MCD बजट की जमीनी हकीकत: शिक्षा-खेल से जुड़े कई मदों से एक रुपया भी खर्च नहीं, डाल दी गई फिर वही पुरानी राशि
एमसीडी ने छात्रवृत्ति, किताबें, वर्दी, खेल सुविधाएं, फर्नीचर समेत करीब तीन दर्जन मदों में करोड़ों का प्रावधान किया, लेकिन पूरा साल बीतने पर भी एक पैसा खर्च नहीं हुआ। संशोधित बजट में राशि शून्य की गई, फिर अगले साल के बजट में वही पुरानी राशि दोबारा डाल दी गई।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
एमसीडी में शिक्षा और खेल से जुड़े बजटीय प्रावधानों की वास्तविक स्थिति चौंकाने वाली है। पिछले वर्ष निगम ने विद्यार्थियों की छात्रवृत्ति से लेकर स्कूलों में बुनियादी ढांचे, स्वास्थ्य रिकॉर्ड, खेल सुविधाओं और सांस्कृतिक गतिविधियों तक लगभग तीन दर्जन मदों में करोड़ों रुपये का प्रावधान किया। इन मदों के तहत बच्चों को बेहतर सुविधा देना, खेल प्रतिभाओं को बढ़ावा देना और विद्यालयों का समग्र विकास सुनिश्चित करना था, लेकिन वित्तीय वर्ष के समाप्त होने से ठीक पहले यह तथ्य सामने आया है कि इन मदों में से किसी में भी एक रुपये तक का व्यय नहीं किया गया।
एमसीडी के आयुक्त की ओर से दो दिन पहले वर्तमान वर्ष के संशोधित और आगामी वर्ष के प्रस्तावित बजट में शिक्षा व खेलों से जुड़े उन सभी मदों की राशि शून्य कर दी है, जिनके लिए पिछले वर्ष लाखों-करोड़ों का प्रावधान किया गया था और हैरानी की बात यह है कि आगामी वित्तीय वर्ष के बजट में फिर से वही पुरानी राशि डाल दी गई है, मानो पिछले साल का अनुभव और खर्च न होने का कारण कोई मुद्दा ही न रहा हो।
पिछले वर्ष इस वर्ष के बजट में स्कूलों और विद्यार्थियों से जुड़े जिन प्रमुख मदों में राशि निर्धारित की थी। इसके तहत विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति मद में 50 लाख रुपये, छात्राओं के लिए विशेष छात्रवृत्ति मद में एक करोड़ रुपये, स्कूलों में घास व पौधे लगाने के मद में 10 लाख रुपये, स्कूल बैंड मद में सात लाख रुपये, कक्षा एक से तीन तक के छात्रों के लिए बैग मद में चार लाख रुपये, गरीब बच्चों के लिए मुफ्त किताबें मद में 50 लाख रुपये, अध्ययन यात्रा व भ्रमण मद में 20 लाख रुपये, बच्चों को वर्दी वितरण मद में 50 लाख रुपये, पांचवीं कक्षा की सामान्य परीक्षा मद में चार लाख रुपये, जरूरतमंद बच्चों के लिए चश्मा मद में 10 लाख रुपये, स्कूलों में जल संचय मद में 30 लाख रुपये, मेधावी विद्यार्थियों के लिए छात्रवृत्ति मद में 10 लाख रुपये थे।
स्कूल डायरी मद में 50 लाख रुपये, छात्रों के स्वास्थ्य रिकॉर्ड का रखरखाव मद में 50 लाख रुपये, खेल केंद्रों में सुधार व उपकरण मद में 20 लाख रुपये, बाल दिवस, बसंत मेला व अन्य उत्सव मद में 10 लाख रुपये, खेल व शारीरिक प्रतियोगिताएं मद में 10 लाख रुपये का प्रावधान किया था, लेकिन एक रुपया भी खर्च नहीं किया गया और अगले साल के बजट में इन मदों में इतनी ही राशि का प्रावधान किया गया है। इसके अलावा छात्रों के लिए डेस्क और फर्नीचर मद में एक करोड़ रुपये तय किए थे, जिसे संशोधित बजट में शून्य किया गया, जबकि अगले वर्ष फिर 50 लाख का प्रावधान कर दिया।
शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि यदि इन मदों पर वास्तविक खर्च होता, तो एमसीडी स्कूलों की तस्वीर में बड़ा बदलाव दिखता। लेकिन बजट मात्र घोषणा बनकर रह गया। यदि एमसीडी ने अगले वित्त वर्ष में फिर से वही राशि डाल दी है, तो यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या इस बार सभी विभाग समय पर टेंडर निकाल पाएंगे? क्या लक्षित व्यय को सुनिश्चित करने के लिए मॉनिटरिंग मैकेनिज्म तैयार होगा? क्या बच्चों के लिए बनी योजनाओं को घोषणा से कार्यान्वयन तक लाया जाएगा?
खेल मदों से खर्च करने में ऐसा ही हाल है। खेल केंद्रों पर सुविधाएं मद में पांच लाख रुपये, खेल व सांस्कृतिक गतिविधिया मद में 10 लाख रुपये का प्रावधान किया गया, लेकिन खर्च नहीं किया और इन मदों में फिर राशि का प्रावधान किया गया है। खेल अकादमी और स्टेडियम निर्माण मद में इस साल राशि पांच लाख से बढ़ाकर 15 लाख रुपये कर दी है, लेकिन अगले वर्ष शून्य कर दिया गया।