G20 से दिल्ली को क्या मिला?: एशियाड व कॉमनवेल्थ गेम्स में बुनियादी ढांचा हुआ बेहतर, जी-20 ने बढ़ाई खूबसूरती
G20: जी-20 की ही बात करें तो इस पर करीब 4,064 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। देश की सौम्य ताकत बयां करता भारत मंडपम ही 2,700 करोड़ रुपये से तैयार हुआ है। 920 करोड़ रुपये की लागत से प्रगति मैदान टनल बनी है।
विस्तार
एशियाड से लेकर जी-20 सम्मेलन तक बड़े आयोजनों से दिल्ली ने वैश्विक शहर बनने की दिशा में छलांग लगाई है। हर अंतरराष्ट्रीय आयोजन के कारण राजधानी का बुनियादी ढांचा बेहतर हुआ है। एशियाड व कॉमनवेल्थ गेम्स में सड़कों और फ्लाईओवर का जाल बिछा तो जी-20 ने शहर की खूबसूरती बढ़ा दी। विशेषज्ञों का मानना है कि बुनियादी ढांचे से जुड़ी एजेंसियां अगर ठीक से रखरखाव करने में कामयाब रहीं तो इसका फायदा लंबे समय तक दिल्ली को मिलेगा।
नई दिल्ली क्षेत्र में विकास की तेज बयार पहली बार 1982 के एशियाड गेम्स के दौरान बही थी। कॉमनवेल्थ गेम्स ने पूर्वी दिल्ली इलाके को चकाचक कर दिया था। तत्कालीन सरकार ने एक के बाद एक फ्लाइओवर का जाल बिछाया था। इससे आवाजाही बेहतर हुई थी। जी-20 ने भी दिल्ली के आधारभूत ढांचे समेत लुटियन दिल्ली को बड़े पैमाने पर सजाया-संवारा है। आज यह इलाका दुनिया के बड़े शहरों को खूबसूरती में टक्कर दे रहा है। उपराज्यपाल वीके सक्सेना ने इसे स्वीकार करते हुए कहा है कि अब दूसरे इलाकों को सुंदर बनाया जाएगा। कोशिश यही रहेगी कि एक हफ्ते के शार्ट नोटिस पर शहर को किसी भी तरह के वैश्विक आयोजन के लिए तैयार कर लिया जाए।
वहीं, डीडीए के टाउन प्लानर रहे एके जैन ने बताया कि इस तरह के आयोजनों पर बुनियादी ढांचे के हर पहलू पर बड़ी बारीकी से काम होता है। इसमें बिजली, पानी, सड़क, ट्रैफिक, परिवहन, सुरक्षा समेत दूसरी सभी सुविधाओं पर ध्यान दिया जाता है। दिलचस्प यह कि इसमें किसी तरह की कोताही नहीं बरती जाती। तय शेड्यूल पर इसे तैयार करना होता है। जी-20 के दौरान भी यही देखा गया है। आगे अगर दिल्ली सरकार, एमसीडी व एनडीएमसी ने इसका सही तरीके से रखरखाव किया कि फायदा दिल्लीवालों को मिलेगा।
सबका प्रदर्शन रखता है मायने
वैश्विक आयोजन चूंकि देश की प्रतिष्ठा से जुड़ा होता है तो केंद्र सरकार इसके लिए विशेष योजना तैयार करती है। इसमें वैश्विक पैमानों का ध्यान रखा जाता है। राज्य सरकार और स्थानीय निकाय भी इसमें सहयोगी बनते हैं। जी-20 की ही बात करें तो इस पर करीब 4,064 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। देश की सौम्य ताकत बयां करता भारत मंडपम ही 2,700 करोड़ रुपये से तैयार हुआ है। 920 करोड़ रुपये की लागत से प्रगति मैदान टनल बनी है। करीब 26 करोड़ रुपये परिवहन व सड़क पर खर्च हुए हैं। वहीं, 60 करोड़ रुपये की लागत से एनडीएमसी इलाके को सजाया गया है। इसके अलावा 3,700 करोड़ रुपये की लागत से पेरिफेरल रोड बनाई गई है।
सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था
एशियाड के दौरान दिल्ली को नई-नई डीटीसी की बसों ने राह आसान करने में मददगार साबित हुआ तो कॉमनवेल्थ गेम्स के दौरान दिल्ली में विश्वस्तरीय लो-फ्लोर बस चलने लगी। बसों का स्टॉपेज भी विश्वस्तरीय तैयार किया गया। उस दौरान ही प्रदूषण रहित बस चलाने की परिकल्पना ने जोर पकड़ा और जी-20 को लेकर 400 ई-बसें सड़कों पर दौड़ने लगी हैं। दिल्ली में इस तरह की 8000 ई-बसें दौड़ाने की योजना है। लिहाजा लोगों का सफर भी आसान होगा। इसी तरह कॉमनवेल्थ गेम्स की वजह से दिल्ली पूरी तरह रोड अंडर ब्रिज, ओवर ब्रिज और लीव क्लोवर वाले फ्लाइओवर के नेटवर्क से जुड़ गया।
प्राचीन धरोहरों का भी होता रहता है कायाकल्प
विदेशी मेहमान जब भी आते हैं तो दिल्ली की धरोहरों को चमकाया जाता है। भारत की संस्कृति जिस तरह से मंडपम में दिख रही है उसी तरह संस्कृति, इतिहास, दिल्ली विकास को झलकाने वाली धरोहर भी इन दिनों चमक रही हैं। खासकर कॉमनवेल्थ गेम के दौरान भी सभी प्राचीनतम धरोहरों का कायाकल्प किया गया था।
खेलों के आयोजन से दिल्ली में स्टेडियम की भरमार
वैश्विक स्तर पर खेलों के आयोजन ने दिल्ली में वर्ल्ड क्लास स्टेडियम का एक तरह से तोहफा दिया। कॉमनवेल्थ और एशियाड गेम्स ने वर्ल्ड क्लास नेहरू स्टेडियम ही नहीं इंदिरा गांधी इंडोर स्टेडियम, यमुना स्पोर्ट्स कॉप्लेक्स, एशियाड गेम विलेज, छत्रसाल स्टेडियम, तालकटोरा स्टेडियम, त्यागराज स्टेडियम समेत दिल्ली के हर कोने में विश्व स्तरीय बनाया गया है, जो दिल्ली के लिए एक बहुत बड़ा तोहफा है। इस मामले में भारत ओलंपिक गेम्स भी आयोजन कराने का माद्दा रखता है।
शहर की खूबसूरती भी बढ़ाने में सहयोगी
हर समय हर वक्त में वैश्विक आयोजन दिल्ली को वर्ल्ड क्लास सिटी बनाने में सहयोगी रहता है। विदेशों की तर्ज पर फाउंटेन, जगह-जगह भारतीय संस्कृति को दर्शाने वाले कलाकृतियां, पार्कों के रखरखाव, सजावट, वेस्ट टू वंडर पार्क समेत कई सौंदर्यीकरण परियोजनाओं को अंजाम दिया जाता है।