विदेशी महिला से गैंगरेप मामले में HC ने रखा अपना फैसला बरकरार, सभी दोषियों को मिली उम्रकैद की सजा
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हाईकोर्ट ने डेनमार्क की महिला से गैंगरेप के पांच दोषियों की अपील खारिज करते हुए उनकी उम्रकैद की सजा को बहाल रखा है। अदालत ने स्पष्ट किया कि दोषियों को सजा में किसी भी प्रकार की छूट न दी जाए और मृत्यु तक जेल में रखा जाए।
निचली अदालत ने वर्ष 2016 को सभी को सजा सुनवाई थी। न्यायमूर्ति एस.मुरलीधर और न्यायमूर्ति आईएस मेहता की खंडपीठ ने अपने फैसले में कहा कि पीड़िता की गवाही और डीएनए रिपोर्ट से अपराधियों के अपराध की पुष्टी हुई है।
खंडपीठ ने उचित तरीके से जांच न करने पर जांच अधिकारी को फटकार लगाते हुए मामले के चश्मदीद एक गवाह की गवाही को खारिज कर दिया।
गवाह ने दावा किया था कि उसने आरोपियों को पीड़िता के साथ दुष्कर्म करते हुए देखा था। अदालत ने कहा इस गवाही को प्राकृतिक साक्षी के रूप में स्वीकार नहीं किया जा सकता है।
खंडपीठ ने कहा पीड़िता की गवाही डीएनए रिपोर्ट के साथ साक्ष्यों के रूप में साबित हुई है। ऐसे में उनका माना है कि ट्रायल कोर्ट द्वारा दोषियों को 10 जून 2016 को सजा संबंधी निर्णय पूणत: सही है, अत: वे दोषियों की अपील खारिज करते है।
ट्रायल कोर्ट ने 10 जून 2016 को पांचों दोषियों को मृत्यु तक उम्रकैद की सजा प्रदान की थी। अदालत ने कहा था कि वर्ष 2014 को हुई इस घटना अपमान और क्रूर थी और अपहरण और बलात्कार की इस घटना से देश की प्रतिष्ठा को कलंकित किया था।
पुलिस के अनुसार 14 जनवरी 2014 की रात 9 अवारा लोगों ने डेनिस महिला का चाकू की नोंक पर उस समय अपहरण कर रलिया जब वह नई दिल्ली रेलवे स्टेशन के पास रेलेव ऑफिसर क्लब के पास से होते हुए पहाडग़ंज होटल जा रही थी।
सभी आरोपियों ने उसके साथ गैंगरेप किया व लूटपाट कर उसे क्लब के करीब एक निर्जन स्थान पर फेंक कर फरार हो गए थे। पीड़िता 1 जनवरी 2014 को नई दिल्ली घूमने आई थी और आगरा जाने के कुछ दिन पहले ही पहाडग़ंज होटल अपने साथियों के साथ रूकी थी। पुलिस के अनुसार कनाट प्लेस से रास्ता भटकने के कारण वह गलत रास्ते पर चली गई थी।