सांस के बाद आंख हो रही खराब: आंखों में चुभ रहा दिल्ली-एनसीआर का प्रदूषण, डॉक्टर बोले- बचाव के दो ही तरीके
डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल के नेत्र विभाग में राष्ट्रीय परिवार सुरक्षा गार्ड (एनएफएसजी) की मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) डॉ. शिखा जैन ने कहा कि अस्पताल में ऐसे मरीजों की संख्या करीब 25 फीसदी तक बढ़ गई है।
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दिल्ली-एनसीआर में बढ़ता प्रदूषण आंखों में चुभ रहा है। सबसे ज्यादा परेशानी दोपहिया वाहन चालकों को हो रही है। सुबह और शाम के समय वातावरण में प्रदूषण कण की मात्रा काफी अधिक होती है, ऐसे में यदि प्रदूषक कण आंखों में चले जाते हैं तो तुरंत आंख बंद हो जाती है, जिस कारण सड़क पर दुर्घटना होने की आशंका बढ़ जाती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि दिल्ली के अस्पतालों में ऐसे मरीजों की संख्या बढ़ गई है। इन मरीजों की आंखों में लाल पन, आंखों से पानी आना, जलन महसूस होना सहित दूसरी परेशानी हो रही है। अस्पताल में पहुंचे मरीजों की जांच के दौरान कुछ कण भी दिखाई देते हैं। डॉक्टरों का कहना है कि वातारण में घूमने वाले पीएम 10 और पीएम 2.5 कण में कई प्रदूषक तत्व होते हैं जो आंखों में जाते ही कई तरह आंखों में दर्द कर देते हैं। इसके अलावा कई बाद आंख अचानक बंद हो जाती है। ऐसे में सड़क पर वाहन चलाते समय दोपहिया वाहन चालकों के साथ दुर्घटना हो सकता है।
डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल के नेत्र विभाग में राष्ट्रीय परिवार सुरक्षा गार्ड (एनएफएसजी) की मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) डॉ. शिखा जैन ने कहा कि अस्पताल में ऐसे मरीजों की संख्या करीब 25 फीसदी तक बढ़ गई है। मरीज आंखों में लाल पन, दर्द, पानी आने सहित दूसरे शिकायत लेकर पहुंच रहे हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे लोगों को सलाह दी जाती है कि सुबह और शाम के समय बाहर जाने से बचें। यदि बाइक चलाते हैं तो चेहरे को कवर करते हुए हेलमेट पहने। जरूरत के आधार पर चश्में का प्रयोग करें। इनकी मदद से प्रदूषक कण आंखों में प्रवेश नहीं कर पाएंगे।
दिल्ली-एनसीआर में 50 लाख से ज्यादा दोपहिया वाहन
दिल्ली परिवहन विभाग के आंकड़ों के अनुसार दिल्ली में 80 लाख से ज्यादा वाहन पंजीकृत हैं। इनमें आधे दोपहिया वाहन हैं। इसके अलावा दूसरे राज्यों के भी काफी संख्या में दोपहिया वाहन है। वहीं एनसीआर में भी 10 लाख से अधिक दोपहिया वाहन हैं। एक अनुमान है इनमें से आधे से ज्यादा दोपहिया वाहन रोजाना सड़क पर निकलते हैं। इनमें अधिकतर वाहन सुबह और शाम के समय सड़क पर रहते हैं। इस दौरान प्रदूषण का स्तर काफी निचले स्तर पर होता है। इनमें प्रदूषक कण भी काफी अधिक होता है जो आंखों के लिए हानिकारक हो सकते हैं।
प्रदूषण के साथ बढ़ रहे हैं सांस के मरीज
दिल्ली में प्रदूषण का स्तर बढ़ने के साथ सांस के मरीज बढ़ गए हैं। डॉक्टरों का कहना है कि ओपीडी में ऐेसे मरीजों की संख्या 25 से 30 फीसदी तक बढ़ गई है। इनमें ऐसे मरीज शामिल हैं जिन्हें पहले कभी सांस की परेशानी नहीं रही थी।