठ से कहा कि उसकेपास फंड की समस्या है। जवाब में पीठ ने कहा, 'यह परियोजना दिल्ली सरकार की इनायत का मोहताज नहीं है। यह दिल्ली की जरूरत है। आप इस तरह से नहीं कर सकते। यह आपकी ड्यूटी है।’ पीठ ने यह भी कहा कि बजटीय आवंटन इस परियोजना के आड़े नहीं आना चाहिए। इससे जीने का अधिकार भी प्रभावित होता है।
दिल्ली सरकार के वकील ने कहा कि दिल्ली-मेरठ कॉरिडर केसंशोधित अलाइंमेंट उसे स्वीकार नहीं है। वास्तव में सराय काले खां केपास बनने वाले स्टेशन को अंडरग्राउंड से एलिवेटेड बनाने के प्रस्ताव से दिल्ली सरकार सहमत नहीं है।
इस पर पीठ ने वकील से कहा, 'अलाइंमेंट कैसा होना चाहिए यह हमारा या आपका काम नहीं है। यह तय करना विशेषज्ञों का काम है। साथ ही पीठ ने यह भी सरकार को ऐसे मामले में राजनीतिक रवैया नहीं अपनाना चाहिए।' पीठ ने इपका को तमाम शेयरहोल्डर केसाथ इस मसले पर एक हफ्ते के भीतर बैठक कर मामले को सुलझाने केलिए कहा है। अगली सुनवाई एक फरवरी को होगी।