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सुबह-शाम प्रदूषण और जाम...दिल्ली अब रहने लायक नहीं: जस्टिस मिश्रा
Sat, 19 Jan 2019 05:00 AM IST
Vikas Kumar
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Vikas Kumar
Updated Sat, 19 Jan 2019 05:00 AM IST
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जस्टिस अरूण मिश्रा
- फोटो : india today
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दिल्ली में प्रदूषण व ट्रैफिक समस्या इतनी विकराल हो चुकी है कि आम आदमी ही नहीं, सुप्रीम कोर्ट के जज भी इससे बुरी तरह आहत हैं। सुप्रीम कोर्ट के पांचवे वरिष्ठतम जज जस्टिस अरूण मिश्रा ने शुक्रवार को कहा कि वह दिल्ली में बसना नहीं चाहते। दिल्ली रहने लायक नीं है। पहले दिल्ली से उनका आकर्षण था लेकिन अब नहीं है।
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दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूण मामले की सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति अरूण मिश्रा और न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता की पीठ ने कहा कि दिल्ली गैंस चैंबर बन गई है। यहां की स्थिति खराब हो गई है। न्यायमूर्ति मिश्रा ने कहा कि दिल्ली आने से पहले दिल्ली को लेकर काफी आकर्षण था लेकिन अब नहीं रहा। उन्होंने कहा कि वह सेवानिवृत्ति के बाद वह दिल्ली में नहीं बसना चाहते। वहीं, दिल्ली की ट्रैफिक से भी नाराज जस्टिस मिश्रा ने कहा, 'आज भी वह ट्रैफिक में फंस गए और बामुश्किल वह सुप्रीम कोर्ट में दो जजों के शपथ-ग्रहण समारोह में वक्त पर पहुंच सके।’
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सनद रहे कि न्यायमूर्ति अरूण मिश्रा पहली बार दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण का मसला सुन रहे थे। इससे पहले न्यायमूर्ति मदन बी लोकुर की अध्यक्षता वाली पीठ इस मामले की सुनवाई कर ही थी। न्यायमूर्ति लोकुर के सेवानिवृत्त होने के बाद अब इस मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति मिश्रा की अध्यक्षता वाली पीठ कर रही है।
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वास्तव में सुनवाई के दौरान पीठ दिल्ली के यातायात समस्या से निदान के लिए प्रस्तावित रिजनल रैपिड टांजिट सिस्टम (आरआरटीसी) के मसले पर सुनवाई कर रही थी। पीठ को जानकारी दी गई कि इसके लिए केंद्र सरकार, यूपी सरकार सहित अन्य राज्य अपना शेयर देने केलिए तैयार है लेकिन दिल्ली सरकार अभी तक तैयार नहीं है। दिल्ली सरकार फंड का रोना रो रही है। अमाइकस क्यूरी अपराजिता सिंह ने कहा कि यह महज 1000 करोड़ रुपये की बात है लेकिन दिल्ली सरकार अब तक निर्णय नहीं ले सकी है।
इस पर पीठ ने कहा कि आरआरटीसी दिल्ली की जरूरत है। दिल्ली को ऐसे हाल पर नहीं छोड़ा जा सकता। पीठ ने कहा कि दिल्ली में प्रदूषण और ट्रैफिक की समस्या गंभीर है, ऐसे में सरकार को इस तरह का रवैया रखने की इजाजत नहीं दे सकते। पीठ ने यह भी कहा कि सरकार इन मामलों में राजनीति रवैया न रखे।