भूकंप के साये में दिल्ली: तेज झटके झेलने के लिए तैयार नहीं राजधानी, क्या कहता है 1505 से 2025 तक का डेटाबेस?
-हिमालय से महज 250 किलोमीटर की दूरी, सक्रिय फॉल्ट लाइनों से घिरी
-नरम मिट्टी पर खड़ी घनी आबादी वाली राजधानी प्राकृतिक आपदा के लिए बेहद संवेदनशील
Please wait...
विस्तार
दिल्ली भूकंपीय जोन-4 में सांस ले रही है, जहां यदि 7.0 से 7.9 तीव्रता का भूकंप आया तो सब कुछ तबाह हो सकता है। हिमालय से महज 250 किलोमीटर की दूरी, सक्रिय फॉल्ट लाइनों से घिरी, नरम मिट्टी पर खड़ी यह घनी आबादी वाली राजधानी प्राकृतिक आपदा के लिए बेहद संवेदनशील है। राष्ट्रीय राजधानी वास्तव में इन तेज झटकों को झेलने के लिए तैयार नहीं है।
दिल्ली की मिट्टी की प्रकृति भूकंप के लिए संवेदनशील
वैज्ञानिक डेटा से पता चलता है कि दिल्ली की भौगोलिक स्थिति और मिट्टी की प्रकृति के कारण ये भूकंप के लिए संवेदनशील है। जोखिम मूल्यांकन बताता है कि एक बड़ा भूकंप विनाशकारी हो सकता है, क्योंकि शहर की संरचनाएं और आबादी इसे झेलने के लिए तैयार नहीं हैं। विशेषज्ञ बताते हैं कि तैयारी में कुछ प्रगति जरूर हुई है, लेकिन व्यावहारिक स्तर पर अभी बहुत काम बाकी है। सख्त नियमों का पालन, पुरानी इमारतों की रेट्रोफिटिंग और जन जागरूकता ही इसे कम जोखिम वाला बना सकते हैं।
टेक्टोनिक प्लेटों की गतिविधियां भूकंप का कारण
दिल्ली में राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र (एनसीएस) भूकंपीय निगरानी और माइक्रोजोनेशन अध्ययन करता है। दिल्ली का माइक्रोजोनेशन मैप तैयार किया गया है, जो जोखिम क्षेत्रों को चिह्नित करता है। वैज्ञानिकों के मुताबिक दिल्ली की भौगोलिक और संरचनात्मक स्थिति ऐसी है, जहां टेक्टोनिक प्लेटों की गतिविधियां भूकंप का कारण बनती हैं। इसके अलावा, दिल्ली में स्थानीय फॉल्ट लाइनें (जैसे दिल्ली फॉल्ट, मथुरा फॉल्ट, और सोहना फॉल्ट) भी सक्रिय हैं, जो छोटे और मध्यम तीव्रता के भूकंप पैदा करती हैं। घनी आबादी और ऊंची इमारतों का बेतहाशा निर्माण इस खतरे को गंभीर बनाता है।
दिल्ली में बड़े भूकंप की संभावना कम है - विशेषज्ञ
राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र के प्रमुख और वैज्ञानिक डॉ. ओपी मिश्रा के मुताबिक यमुना के वाटर चैनल टूटने के कारण दिल्ली एनसीआर में भूकंप की स्थिति बनती है। लेकिन दिल्ली के इर्द गिर्द टेक्टॉनिक प्लेट्स की लंबाई छोटी है। इसलिए यहां 7.0 या इससे अधिक तीव्रता का भूकंप आने का खतरा कम है। यदि पहले देखें तो हिमालयन भूकंप से कई बार दिल्ली हिली, लेकिन दिल्ली ये भूकंप के झटके झेल गई। लेकिन दिल्ली को भूकंप के लिए तैयार होना अभी बाकी है। खासकर पुरानी इमारतों की रेट्रोफिटिंग की जाए और नए भवन भूकंपरोधी बनाए जाएं, ये बेहद जरूरी है।
भूकंप विज्ञान केंद्र के पास 1505-2025 तक का डेटाबेस
राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र के पूर्व प्रमुख और वैज्ञानिक डॉ. जेएल गौतम ने कहा कि कहां, कितना बड़ा और कब भूकंप आएगा ये सटीक रूप से हम पता नहीं लगा सकते, लेकिन दिल्ली के आस पास बड़े भूकंप की संभावना कम है। हिमालय में यूरेशियन और इंडियन प्लेटें टकरा रही हैं, जिसके कारण यहां भूकंप हो सकता है। लेकिन दिल्ली के आस पास की फॉल्ट लाइनें इतना बड़ा भूकंप पैदा करने के काबिल नहीं हैं। राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र के पास 1505-2025 तक का डेटाबेस है। दिल्ली में 1720 के आस पास बड़ा भूकंप आया था, जिसकी तीव्रता 6.0 बताई जाती है। लेकिन इसके बाद दिल्ली में 5.0 तीव्रता से ज्यादा का भूकंप कभी नहीं आया।
अधिकतर इमारतें नहीं भूकंपरोधी
दिल्ली में चांदनी चौक, करोल बाग और सदर-पहाड़गंज इलाके में कई पुरानी इमारतें और करीब 1800 अनाधिकृत कॉलोनियां हैं, जो भूकंपरोधी मानकों को पूरा नहीं करतीं। हाल के वर्षों में नए निर्माणों के लिए भूकंपरोधी डिजाइन (बीआईएस कोड आईएस 1893) लागू करने की कोशिश की गई है, लेकिन इसके कार्यान्वयन में कमी है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर 7.0 या उससे अधिक तीव्रता का भूकंप आया, तो कई इमारतें, खासकर पुरानी और कमजोर संरचनाएं, ढह सकती हैं। ऊंची इमारतों में भी, सभी के भूकंपरोधी होने की गारंटी नहीं है, क्योंकि यहां नियमों का पालन और निरीक्षण बेहद कमजोर स्थिति में है।
आपदा प्रबंधन की तैयारियां भी अपर्याप्त
दिल्ली आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (डीडीएमए) ने 2025 के लिए राज्य कार्य योजना बनाई है, जिसमें भूकंप के साथ शहरी बाढ़ और हीट वेव प्रबंधन शामिल है। स्कूलों और कार्यालयों में मॉक ड्रिल आयोजित की जाती हैं, लेकिन यह नियमित या व्यापक नहीं है। जनता को ड्रॉप, कवर, होल्ड ऑन जैसी तकनीकों की जानकारी कम ही है। अस्पतालों में बड़े पैमाने पर घायलों को संभालने के लिए पर्याप्त बेड और संसाधन नहीं हैं। दिल्ली में भारी ट्रैफिक और भीड़ के कारण राहत व बचाव कार्यों में बाधा आ सकती है। पुरानी इमारतों की रेट्रोफिटिंग भी सीमित है, केवल सरकारी इमारतों में ही कुछ काम हुआ है, निजी क्षेत्र में यह लगभग नगण्य है।
कमियां और चुनौतियां बड़ी हैं
दिल्ली में कई बिल्डर भूकंपरोधी मानकों को नजरअंदाज करते हैं। पुरानी इमारतों को मजबूत करने के लिए रेट्रोफिटिंग की प्रक्रिया धीमी है। अगर दिल्ली में अधिक तीव्रता का भूकंप आया, तो लाखों लोग प्रभावित हो सकते हैं। बिजली, पानी, और संचार जैसी सेवाएं ठप हो सकती हैं। मेट्रो, रेलवे, और अन्य परिवहन प्रभावित होंगे। आर्थिक नुकसान अरबों रुपये में हो सकता है।